बिहार सरकारी अस्पतालों में CCTV निगरानी: स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने 1 जुलाई 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और एक विशेष सॉफ्टवेयर के ज़रिए स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम से इन अस्पतालों की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता नागरिकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बताया कि वे स्वयं अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे और अपनी टीम को भी भेजेंगे। इसके साथ ही तकनीकी माध्यमों से नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों और स्टाफ की अनुपलब्धता पर चिंता
मंत्री ने स्वीकार किया कि पदभार संभालने के बाद उन्हें सबसे अधिक शिकायतें डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों की अनुपस्थिति को लेकर मिली हैं। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि चिकित्सक समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहें और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता
राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में 504 प्रकार की दवाइयाँ उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। फिलहाल करीब 350 दवाइयाँ उपलब्ध हैं और शेष की आपूर्ति पर काम जारी है। दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों और बाज़ार से रैंडम सैंपल लेकर नियमित जाँच कराई जाए। साथ ही, यदि किसी अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड मशीनें खराब हों या तकनीशियन उपलब्ध न हों, तो इसकी तत्काल सूचना विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एम्बुलेंस नेटवर्क
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे पर करीब 100 एम्बुलेंस तैनात करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को 'गोल्डन आवर' के दौरान त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके। इसके अलावा राज्य में 11 लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर और 5 लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि मरीजों को जिला स्तर पर ही इलाज उपलब्ध कराने और केवल ज़रूरत पड़ने पर पटना रेफर करने की नीति, स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली और ट्रॉमा सेंटरों के विस्तार के साथ, बिहार सरकार स्वास्थ्य ढाँचे को तकनीक-सक्षम बनाने की कोशिश में है।