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भीष्म साहनी की 'तमस': विभाजन की त्रासदी को कलम से अमर करने वाली कालजयी रचना

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भीष्म साहनी की 'तमस': विभाजन की त्रासदी को कलम से अमर करने वाली कालजयी रचना

सारांश

भीष्म साहनी का उपन्यास 'तमस' 1947 के विभाजन की सांप्रदायिक त्रासदी का वह दस्तावेज़ है जो किसी एक समुदाय को दोषी नहीं ठहराता, बल्कि यह दिखाता है कि अफ़वाह, कट्टरता और राजनीतिक स्वार्थ कैसे आम इंसान को तबाह करते हैं। 1975 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित यह रचना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

मुख्य बातें

भीष्म साहनी का जन्म 8 अगस्त 1915 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में हुआ था।
उनका उपन्यास 'तमस' 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की सांप्रदायिक हिंसा पर आधारित है।
'तमस' को 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और बाद में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
निर्देशक गोविंद निहलानी ने इसे दूरदर्शन के लिए फ़िल्माया; प्रसारण पर रोक की कोशिश हुई, पर अदालत ने अनुमति दी।
साहनी ने इप्टा के साथ रंगमंच और मॉस्को में रूसी साहित्य के अनुवाद में भी योगदान दिया।
11 जुलाई 2003 को दिल्ली में उनका निधन हुआ।

हिंदी साहित्य के शीर्ष कथाकार भीष्म साहनी ने अपने उपन्यास 'तमस' के ज़रिये 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की उस मानवीय पीड़ा को शब्दों में उतारा, जिसे इतिहास की किताबें पूरी तरह बयान नहीं कर सकतीं। साहनी का यह उपन्यास सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक स्वार्थ और आम इंसान की बेबसी का ऐसा दस्तावेज़ है जो दशकों बाद भी उतना ही प्रासंगिक बना हुआ है।

जन्म और साहित्यिक यात्रा

8 अगस्त 1915 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में जन्मे भीष्म साहनी प्रसिद्ध अभिनेता बलराज साहनी के छोटे भाई थे। उन्होंने अध्यापन, पत्रकारिता, अनुवाद और रंगमंच — कई क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी लेखनी ने बनाई। साहनी का साहित्य हमेशा आम आदमी के संघर्ष, गरीबी, असमानता और सांप्रदायिकता के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उनके लिए लेखन महज़ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का माध्यम था।

'तमस' की कथावस्तु और विशेषता

'तमस' की कहानी एक छोटी-सी घटना से शुरू होती है — नत्थू नाम के एक गरीब व्यक्ति से सूअर मरवाया जाता है, और इसी से पूरे शहर में तनाव और दंगे की आग भड़क उठती है। साहनी ने दिखाया कि किस तरह अफ़वाहें, धार्मिक कट्टरता, राजनीतिक षड्यंत्र और व्यक्तिगत स्वार्थ मिलकर आम लोगों की ज़िंदगी तबाह कर देते हैं। इस उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि साहनी ने किसी एक समुदाय को दोषी ठहराने की कोशिश नहीं की — उन्होंने उस सामूहिक त्रासदी को उजागर किया जिसमें कल के पड़ोसी अचानक एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं, घर जलते हैं और इंसानियत सबसे बड़ी कीमत चुकाती है।

पुरस्कार और सम्मान

भीष्म साहनी को 'तमस' के लिए 1975 में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें पद्म भूषण सहित कई महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुए। उनकी अन्य प्रमुख कृतियों में 'बसंती', 'मय्यादास की माड़ी', 'झरोखे', 'कुंतो' और 'नीलू नीलिमा नीलोफर' जैसे उपन्यास शामिल हैं।

टेलीविज़न रूपांतरण और विवाद

उपन्यास की व्यापक लोकप्रियता के बाद निर्देशक गोविंद निहलानी ने इसे दूरदर्शन के लिए फ़िल्माया। इस प्रस्तुति में ओम पुरी, अमरीश पुरी, दीप्ति नवल, दीना पाठक, ए.के. हंगल और स्वयं भीष्म साहनी ने अभिनय किया। सांप्रदायिक हिंसा के यथार्थवादी चित्रण के कारण इसके प्रसारण पर रोक लगाने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत ने इसे प्रसारित करने की अनुमति दी। इसे सांप्रदायिकता के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक दस्तावेज़ माना गया।

रंगमंच, अनुवाद और विरासत

साहित्य के साथ-साथ भीष्म साहनी का इप्टा (IPTA) से गहरा जुड़ाव रहा और वे अभिनय तथा नाटक के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। कुछ समय उन्होंने मॉस्को में अनुवादक के रूप में कार्य किया और रूसी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों का हिंदी में अनुवाद किया। 11 जुलाई 2003 को दिल्ली में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी सरल भाषा में गहरी बात कहने की शैली आज भी पाठकों से सीधे जुड़ती है। 'तमस' केवल साहित्य या सिनेमा का हिस्सा नहीं रही — यह भारतीय समाज की सामूहिक स्मृति और ऐतिहासिक बहस का अपरिहार्य हिस्सा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो साहनी की यह तटस्थ दृष्टि और भी दुर्लभ लगती है। टेलीविज़न प्रसारण पर अदालती लड़ाई यह याद दिलाती है कि असुविधाजनक सच्चाई को दबाने की कोशिशें नई नहीं हैं। 'तमस' इसीलिए सिर्फ साहित्य नहीं, एक नागरिक दायित्व भी है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भीष्म साहनी का उपन्यास 'तमस' किस विषय पर है?
'तमस' 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान फैली सांप्रदायिक हिंसा पर आधारित उपन्यास है। यह दिखाता है कि किस तरह अफ़वाहें, धार्मिक कट्टरता और राजनीतिक स्वार्थ आम लोगों की ज़िंदगी तबाह कर देते हैं।
भीष्म साहनी को 'तमस' के लिए कौन-सा पुरस्कार मिला?
भीष्म साहनी को 'तमस' के लिए 1975 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण सहित कई अन्य सम्मान भी प्राप्त हुए।
गोविंद निहलानी की 'तमस' में कौन-से कलाकार थे?
दूरदर्शन के लिए बनी 'तमस' में ओम पुरी, अमरीश पुरी, दीप्ति नवल, दीना पाठक, ए.के. हंगल और स्वयं भीष्म साहनी ने अभिनय किया था। इसका निर्देशन गोविंद निहलानी ने किया।
'तमस' के प्रसारण पर विवाद क्यों हुआ था?
सांप्रदायिक हिंसा के यथार्थवादी चित्रण को लेकर 'तमस' के प्रसारण पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। हालाँकि बाद में अदालत ने इसे प्रसारित करने की अनुमति दी और इसे सांप्रदायिकता के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक दस्तावेज़ माना गया।
भीष्म साहनी की अन्य प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
भीष्म साहनी की प्रमुख रचनाओं में 'बसंती', 'मय्यादास की माड़ी', 'झरोखे', 'कुंतो' और 'नीलू नीलिमा नीलोफर' जैसे उपन्यास शामिल हैं। नाटक, कहानियों और रूसी साहित्य के हिंदी अनुवाद में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
राष्ट्र प्रेस
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