पहलाज निहलानी को पहले नहीं भाया था गोविंदा का लुक, एक डांस वीडियो ने पलट दी थी पूरी कहानी
सारांश
मुख्य बातें
मशहूर फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के 76 वर्ष की आयु में निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर है। उनके जाने के साथ ही उनसे जुड़े वे किस्से भी चर्चा में हैं, जो हिंदी सिनेमा के इतिहास को एक नया मोड़ देने वाले साबित हुए — खासतौर पर अभिनेता गोविंदा की खोज की वह कहानी, जो आज भी बॉलीवुड के गलियारों में दोहराई जाती है।
करियर की शुरुआत और पहचान
पहलाज निहलानी का झुकाव बचपन से ही फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया की तरफ रहा। उन्होंने फिल्म निर्माण में कदम रखते हुए 1982 में फिल्म 'हथकड़ी' से अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय और संजीव कुमार जैसे दिग्गज कलाकार थे। इसके बाद 1985 में आई 'आंधी-तूफान' ने उन्हें एक सफल निर्माता के रूप में स्थापित किया। धीरे-धीरे उनका नाम उन चुनिंदा निर्माताओं में शामिल हो गया, जिनकी फिल्मों का दर्शक बेसब्री से इंतजार करते थे।
गोविंदा की खोज — वह किस्सा जो इतिहास बन गया
उनके करियर का सबसे निर्णायक मोड़ 1986 में आया, जब उन्होंने फिल्म 'इल्जाम' बनाई। इसी फिल्म से गोविंदा ने बतौर मुख्य अभिनेता बॉलीवुड में प्रवेश किया। इस मौके से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा खुद पहलाज निहलानी ने कई इंटरव्यू में सुनाया था।
उन्होंने बताया था, 'जब पहली बार गोविंदा मुझसे मिलने आए थे, तब उनका चेहरा और लुक मुझे कुछ खास नहीं लगा था। मुझे शक था कि शायद यह लड़का बड़े पर्दे पर उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाएगा। लेकिन अगले ही दिन गोविंदा अपने डांस का वीडियो लेकर पहुंचे। वीडियो देखते ही मेरी राय पूरी तरह बदल गई। मैंने गोविंदा की एनर्जी, डांस और आत्मविश्वास को देखकर तुरंत फैसला कर लिया कि यही मेरी फिल्म का हीरो होगा। यह फैसला बाद में हिंदी सिनेमा के सबसे सफल फैसलों में से एक साबित हुआ।'
गोविंदा-निहलानी जोड़ी की सफलता
'इल्जाम' की सफलता ने गोविंदा को रातोंरात पहचान दिला दी। इसके बाद दोनों की जोड़ी ने एक के बाद एक सफल फिल्में दीं। 'शोला और शबनम' और 'आंखें' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े। विशेष रूप से 'आंखें' उस दौर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में गिनी गई। इन फिल्मों ने गोविंदा को हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार बना दिया।
व्यापक योगदान और सीबीएफसी का कार्यकाल
पहलाज निहलानी ने सिर्फ गोविंदा ही नहीं, बल्कि कई अन्य कलाकारों को भी अवसर दिए। उनकी फिल्मों में मनोरंजन, कॉमेडी और पारिवारिक भावनाओं का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता था। उन्होंने 'अंदाज', 'तलाश', 'जूली 2' और 'रंगीला राजा' जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया। फिल्म निर्माण के अलावा वे 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष भी रहे। उनके निधन के साथ बॉलीवुड ने एक ऐसा निर्माता खो दिया, जिसने प्रतिभा को उसके पहले दिन ही पहचानने की अद्भुत क्षमता रखी।