मनोज बाजपेयी पहली बार बनेंगे महात्मा गांधी, सुधीर मिश्रा की फिल्म में दिखेंगे आज़ादी के '21 अहम दिन'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता मनोज बाजपेयी पहली बार पर्दे पर महात्मा गांधी का किरदार निभाने जा रहे हैं — और यह भूमिका उन्हें निर्देशक सुधीर मिश्रा की आगामी अनटाइटल्ड फिल्म में मिली है। 20 अगस्त 2026 को साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह फिल्म भारत की आज़ादी के दौरान गांधीजी के जीवन के 21 विशेष दिनों पर केंद्रित है — इतिहास का वह अध्याय जो अब तक मुख्यधारा के सिनेमा में अपेक्षाकृत अनदेखा रहा है।
फिल्म की कहानी क्या है
सुधीर मिश्रा के अनुसार, फिल्म उस नाज़ुक दौर की कहानी कहती है जब दिल्ली सत्ता का केंद्र बन रही थी और देश आज़ादी की दहलीज़ पर खड़ा था। उस समय गांधीजी ने एक अप्रत्याशित निर्णय लिया — उन्होंने सत्ता के केंद्र से दूर जाने का रास्ता चुना। मिश्रा ने कहा, 'उनका यह कदम पीछे हटना नहीं था। इसके बजाय उन्होंने खुद को एक नए रूप में देखा।'
निर्देशक ने स्पष्ट किया कि फिल्म इतिहास की किताबों में दर्ज बड़ी घटनाओं के पीछे छिपी मानवीय कहानी को सामने लाएगी। उन्होंने कहा, 'यह नई फिल्म इतिहास के एक ज़रूरी, लेकिन कम चर्चित अध्याय पर ध्यान देती है।'
मनोज बाजपेयी के लिए क्यों है यह सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिका
अपने करियर में शूल, सत्या और द फैमिली मैन जैसी विविध भूमिकाओं से पहचान बना चुके मनोज बाजपेयी के लिए महात्मा गांधी का किरदार एक नई परीक्षा मानी जा रही है। फिल्म गांधीजी के व्यक्तित्व के उस मानवीय पहलू को उजागर करने की कोशिश करेगी जो इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में अक्सर विस्तार से नहीं आता।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी सिनेमा में ऐतिहासिक और जीवनी-आधारित फिल्मों की माँग लगातार बढ़ रही है। गांधीजी पर इससे पहले रिचर्ड एटनबरो की 1982 की फिल्म 'गांधी' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे चर्चित रही है, लेकिन किसी प्रमुख हिंदी अभिनेता द्वारा यह किरदार निभाना अपने आप में दुर्लभ है।
फिल्म की टीम और निर्माण
फिल्म में सौरभ शुक्ला भी एक अहम भूमिका में नज़र आएंगे। निर्माण की ज़िम्मेदारी अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत ने मिलकर संभाली है। अनुभव सिन्हा 'मुल्क', 'आर्टिकल 15' और 'थप्पड़' जैसी सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। फिल्म ए बनारस मीडिया वर्क्स के बैनर तले बन रही है और एनएच स्टूडियोज़ इसे प्रस्तुत कर रहा है।
गौरतलब है कि यह फिल्म सुधीर मिश्रा की बड़े पर्दे पर वापसी भी है, जो खुद 'हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी' और 'इस रात की सुबह नहीं' जैसी कालजयी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।
आगे क्या
फिल्म का नाम अभी तय नहीं हुआ है और रिलीज़ की तारीख की घोषणा भी बाकी है। इस फिल्म पर सिनेमा जगत और इतिहास-प्रेमियों की निगाहें टिकी रहेंगी — खासकर इसलिए कि यह गांधीजी के उस अनकहे दौर को पर्दे पर उतारने का दावा करती है जिसे आधिकारिक इतिहास ने हाशिये पर रखा।