किरण कुमार का जन्मदिन: गुजराती सिनेमा से बॉलीवुड वापसी, राकेश रोशन ने बदली किस्मत
सारांश
मुख्य बातें
बहुआयामी अभिनेता किरण कुमार का जन्म 20 अक्टूबर 1953 को मुंबई में एक कुलीन कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। अपने करियर में खलनायक से लेकर संजीदा किरदारों तक का सफर तय करने वाले किरण कुमार 300 से अधिक हिंदी, भोजपुरी और गुजराती फिल्मों में काम कर चुके हैं और आज भी सक्रिय हैं। उनकी जीवन-यात्रा में एक ऐसा दौर भी आया जब बॉलीवुड में काम न मिलने पर उन्होंने गुजराती सिनेमा का रुख किया — और वहाँ से उन्हें 'गुजराती सिनेमा का बच्चन' की उपाधि मिली।
शाही विरासत और शिक्षा
किरण कुमार की पारिवारिक पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध रही है। उनके परदादा कश्मीर रियासत के अधीन गिलगित एजेंसी के वजीर-ए-वजारत (मुख्यमंत्री) के रूप में कार्यरत थे। उनके पिता ओंकारनाथ धर, हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता जीवन थे, जिससे कला किरण कुमार को विरासत में मिली।
प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में हुई। इसके बाद मुंबई के बांद्रा स्थित आरडी नेशनल कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में अभिनय का विधिवत प्रशिक्षण लिया।
करियर की शुरुआत और टेलीविजन पहचान
किरण कुमार ने अभिनय की पहली झलक 1960 में फिल्म 'लव इन शिमला' में एक छोटी भूमिका के रूप में दिखाई। मुख्य अभिनेता के रूप में उनकी पहली फिल्म 1974 में आई — 'आजाद मोहब्बत'। इसके साथ-साथ उन्होंने टेलीविजन पर भी अपनी छाप छोड़ी। जिंदगी, घुटन, साहिल, मंजिल, गृहस्ती और कथा सागर जैसी श्रृंखलाओं में उनके अभिनय ने उन्हें भारतीय टेलीविजन पर एक स्थापित नाम बना दिया।
गुजराती सिनेमा का सफर और 'बच्चन' की उपाधि
'जंगल में मंगल' जैसी फिल्मों की रिलीज के बाद किरण कुमार के बॉलीवुड करियर में गिरावट आई। इस मंदी के दौर में काम न मिलने पर उन्होंने गुजराती फिल्म उद्योग की ओर रुख किया। गौरतलब है कि इस कदम ने उनके करियर को एक नई दिशा दी — गुजराती सिनेमा में उन्होंने इतनी जल्दी लोकप्रियता हासिल की कि उन्हें 'गुजराती सिनेमा का बच्चन' कहा जाने लगा।
यह ऐसे समय में आया जब कई बॉलीवुड कलाकार क्षेत्रीय सिनेमा को दूसरे दर्जे का मानते थे। किरण कुमार ने इस धारणा को तोड़ा और साबित किया कि प्रतिभाशाली अभिनेता हर भाषा के सिनेमा में अपनी पहचान बना सकता है।
राकेश रोशन की भूमिका और बॉलीवुड वापसी
निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने किरण कुमार को अपनी फिल्म 'खुदगर्ज' के ज़रिये हिंदी सिनेमा में वापस लाने का काम किया। यह वापसी करियर की दृष्टि से एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। इसके बाद 'तेजाब' और 'खुदा गवाह' जैसी बड़ी फिल्मों में उनकी नकारात्मक भूमिकाओं ने दर्शकों और आलोचकों दोनों की प्रशंसा बटोरी। नकारात्मक किरदारों में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले।
इस दौर में किरण कुमार ने राम लखन, दरार, थानेदार, पत्थर के फूल, खून का कर्ज, हिना, बोल राधा बोल, आज का अर्जुन, काला बाजार, धड़कन, एलओसी कारगिल और बॉबी जासूस सहित अनेक यादगार फिल्मों में काम किया।
व्यक्तिगत जीवन
किरण कुमार की शादी पूर्व गुजराती अभिनेत्री, स्टाइलिस्ट और सलाहकार सुषमा वर्मा से हुई है। इस दंपति के तीन बच्चे हैं — अभिनेता शौर्य कुमार, विकास कुमार और बेटी सृष्टि कुमार।
आज 73 वर्ष की आयु में भी किरण कुमार की सक्रियता यह बताती है कि असली प्रतिभा उम्र की सीमाओं को नहीं मानती — और आने वाले वर्षों में भी उनका अभिनय पर्दे पर दर्शकों को रोमांचित करता रहेगा।