रिया चक्रवर्ती का खुलासा: 'सुशांत केस' के ट्रॉमा से अब तक नहीं उबरी, भाई शोविक को है PTSD
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद के उस दर्दनाक दौर को एक बार फिर याद किया, जिसने उनकी और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया। नेहा धूपिया और अंगद बेदी के यूट्यूब चैट शो 'डबल डेट' में दोनों भाई-बहनों ने उस समय की मानसिक पीड़ा, सामाजिक दबाव और डर को लेकर बेबाकी से बात की।
गिरफ्तारी और उसके बाद का दौर
गौरतलब है कि रिया और शोविक चक्रवर्ती को 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच के दौरान सामने आया था और उस वक्त पूरे देश में इस पर व्यापक चर्चा हुई थी। रिया ने शो में स्वीकार किया कि उस अनुभव का असर आज भी उनके जीवन पर बना हुआ है।
रिया का दर्द: 'ट्रॉमा शरीर में भी रहता है'
जब रिया से पूछा गया कि क्या वह उस ट्रॉमा से पूरी तरह उबर पाई हैं, तो उन्होंने कहा, 'ऐसा अनुभव पूरी तरह खत्म नहीं होता। ट्रॉमा केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर और भावनाओं में भी कहीं न कहीं बना रहता है। मैं धीरे-धीरे खुद को संभाल रही हूं। थेरेपी की मदद से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हूं, लेकिन यह दर्द पूरी तरह मिटता नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह अनुभव इसलिए और अधिक कष्टदायक था क्योंकि यह सब कुछ सार्वजनिक रूप से हुआ — पूरे देश और मीडिया की नज़रों में।
शोविक की पीड़ा: टूटे सपने और PTSD
शोविक चक्रवर्ती ने बताया कि एक समय उनका सपना था कि वह IIM या व्हार्टन जैसे प्रतिष्ठित बिज़नेस स्कूल में पढ़ाई करें, लेकिन अचानक हालात ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा, 'एक सामान्य जीवन अचानक ऐसे संकट में बदल गया जिसकी मैंने उम्मीद नहीं की थी। इस बुरे अनुभव से बाहर आने में मुझे लगभग चार से पाँच साल लगे।'
शोविक ने यह भी बताया कि उन्हें पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) है। उन्होंने कहा, 'आज भी अगर दरवाज़े की घंटी बजती है, तो मुझे पुराने दिन याद आ जाते हैं। उस समय ऐसा माहौल था कि हर छोटी आवाज़ भी हमें खतरे जैसी लगती थी।'
सार्वजनिक ट्रायल का असर
रिया ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे कठिन पहलू यह था कि हर कोई मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए उनके बारे में राय बना रहा था। यह ऐसे समय में आया जब वे पहले से ही भीतर से टूटी हुई थीं। दोनों भाई-बहनों ने धीरे-धीरे खुद को संभाला और आगे बढ़ने की कोशिश की।
आगे की राह
रिया चक्रवर्ती ने थेरेपी को अपनी रिकवरी का अहम हिस्सा बताया। शोविक ने भी संकेत दिया कि वे अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। यह बातचीत मानसिक स्वास्थ्य और सार्वजनिक जीवन में ट्रॉमा की गहरी जड़ों पर एक ज़रूरी संवाद खोलती है।