29 जुलाई 2026
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राकेश बेदी ने भाबला फाउंडेशन के टीबी अभियान को सराहा, बोले — 'सिर्फ बातें नहीं, इलाज भी हो रहा है'

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राकेश बेदी ने भाबला फाउंडेशन के टीबी अभियान को सराहा, बोले — 'सिर्फ बातें नहीं, इलाज भी हो रहा है'

सारांश

अभिनेता राकेश बेदी ने मुंबई में भाबला फाउंडेशन के टीबी बुक मार्क कैंपेन को अपना समर्थन दिया और स्पष्ट कहा कि यह संस्था सिर्फ बातें नहीं करती, बल्कि ज़मीन पर इलाज भी करती है — जो टीबी उन्मूलन की दिशा में एक ठोस और विश्वसनीय पहल है।

मुख्य बातें

राकेश बेदी ने 29 जुलाई 2026 को मुंबई में भाबला फाउंडेशन के टीबी बुक मार्क कैंपेन में भाग लिया।
बेदी ने कहा कि फाउंडेशन केवल जागरूकता नहीं फैला रही, बल्कि मरीज़ों का इलाज भी कर रही है।
अभिनेता ने जेन-ज़ी पीढ़ी को टीबी के प्रति जागरूक और सजग बताया।
भारत सरकार प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और नि-क्षय योजना के तहत मुफ़्त जाँच व पोषण सहायता दे रही है।
बेदी को 'धुरंधर' (2025) और 'धुरंधर: द रिवेंज' (2026) में जमील जमाली खान के किरदार से नई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।

अभिनेता राकेश बेदी ने 29 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित भाबला फाउंडेशन के टीबी बुक मार्क कैंपेन कार्यक्रम में शिरकत की और इस जनस्वास्थ्य पहल का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह संस्था केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर मरीज़ों का उपचार भी कर रही है।

अभिनेता ने क्या कहा

कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद राकेश बेदी ने कहा, 'भाबला फाउंडेशन के टीबी बुक मार्क कैंपेन में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे लगता है कि वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं — वे सिर्फ बातें नहीं कर रहे, बल्कि लोगों का इलाज भी कर रहे हैं।' उनके इस बयान ने फाउंडेशन के व्यावहारिक दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

युवा पीढ़ी और टीबी जागरूकता

बेदी ने यह भी कहा कि आज की जेन-ज़ी पीढ़ी टीबी (तपेदिक) के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक है। उनके अनुसार, यह एक सजग और समझदार पीढ़ी है जो स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को गंभीरता से लेती है। गौरतलब है कि भारत सरकार प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और नि-क्षय योजना के ज़रिए सामुदायिक स्क्रीनिंग, मुफ़्त जाँच और पोषण सहायता उपलब्ध करा रही है।

राकेश बेदी का फ़िल्मी और रंगमंच सफ़र

पुणे के फ़िल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (FTII) से अभिनय में स्नातक करने के बाद बेदी ने दिल्ली में रंगमंच से अपनी कलायात्रा शुरू की। 1979 में फ़िल्म 'अहसास' से पर्दे पर क़दम रखने के बाद 'चश्मे बद्दूर' (1981) और 'एक दूजे के लिए' (1981) जैसी फ़िल्मों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। हास्य और चरित्र भूमिकाओं में उनकी पकड़ बेमिसाल रही।

टेलीविज़न पर 'भाभी जी घर पर हैं' (2015) और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (2020) जैसे दीर्घकालिक धारावाहिकों में उनकी भूमिकाओं ने दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई।

नए किरदार से मिली नई पहचान

2025 में जासूसी एक्शन-थ्रिलर 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' (2026) में जमील जमाली खान के किरदार ने बेदी को एक सर्वथा नए रूप में प्रस्तुत किया। इस भूमिका को देश-विदेश में दर्शकों की ज़बरदस्त सराहना मिली और उनके भीतर के बहुआयामी कलाकार को नई पहचान मिली।

भाबला फाउंडेशन की भूमिका

भाबला फाउंडेशन का टीबी बुक मार्क कैंपेन टीबी उन्मूलन की दिशा में जागरूकता और उपचार दोनों को एक साथ संचालित करने वाली पहल है। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब भारत 2025 तक टीबी मुक्त होने के लक्ष्य की ओर प्रयासरत है। राकेश बेदी जैसे प्रतिष्ठित चेहरों का जुड़ाव इस अभियान को सामाजिक विश्वसनीयता और व्यापक पहुँच दिलाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सेलिब्रिटी समर्थन उन इलाकों तक पहुँचता है जहाँ टीबी का बोझ सबसे अधिक है। भारत में टीबी के मामले अभी भी विश्व में सर्वाधिक हैं और 2025 का उन्मूलन लक्ष्य चूक चुका है। भाबला फाउंडेशन का उपचार-केंद्रित मॉडल उल्लेखनीय है, लेकिन इसकी पहुँच और प्रभाव के स्वतंत्र आँकड़े सार्वजनिक नहीं हैं। जब तक ऐसी पहलों का मापनीय डेटा सामने न आए, तब तक इन्हें जागरूकता की एक कड़ी के रूप में देखना उचित होगा — समाधान के रूप में नहीं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाबला फाउंडेशन का टीबी बुक मार्क कैंपेन क्या है?
भाबला फाउंडेशन का टीबी बुक मार्क कैंपेन एक जनस्वास्थ्य पहल है जो टीबी (तपेदिक) के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ मरीज़ों के उपचार में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। अभिनेता राकेश बेदी ने 29 जुलाई 2026 को मुंबई में इस अभियान के कार्यक्रम में शिरकत कर इसे अपना समर्थन दिया।
राकेश बेदी ने भाबला फाउंडेशन के बारे में क्या कहा?
राकेश बेदी ने कहा कि भाबला फाउंडेशन सिर्फ बातें नहीं करती, बल्कि लोगों का इलाज भी करती है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक ज़िम्मेदार और व्यावहारिक जनस्वास्थ्य अभियान बताया।
भारत में टीबी उन्मूलन के लिए सरकार क्या कर रही है?
भारत सरकार प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और नि-क्षय योजना के ज़रिए सामुदायिक स्क्रीनिंग, मुफ़्त जाँच और मरीज़ों को पोषण सहायता प्रदान कर रही है। ये योजनाएँ देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रम हैं।
राकेश बेदी कौन हैं और उनका फ़िल्मी करियर कैसा रहा है?
राकेश बेदी पुणे के FTII से प्रशिक्षित अभिनेता हैं, जिन्होंने 1979 में फ़िल्मी करियर शुरू किया। 'चश्मे बद्दूर' (1981) और 'एक दूजे के लिए' (1981) से पहचान मिली, और 'धुरंधर' (2025) व 'धुरंधर: द रिवेंज' (2026) में जमील जमाली खान के किरदार से उन्हें नई अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
क्या जेन-ज़ी पीढ़ी टीबी के प्रति जागरूक है?
राकेश बेदी के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी यानी जेन-ज़ी टीबी को लेकर काफी जागरूक और सजग है। उन्होंने इसे एक समझदार पीढ़ी बताया जो स्वास्थ्य मुद्दों को गंभीरता से लेती है।
राष्ट्र प्रेस
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