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सुदेश भोसले: अमिताभ बच्चन की आवाज से 'जुम्मा चुम्मा' तक, तीन दशक की अनोखी कला-यात्रा

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सुदेश भोसले: अमिताभ बच्चन की आवाज से 'जुम्मा चुम्मा' तक, तीन दशक की अनोखी कला-यात्रा

सारांश

अमिताभ बच्चन की आवाज को हूबहू उतारने की कला ने सुदेश भोसले को हिंदी सिनेमा में अनोखी जगह दिलाई। 'जलजला' से शुरू हुई यात्रा 150 से अधिक फिल्मों, एक राष्ट्रीय पुरस्कार और भक्ति संगीत तक फैली — यह सिर्फ नकल नहीं, एक स्वतंत्र कला की कहानी है।

मुख्य बातें

सुदेश भोसले का जन्म 1 जुलाई 1960 को मुंबई में हुआ; माँ सुमंताई भोसले से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा मिली।
वर्ष 1988 में फिल्म 'जलजला' से पार्श्वगायन में पहला बड़ा अवसर मिला।
अमिताभ बच्चन की आवाज में 'जुम्मा चुम्मा दे दे' , 'शावा शावा' , 'सोना सोना' सहित कई हिट गीत गाए।
150 से अधिक फिल्मों में पार्श्वगायन व डबिंग; दिवंगत संजीव कुमार की अधूरी फिल्म में आवाज दी।
वर्ष 2008 में मदर टेरेसा मिलेनियम अवॉर्ड से सम्मानित।
2010 में वज्रांग वंदना महास्त्रोत के भजनों को आवाज देकर भक्ति संगीत में भी योगदान दिया।

हिंदी सिनेमा के जाने-माने पार्श्वगायक, मिमिक्री कलाकार और डबिंग आर्टिस्ट सुदेश भोसले ने अपनी बहुआयामी प्रतिभा के बल पर फिल्म जगत में एक ऐसी पहचान बनाई है जो किसी एक विधा तक सीमित नहीं रही। 1 जुलाई 1960 को मुंबई में जन्मे सुदेश भोसले विशेष रूप से अमिताभ बच्चन की आवाज की हूबहू नकल और उनके लिए गाए गए गीतों के कारण श्रोताओं के दिलों में घर कर गए। 150 से अधिक फिल्मों में आवाज देने वाले इस कलाकार की यात्रा संगीत, मिमिक्री और मंच — तीनों मोर्चों पर एक साथ चलती रही है।

संगीत की नींव और शुरुआती संघर्ष

सुदेश भोसले के संगीत-प्रेम की जड़ें उनके घर में ही थीं। उनकी माँ सुमंताई भोसले स्वयं एक प्रतिष्ठित गायिका हैं और उन्हें ही सुदेश को संगीत की प्रारंभिक शिक्षा देने का श्रेय जाता है। पिता एनआर भोसले के परिवार में पले-बढ़े सुदेश को कॉलेज के दिनों से ही गायन और मिमिक्री का गहरा शौक था। इस प्रतिभा को पहचान मिली और वर्ष 1988 में फिल्म 'जलजला' से उन्हें पार्श्वगायन का पहला बड़ा मौका मिला — और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अमिताभ बच्चन की आवाज और यादगार गीत

सुदेश भोसले की सबसे बड़ी पहचान अमिताभ बच्चन की आवाज को इतनी सटीकता से उतारने की क्षमता है कि श्रोता अंतर करने में असमर्थ हो जाते हैं। इसी विशेषता के चलते उन्होंने कई फिल्मों में बच्चन के लिए पार्श्वगायन किया। उनके लोकप्रिय गीतों में 'जुम्मा चुम्मा दे दे', 'शावा शावा', 'मेरी मखना', 'बड़े मियां तो बड़े मियां' और 'सोना सोना' शामिल हैं — ये गीत आज भी हिंदी फिल्म संगीत के चाहने वालों की जुबान पर हैं।

डबिंग और बहुमुखी प्रतिभा

गायन के साथ-साथ सुदेश भोसले ने डबिंग आर्टिस्ट के रूप में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। दिवंगत अभिनेता संजीव कुमार के निधन के बाद अधूरी रह गई फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' में उन्होंने आवाज देकर इस कठिन जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। इसके अलावा कई अन्य कलाकारों के लिए डबिंग करते हुए उन्होंने अपनी आवाज की विविधता का परिचय दिया।

टीवी, भक्ति संगीत और सम्मान

छोटे पर्दे पर भी सुदेश भोसले की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। विभिन्न संगीत और मनोरंजन कार्यक्रमों में निर्णायक, प्रस्तोता और कलाकार के रूप में उनकी हास्य शैली और मंच-संचालन ने टीवी दर्शकों के बीच उन्हें अलग पहचान दिलाई। 2010 में उन्होंने महात्मा रामचन्द्र वीर और आचार्य धर्मेंद्र द्वारा रचित वज्रांग वंदना महास्त्रोत तथा वज्रांग विनय स्त्रोत के भजनों को अपनी आवाज देकर भक्ति संगीत में भी योगदान दिया। भारतीय संगीत जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2008 में उन्हें प्रतिष्ठित मदर टेरेसा मिलेनियम अवॉर्ड से नवाजा गया।

आशा भोसले का प्रेरणादायी साथ

हाल ही में सुदेश भोसले ने दिग्गज गायिका आशा भोसले को याद करते हुए भावुक शब्दों में बताया कि इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के संघर्ष के दिनों में आशा भोसले ने उन्हें न केवल अवसर दिया, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाया। यह संबंध उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में से एक रहा। तीन दशक से अधिक के इस सफर में सुदेश भोसले आज भी गायकी, मिमिक्री और लाइव प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भोसले ने इसे एक गंभीर व्यावसायिक कला में बदला और दशकों तक उद्योग की जरूरत बने रहे। यह भी विचारणीय है कि आशा भोसले जैसी स्थापित गायिका के प्रोत्साहन के बिना उनका उदय इतना सुगम नहीं होता — जो दर्शाता है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग में 'गेटकीपर' की भूमिका आज भी निर्णायक है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुदेश भोसले कौन हैं और वे किस लिए प्रसिद्ध हैं?
सुदेश भोसले हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक, मिमिक्री कलाकार और डबिंग आर्टिस्ट हैं, जो विशेष रूप से अमिताभ बच्चन की आवाज की हूबहू नकल के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 150 से अधिक फिल्मों में आवाज दी है और 'जुम्मा चुम्मा दे दे' जैसे हिट गीत गाए हैं।
सुदेश भोसले का पार्श्वगायन करियर कब शुरू हुआ?
सुदेश भोसले को वर्ष 1988 में फिल्म 'जलजला' से पार्श्वगायन का पहला बड़ा अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने कई बड़े संगीतकारों के साथ काम करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।
सुदेश भोसले ने अमिताभ बच्चन के लिए कौन-कौन से गीत गाए?
सुदेश भोसले ने अमिताभ बच्चन की आवाज में 'जुम्मा चुम्मा दे दे', 'शावा शावा', 'मेरी मखना', 'बड़े मियां तो बड़े मियां' और 'सोना सोना' जैसे लोकप्रिय गीत गाए। ये गीत हिंदी फिल्म संगीत के चाहने वालों के बीच आज भी बेहद पसंद किए जाते हैं।
सुदेश भोसले को कौन-सा पुरस्कार मिला है?
भारतीय संगीत जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुदेश भोसले को वर्ष 2008 में मदर टेरेसा मिलेनियम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके तीन दशक से अधिक लंबे करियर की मान्यता है।
आशा भोसले का सुदेश भोसले के करियर में क्या योगदान रहा?
सुदेश भोसले ने स्वयं बताया है कि इंडस्ट्री में संघर्ष के शुरुआती दिनों में दिग्गज गायिका आशा भोसले ने उन्हें अवसर दिया और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उनका यह प्रोत्साहन सुदेश के करियर के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में से एक रहा।
राष्ट्र प्रेस
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