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मानसिक स्वास्थ्य मजबूत करने के आसान उपाय: एनएचएम विशेषज्ञों और डॉ. गरिमा सिंह की सलाह

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मानसिक स्वास्थ्य मजबूत करने के आसान उपाय: एनएचएम विशेषज्ञों और डॉ. गरिमा सिंह की सलाह

सारांश

भागदौड़ भरी ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी महंगी पड़ सकती है। एनएचएम विशेषज्ञों और साइकोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा सिंह का कहना है कि रोज़ाना सिर्फ 30-40 मिनट खुद के लिए निकालना, वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना और नियमित व्यायाम-योग अपनाना — ये छोटे बदलाव मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की असली कुंजी हैं।

मुख्य बातें

एनएचएम के विशेषज्ञों के अनुसार, व्यस्त दिनचर्या में भी 30-40 मिनट खुद के लिए निकालना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
गरिमा सिंह ने वर्क-लाइफ बैलेंस को मानसिक स्वास्थ्य की नींव बताया।
किशोरावस्था में पढ़ाई के साथ खेल और सामाजिक गतिविधियाँ, और वयस्कता में परिवार व व्यक्तिगत समय का संतुलन ज़रूरी है।
सेल्फ केयर में पसंदीदा हॉबीज़ — जैसे पढ़ना, संगीत, पेंटिंग या गार्डनिंग — शामिल करने की सलाह दी गई है।
रोज़ाना व्यायाम, योगासन या मेडिटेशन तनाव कम करते हैं और मन को शांत रखते हैं।

नई दिल्ली, 5 मई 2026 (राष्ट्र प्रेस)। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और अनियमित दिनचर्या का नकारात्मक प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता — मन पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के विशेषज्ञों के अनुसार, दिनचर्या में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव अपनाकर मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और भावनात्मक मजबूती को आसानी से बेहतर बनाया जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति: क्या है समस्या

तनाव, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, अनिद्रा, बेचैनी, अकेलापन और हताशा — ये लक्षण अब आम जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति अचानक नहीं बनती, बल्कि लंबे समय तक खुद की उपेक्षा और असंतुलित जीवनशैली का परिणाम होती है। एनएचएम के विशेषज्ञों के अनुसार, व्यस्त दिनचर्या में भी 30-40 मिनट खुद के लिए निकालना संभव है और यह छोटा-सा कदम बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकता है।

वर्क-लाइफ बैलेंस: डॉ. गरिमा सिंह की राय

साइकोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा सिंह के अनुसार, आधुनिक जीवन में लोग एकतरफा होकर रह जाते हैं। किशोरावस्था में बच्चे केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं और खेल-कूद, दोस्तों के साथ समय बिताना भूल जाते हैं। वयस्कता में पेशेवर जिम्मेदारियाँ इतनी हावी हो जाती हैं कि परिवार और व्यक्तिगत जीवन की अनदेखी होने लगती है।

डॉ. सिंह सुझाव देती हैं कि किशोरावस्था में पढ़ाई के साथ-साथ खेल, शौक और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी समय निकाला जाना चाहिए। वयस्कों को नौकरी या व्यवसाय के साथ-साथ परिवार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत समय का संतुलन बनाना आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर, यदि सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय है, तो घर लौटने के बाद कार्यालय की चिंताओं को छोड़कर परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना चाहिए।

सेल्फ केयर: खुद को प्राथमिकता दें

मानसिक स्वास्थ्य सुधारने का दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है सेल्फ केयर। रोज़ाना कुछ समय अपनी पसंदीदा गतिविधियों के लिए निकालें — जैसे पढ़ना, संगीत सुनना, पेंटिंग या गार्डनिंग। परिवार के सदस्यों के साथ बिताया गया समय भी मानसिक खुशी को बढ़ाता है।

गौरतलब है कि शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। रोज़ाना व्यायाम, योगासन या ध्यान (मेडिटेशन) करने से तनाव कम होता है, ऊर्जा बढ़ती है और मन शांत रहता है। एनएचएम के विशेषज्ञों का कहना है कि इन आदतों को दिनचर्या में शामिल करने से धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभी भी सीमित है और अधिकांश लोग मानसिक समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य कोई बड़ी या जटिल समस्या नहीं है — यह छोटी-छोटी सकारात्मक आदतों का परिणाम है। यदि वर्क-लाइफ बैलेंस बनाया जाए, सेल्फ केयर पर ध्यान दिया जाए और नियमित व्यायाम-योग किया जाए, तो न केवल मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होगा, बल्कि जीवन की समग्र गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

क्या होगा आगे

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एनएचएम जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि छोटे कदमों से शुरुआत करें — आज से ही 30 मिनट खुद के लिए निकालें और देखें कि कैसे यह छोटी-सी आदत जीवन बदल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — देश में प्रति एक लाख जनसंख्या पर मनोचिकित्सकों की संख्या विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसा से कहीं कम है। 'खुद के लिए समय निकालें' जैसी सलाह उन लोगों के लिए व्यावहारिक नहीं हो सकती जो दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं या जिनके पास बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं। असली सवाल यह है कि क्या जागरूकता अभियान उन तक पहुँच रहे हैं जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। व्यक्तिगत आदतों से आगे बढ़कर संस्थागत और नीतिगत समर्थन के बिना मानसिक स्वास्थ्य संकट का समाधान अधूरा रहेगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए रोज़ाना कितना समय चाहिए?
एनएचएम के विशेषज्ञों के अनुसार, व्यस्त दिनचर्या में भी रोज़ाना 30-40 मिनट खुद के लिए निकालना पर्याप्त है। इस समय में व्यायाम, मेडिटेशन या पसंदीदा हॉबी शामिल की जा सकती है।
वर्क-लाइफ बैलेंस मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्यों ज़रूरी है?
साइकोलॉजिस्ट डॉ. गरिमा सिंह के अनुसार, एकतरफा जीवनशैली — चाहे वह पढ़ाई हो या काम — मानसिक थकान और तनाव का मुख्य कारण है। काम और व्यक्तिगत जीवन का संतुलन बनाने से भावनात्मक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
सेल्फ केयर में कौन-सी गतिविधियाँ शामिल की जा सकती हैं?
डॉ. गरिमा सिंह के सुझाव के अनुसार, पढ़ना, संगीत सुनना, पेंटिंग, गार्डनिंग और परिवार के साथ समय बिताना — ये सभी सेल्फ केयर के प्रभावी तरीके हैं। ये गतिविधियाँ तनाव कम करती हैं और मन को सकारात्मक रखती हैं।
किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखें?
डॉ. गरिमा सिंह के अनुसार, किशोरावस्था में केवल पढ़ाई पर ध्यान देने की बजाय खेल-कूद, शौक और सामाजिक गतिविधियों के लिए भी समय निकालना चाहिए। यह संतुलन मानसिक विकास और भावनात्मक स्थिरता के लिए ज़रूरी है।
क्या व्यायाम और योग मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं?
हाँ, एनएचएम के विशेषज्ञों के अनुसार रोज़ाना व्यायाम, योगासन या ध्यान (मेडिटेशन) करने से तनाव कम होता है, ऊर्जा बढ़ती है और मन शांत रहता है। ये आदतें दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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