एम्स डॉक्टर का खुलासा: योग से रूमेटॉइड आर्थराइटिस में सूजन घटी, मानसिक सेहत भी सुधरी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली एम्स के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा कुमार ने 19 जून 2025 को कहा कि नियमित योग अभ्यास न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की पूर्व संध्या पर दिए गए इस बयान में उन्होंने रूमेटॉइड आर्थराइटिस और फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों पर किए गए नैदानिक अध्ययनों के निष्कर्ष साझा किए।
मुख्य शोध निष्कर्ष
डॉ. उमा कुमार के अनुसार, एम्स के अध्ययन में पाया गया कि जो मरीज दवाओं के साथ-साथ योग भी कर रहे थे, उनमें नींद की गुणवत्ता बेहतर हुई, नकारात्मक विचार कम हुए और दर्द में उल्लेखनीय राहत मिली। उन्होंने कहा, 'मरीज बहुत खुश थे, उन्हें अच्छी नींद आती थी, नकारात्मकता कम थी और जीवन की गुणवत्ता अच्छी थी।'
कोशिका स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव देखे गए। डॉ. कुमार ने बताया कि योग करने वाले मरीजों में एपिजेनेटिक बदलाव, इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस सभी में कमी आई। इसके अतिरिक्त, माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन में भी सुधार दर्ज किया गया।
गठिया मरीजों पर असर
एम्स की एक अन्य चिकित्सक ने बताया कि गोनियोमीटर से मापे गए आँकड़ों में योग के बाद मरीजों की फ्लेक्सिबिलिटी और रेंज ऑफ मोशन दोनों में सुधार हुआ। जोड़ों की सूजन (इन्फ्लेमेशन) भी कम हुई, जो गठिया रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
शोध में यह भी सामने आया कि सुपरवाइज्ड योग — यानी किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की देखरेख में किया गया योग — स्वतंत्र रूप से किए गए अभ्यास की तुलना में जोड़ों के दर्द में अधिक राहत देता है। जोड़ों की मांसपेशियों को विशेष लाभ देखा गया।
पीठ दर्द के लिए विशेष आसन
पीठ दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए एम्स के चिकित्सकों ने भुजंगासन और शलभासन की सिफारिश की है। इसके साथ हल्की स्ट्रेचिंग, बॉडी रोटेशन और गर्दन की मांसपेशियों को ढीला करने वाले व्यायाम भी सुझाए गए हैं। इन आसनों से मांसपेशियों में आराम और शरीर की गतिशीलता (मोबिलिटी) में सुधार होता है।
सभी के लिए योग की सलाह
डॉ. उमा कुमार ने स्पष्ट किया कि योग का लाभ केवल गठिया या किसी विशेष बीमारी के मरीजों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि 'आप, मैं, हम सभी को नियमित रूप से योग को अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहिए।' उन्होंने केंद्र सरकार की योग-संबंधी पहलों की सराहना करते हुए इसे भारतीय परंपरा का अमूल्य हिस्सा बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए भारत और विदेशों में बड़े पैमाने पर तैयारियाँ चल रही हैं। वैश्विक स्तर पर योग की बढ़ती स्वीकार्यता के बीच एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के नैदानिक प्रमाण इस प्राचीन विधा को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर भी खरा साबित करते हैं।