राकेश बेदी ने भाबला फाउंडेशन के टीबी अभियान को सराहा, बोले — 'सिर्फ बातें नहीं, इलाज भी हो रहा है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता राकेश बेदी ने 29 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित भाबला फाउंडेशन के टीबी बुक मार्क कैंपेन कार्यक्रम में शिरकत की और इस जनस्वास्थ्य पहल का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह संस्था केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर मरीज़ों का उपचार भी कर रही है।
अभिनेता ने क्या कहा
कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद राकेश बेदी ने कहा, 'भाबला फाउंडेशन के टीबी बुक मार्क कैंपेन में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे लगता है कि वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं — वे सिर्फ बातें नहीं कर रहे, बल्कि लोगों का इलाज भी कर रहे हैं।' उनके इस बयान ने फाउंडेशन के व्यावहारिक दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
युवा पीढ़ी और टीबी जागरूकता
बेदी ने यह भी कहा कि आज की जेन-ज़ी पीढ़ी टीबी (तपेदिक) के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक है। उनके अनुसार, यह एक सजग और समझदार पीढ़ी है जो स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को गंभीरता से लेती है। गौरतलब है कि भारत सरकार प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान और नि-क्षय योजना के ज़रिए सामुदायिक स्क्रीनिंग, मुफ़्त जाँच और पोषण सहायता उपलब्ध करा रही है।
राकेश बेदी का फ़िल्मी और रंगमंच सफ़र
पुणे के फ़िल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (FTII) से अभिनय में स्नातक करने के बाद बेदी ने दिल्ली में रंगमंच से अपनी कलायात्रा शुरू की। 1979 में फ़िल्म 'अहसास' से पर्दे पर क़दम रखने के बाद 'चश्मे बद्दूर' (1981) और 'एक दूजे के लिए' (1981) जैसी फ़िल्मों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। हास्य और चरित्र भूमिकाओं में उनकी पकड़ बेमिसाल रही।
टेलीविज़न पर 'भाभी जी घर पर हैं' (2015) और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (2020) जैसे दीर्घकालिक धारावाहिकों में उनकी भूमिकाओं ने दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई।
नए किरदार से मिली नई पहचान
2025 में जासूसी एक्शन-थ्रिलर 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' (2026) में जमील जमाली खान के किरदार ने बेदी को एक सर्वथा नए रूप में प्रस्तुत किया। इस भूमिका को देश-विदेश में दर्शकों की ज़बरदस्त सराहना मिली और उनके भीतर के बहुआयामी कलाकार को नई पहचान मिली।
भाबला फाउंडेशन की भूमिका
भाबला फाउंडेशन का टीबी बुक मार्क कैंपेन टीबी उन्मूलन की दिशा में जागरूकता और उपचार दोनों को एक साथ संचालित करने वाली पहल है। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब भारत 2025 तक टीबी मुक्त होने के लक्ष्य की ओर प्रयासरत है। राकेश बेदी जैसे प्रतिष्ठित चेहरों का जुड़ाव इस अभियान को सामाजिक विश्वसनीयता और व्यापक पहुँच दिलाता है।