6 महीने बाद शिशु को पूरक आहार क्यों जरूरी? उम्र के अनुसार मात्रा और सही खाद्य पदार्थों की पूरी गाइड
सारांश
मुख्य बातें
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, जन्म के 6 महीने पूरे होते ही शिशु की पोषण संबंधी आवश्यकताएँ केवल स्तनपान या फॉर्मूला दूध से पूरी नहीं हो पातीं। इस अवस्था में पूरक आहार (Complementary Feeding) की शुरुआत शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अनिवार्य हो जाती है। नई दिल्ली से जारी मंत्रालय की सलाह में घर के बने हल्के, पौष्टिक खाद्य पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर जोर दिया गया है।
पूरक आहार क्या है और क्यों जरूरी है
पूरक आहार वह भोजन है जो दूध के साथ-साथ बच्चे को दिया जाता है ताकि उसे आयरन, विटामिन और ऊर्जा जैसे वे पोषक तत्व मिल सकें जो अकेले दूध से नहीं मिल पाते। विशेषज्ञों के अनुसार, 6 महीने की उम्र तक शिशु की पाचन प्रणाली ठोस भोजन को संसाधित करने के लिए पर्याप्त रूप से विकसित हो जाती है। इस चरण में देरी करने पर बच्चे में कुपोषण और विकास में बाधा का जोखिम बढ़ सकता है।
6 महीने पर क्या खिलाएँ
मंत्रालय की सिफारिश के अनुसार, शुरुआत में गाढ़ी दाल के साथ चावल, खिचड़ी, मसली हुई हरी सब्जियाँ, दही, घी और थोड़ी मात्रा में तेल शामिल किया जा सकता है। केला, पपीता, गाजर और कद्दू जैसे पीले और नारंगी रंग के फल व सब्जियाँ विटामिन ए और ऊर्जा का समृद्ध स्रोत हैं। पहले दिन से ही बच्चे को दूध पिलाने के बाद ठोस भोजन देना चाहिए, ताकि दोनों प्रकार का पोषण सुनिश्चित हो सके।
उम्र के अनुसार मात्रा कैसे बढ़ाएँ
शुरुआत में केवल 3 से 4 चम्मच से आहार देना चाहिए और बच्चे की प्रतिक्रिया देखनी चाहिए। यदि बच्चा सहजता से खा और पचा रहा है, तो मात्रा क्रमशः बढ़ाई जा सकती है। मंत्रालय द्वारा सुझाई गई आयु-वार मात्रा इस प्रकार है:
6 से 7 महीने: दिन में दो बार, प्रत्येक बार एक छोटी कटोरी।
7 से 8 महीने: दिन में दो कटोरी भोजन।
9 से 11 महीने: दिन में तीन कटोरी तक।
12 से 24 महीने: दिन में चार से पाँच कटोरी हल्का और पौष्टिक भोजन।
माता-पिता के लिए जरूरी सुझाव
हर बच्चे की भूख और पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए जबरदस्ती खिलाने से बचना चाहिए। बच्चे के भूख के संकेत — जैसे मुँह खोलना, चम्मच की ओर झुकना — को पहचानकर ही खाना दें। खेल-खेल में और स्नेहपूर्वक खिलाने से बच्चे में भोजन के प्रति सकारात्मक रुचि विकसित होती है।
आगे क्या ध्यान रखें
जैसे-जैसे बच्चा दूसरे वर्ष में प्रवेश करता है, उसका आहार परिवार के सामान्य भोजन के करीब होता जाता है। इस पूरे चरण में नमक, चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। यदि बच्चे में किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी के लक्षण दिखें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।