6 महीने बाद शिशु को पूरक आहार क्यों जरूरी? उम्र के अनुसार मात्रा और सही खाद्य पदार्थों की पूरी गाइड

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6 महीने बाद शिशु को पूरक आहार क्यों जरूरी? उम्र के अनुसार मात्रा और सही खाद्य पदार्थों की पूरी गाइड

सारांश

6 महीने के बाद सिर्फ दूध काफी नहीं — महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस उम्र से खिचड़ी, दाल-चावल, केला और गाजर जैसे पूरक आहार की शुरुआत जरूरी है। उम्र के साथ मात्रा बढ़ाने की चरणबद्ध गाइड माता-पिता के लिए बेहद उपयोगी है।

मुख्य बातें

जन्म के 6 महीने बाद शिशु को दूध के साथ पूरक आहार देना अनिवार्य है।
शुरुआत 3 से 4 चम्मच से करें — खिचड़ी, दाल-चावल, मसली सब्जियाँ, दही और घी उपयुक्त हैं।
6-7 महीने पर दिन में 2 बार एक कटोरी; 9-11 महीने पर 3 कटोरी; 12-24 महीने पर 4-5 कटोरी।
केला, पपीता, गाजर और कद्दू विटामिन ए व ऊर्जा के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं।
बच्चे को पहले दूध, फिर ठोस भोजन दें; जबरदस्ती खिलाने से बचें।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक्स पर यह जानकारी आधिकारिक रूप से साझा की।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, जन्म के 6 महीने पूरे होते ही शिशु की पोषण संबंधी आवश्यकताएँ केवल स्तनपान या फॉर्मूला दूध से पूरी नहीं हो पातीं। इस अवस्था में पूरक आहार (Complementary Feeding) की शुरुआत शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अनिवार्य हो जाती है। नई दिल्ली से जारी मंत्रालय की सलाह में घर के बने हल्के, पौष्टिक खाद्य पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर जोर दिया गया है।

पूरक आहार क्या है और क्यों जरूरी है

पूरक आहार वह भोजन है जो दूध के साथ-साथ बच्चे को दिया जाता है ताकि उसे आयरन, विटामिन और ऊर्जा जैसे वे पोषक तत्व मिल सकें जो अकेले दूध से नहीं मिल पाते। विशेषज्ञों के अनुसार, 6 महीने की उम्र तक शिशु की पाचन प्रणाली ठोस भोजन को संसाधित करने के लिए पर्याप्त रूप से विकसित हो जाती है। इस चरण में देरी करने पर बच्चे में कुपोषण और विकास में बाधा का जोखिम बढ़ सकता है।

6 महीने पर क्या खिलाएँ

मंत्रालय की सिफारिश के अनुसार, शुरुआत में गाढ़ी दाल के साथ चावल, खिचड़ी, मसली हुई हरी सब्जियाँ, दही, घी और थोड़ी मात्रा में तेल शामिल किया जा सकता है। केला, पपीता, गाजर और कद्दू जैसे पीले और नारंगी रंग के फल व सब्जियाँ विटामिन ए और ऊर्जा का समृद्ध स्रोत हैं। पहले दिन से ही बच्चे को दूध पिलाने के बाद ठोस भोजन देना चाहिए, ताकि दोनों प्रकार का पोषण सुनिश्चित हो सके।

उम्र के अनुसार मात्रा कैसे बढ़ाएँ

शुरुआत में केवल 3 से 4 चम्मच से आहार देना चाहिए और बच्चे की प्रतिक्रिया देखनी चाहिए। यदि बच्चा सहजता से खा और पचा रहा है, तो मात्रा क्रमशः बढ़ाई जा सकती है। मंत्रालय द्वारा सुझाई गई आयु-वार मात्रा इस प्रकार है:

6 से 7 महीने: दिन में दो बार, प्रत्येक बार एक छोटी कटोरी।
7 से 8 महीने: दिन में दो कटोरी भोजन।
9 से 11 महीने: दिन में तीन कटोरी तक।
12 से 24 महीने: दिन में चार से पाँच कटोरी हल्का और पौष्टिक भोजन।

माता-पिता के लिए जरूरी सुझाव

हर बच्चे की भूख और पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए जबरदस्ती खिलाने से बचना चाहिए। बच्चे के भूख के संकेत — जैसे मुँह खोलना, चम्मच की ओर झुकना — को पहचानकर ही खाना दें। खेल-खेल में और स्नेहपूर्वक खिलाने से बच्चे में भोजन के प्रति सकारात्मक रुचि विकसित होती है।

आगे क्या ध्यान रखें

जैसे-जैसे बच्चा दूसरे वर्ष में प्रवेश करता है, उसका आहार परिवार के सामान्य भोजन के करीब होता जाता है। इस पूरे चरण में नमक, चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। यदि बच्चे में किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी के लक्षण दिखें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती जागरूकता नहीं — पहुँच है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ कुपोषण की दर अभी भी चिंताजनक है, वहाँ सोशल मीडिया पोस्ट पर्याप्त नहीं हैं। NFHS-5 के आँकड़े बताते हैं कि भारत में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग की दर अभी भी 35% से अधिक है — यह संख्या बताती है कि पूरक आहार की जानकारी आशा कार्यकर्ताओं और आँगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना कितना जरूरी है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

6 महीने के बाद बच्चे को पूरक आहार क्यों देना चाहिए?
6 महीने की उम्र के बाद केवल दूध से शिशु को आयरन, विटामिन और पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। इस समय से ठोस और पौष्टिक पूरक आहार शुरू करना शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।
6 महीने के बच्चे को पहली बार क्या खिलाएँ?
शुरुआत में गाढ़ी दाल के साथ चावल, खिचड़ी, मसली हुई हरी सब्जियाँ, दही और घी दिया जा सकता है। केला, पपीता, गाजर और कद्दू जैसे फल व सब्जियाँ भी विटामिन और ऊर्जा के लिए उपयुक्त हैं।
बच्चे को एक दिन में कितनी बार और कितना खाना देना चाहिए?
6-7 महीने पर दिन में 2 बार एक छोटी कटोरी, 7-8 महीने पर 2 कटोरी, 9-11 महीने पर 3 कटोरी और 12-24 महीने पर 4 से 5 कटोरी तक हल्का पौष्टिक भोजन दिया जा सकता है। हर बच्चे की भूख अलग होती है, इसलिए उसके संकेतों को समझकर मात्रा तय करें।
क्या पूरक आहार शुरू करने के बाद दूध पिलाना बंद करना चाहिए?
नहीं, पूरक आहार शुरू करने के बाद भी दूध पिलाना जारी रखना चाहिए। सही क्रम यह है — पहले दूध, फिर ठोस भोजन, ताकि बच्चे को दोनों प्रकार का पोषण मिल सके।
बच्चे को जबरदस्ती खाना खिलाना चाहिए क्या?
नहीं, बच्चे को जबरदस्ती खिलाने से उसमें भोजन के प्रति नकारात्मक भाव बन सकता है। बच्चे की भूख के संकेतों — जैसे मुँह खोलना या चम्मच की ओर झुकना — को पहचानकर, खेल-खेल में और प्यार से खाना खिलाना बेहतर होता है।
राष्ट्र प्रेस
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