10 जुलाई 2026
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शमिता शेट्टी का एंडोमेट्रियोसिस से संघर्ष: 'दर्द को सामान्य मानती रही, सही डायग्नोसिस में हुई बड़ी देरी'

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शमिता शेट्टी का एंडोमेट्रियोसिस से संघर्ष: 'दर्द को सामान्य मानती रही, सही डायग्नोसिस में हुई बड़ी देरी'

सारांश

शमिता शेट्टी ने माना कि वर्षों तक एंडोमेट्रियोसिस के दर्द को 'सामान्य' समझती रहीं — सर्जरी से 6-8 महीने पहले नींद टूटने पर असलियत सामने आई। उनकी यह कहानी उन लाखों महिलाओं की आवाज़ है जो प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं को चुपचाप सहती रहती हैं।

मुख्य बातें

शमिता शेट्टी ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में एंडोमेट्रियोसिस और पेरिमेनोपॉज से जुड़े अनुभव पहली बार खुलकर साझा किए।
सही डायग्नोसिस मिलने में काफी देरी हुई — शुरुआती जाँचें सामान्य आने पर बीमारी की अनदेखी होती रही।
सर्जरी से छह से आठ महीने पहले दर्द इतना बढ़ा कि नींद टूटने लगी, तब जाकर गंभीरता का एहसास हुआ।
पेरिमेनोपॉज के हार्मोनल बदलावों ने एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों को पहचानना और भी मुश्किल बना दिया।
शमिता ने महिलाओं से अपील की कि शरीर के किसी भी असामान्य संकेत को नज़रअंदाज़ न करें और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें।

अभिनेत्री शमिता शेट्टी ने 10 जुलाई 2026 को अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में खुलासा किया कि वह वर्षों तक एंडोमेट्रियोसिस से जूझती रहीं, लेकिन सही बीमारी का पता लगने में काफी देर हो गई। शमिता ने बताया कि शुरुआती जाँचों में सब कुछ सामान्य दिखने के कारण वह बार-बार अपने दर्द को नज़रअंदाज़ करती रहीं। यह पहला मौका था जब उन्होंने एंडोमेट्रियोसिस और पेरिमेनोपॉज से जुड़े अपने निजी अनुभव इतने विस्तार से साझा किए।

देर से मिला सही निदान

शमिता ने बताया कि जब भी कोई लक्षण महसूस होता, वह खुद को यही समझाती थीं कि शायद यह सामान्य है। उन्होंने कहा, 'मेरे मामले में बीमारी का पता लगने में काफी देर हुई, क्योंकि शुरुआत में मुझे सही डायग्नोसिस नहीं मिला। जब भी कोई लक्षण महसूस होता, मैं खुद को यही समझाती थी कि शायद यह सामान्य है।' उन्होंने यह भी बताया कि उनकी गायनेकोलॉजिस्ट ने पैप स्मीयर समेत सभी ज़रूरी जाँचें कराईं, लेकिन रिपोर्ट सामान्य आने पर किसी ने किसी अन्य कारण की संभावना नहीं तलाशी।

दर्द की नींद खुलने पर जागी चेतना

अभिनेत्री ने बताया कि सर्जरी से लगभग छह से आठ महीने पहले उनकी हालत काफी बिगड़ गई थी। उन्होंने कहा, 'मेरी दर्द सहने की क्षमता काफी मज़बूत है। लेकिन जब दर्द की वजह से मेरी नींद खुलने लगी, तब मुझे एहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है।' इसी समय उन्हें लगा कि शरीर उन्हें संकेत दे रहा है और असली वजह जानना ज़रूरी है।

पेरिमेनोपॉज ने बढ़ाई उलझन

शमिता ने बताया कि उसी दौरान वह पेरिमेनोपॉज के बारे में भी जानकारी हासिल कर रही थीं। हार्मोन में लगातार हो रहे बदलावों की वजह से यह समझना मुश्किल हो गया था कि तकलीफ पेरिमेनोपॉज का हिस्सा है या किसी दूसरी बीमारी का संकेत। उन्होंने कहा, 'एक तरफ हार्मोनल बदलाव हो रहे थे और दूसरी तरफ दर्द लगातार बढ़ रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब पेरिमेनोपॉज की वजह से हो रहा है या कोई दूसरी समस्या है।'

महिलाओं के दर्द को 'सामान्य' मानने की सामाजिक समस्या

शमिता ने इस मुद्दे पर व्यापक सामाजिक पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, 'हम महिलाएं अक्सर अपना दर्द खुलकर व्यक्त नहीं करतीं। पीरियड्स का दर्द हो या हार्मोन से जुड़ी दूसरी परेशानियाँ, इन्हें सामान्य मान लिया जाता है। समाज भी यही मानता है कि महिलाओं को इन सबके साथ जीना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब महिलाओं के स्वास्थ्य, विशेषकर प्रजनन स्वास्थ्य, पर खुलकर बात करने की माँग तेज़ हो रही है।

विशेषज्ञ सलाह और जागरूकता की अपील

शमिता ने महिलाओं से अपील की कि वे शरीर के संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें। उन्होंने कहा, 'अगर लंबे समय तक दर्द या कोई असामान्य लक्षण बने रहें, तो उसे सामान्य मानकर सहने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।' गौरतलब है कि एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत जैसा ऊतक गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगता है, जिससे तीव्र दर्द, अनियमित पीरियड्स और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। पेरिमेनोपॉज वह अवस्था है जब मेनोपॉज से पूर्व महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन शुरू होते हैं। शमिता की यह स्वीकारोक्ति उन लाखों महिलाओं के लिए एक ज़रूरी संदेश है जो अपनी तकलीफ को चुपचाप सहती रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भारत में यह आँकड़ा और भी चिंताजनक हो सकता है जहाँ पीरियड्स के दर्द को सांस्कृतिक रूप से 'सहना' ही माना जाता है। मुख्यधारा की कवरेज इसे अक्सर एक 'इंस्पायरिंग स्टोरी' तक सीमित कर देती है, जबकि असली मुद्दा यह है कि सामान्य जाँचों के सामान्य आने पर डॉक्टर आगे क्यों नहीं सोचते। जब तक महिला स्वास्थ्य को प्राथमिकता और संसाधन नहीं मिलते, ऐसी देरी की कहानियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंडोमेट्रियोसिस क्या है और इसके लक्षण क्या होते हैं?
एंडोमेट्रियोसिस एक गंभीर स्त्री रोग है जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत जैसा ऊतक गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगता है। इससे तीव्र पेट दर्द, अनियमित या दर्दनाक पीरियड्स, और कुछ मामलों में बाँझपन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
शमिता शेट्टी को एंडोमेट्रियोसिस का सही निदान मिलने में देरी क्यों हुई?
शमिता के अनुसार, शुरुआती जाँचें — जिनमें पैप स्मीयर भी शामिल था — सामान्य आईं, जिससे डॉक्टरों और खुद शमिता को लगा कि सब ठीक है। हर बार दर्द होने पर वह खुद को यही समझाती रहीं कि पिछली बार भी कुछ नहीं निकला था, इसलिए यह सामान्य होगा।
पेरिमेनोपॉज क्या है और यह एंडोमेट्रियोसिस से कैसे अलग है?
पेरिमेनोपॉज वह चरण है जब मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू होते हैं। शमिता के मामले में दोनों स्थितियाँ एक साथ थीं, जिससे यह समझना मुश्किल हो गया कि लक्षण किस कारण से हैं — यही देरी की एक बड़ी वजह बनी।
शमिता शेट्टी ने महिलाओं को क्या सलाह दी?
शमिता ने कहा कि महिलाओं को अपने शरीर के किसी भी असामान्य संकेत को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक दर्द या असामान्य लक्षण बने रहें तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, न कि इसे 'सामान्य' मानकर सहते रहना चाहिए।
शमिता शेट्टी ने यह खुलासा कहाँ किया?
शमिता शेट्टी ने अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट 'ऑल अबाउट हर' में यह बातें साझा कीं। यह पहली बार था जब उन्होंने एंडोमेट्रियोसिस और पेरिमेनोपॉज से जुड़े अपने अनुभव इतने विस्तार से सार्वजनिक रूप से बताए।
राष्ट्र प्रेस
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