धनतेरस पर आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव का संदेश: स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन, आयुर्वेद-योग अपनाएं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने 2 नवंबर 2026 को धन्वंतरि दिवस और दीपावली के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धनतेरस केवल भौतिक समृद्धि का पर्व नहीं, बल्कि यह हमें जीवन की सबसे मूल्यवान संपत्ति — अच्छे स्वास्थ्य — के महत्व की याद दिलाने का अवसर है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि व्यक्ति स्वस्थ नहीं है, तो वह भौतिक सुख-सुविधाओं का पूरा आनंद नहीं उठा सकता।
धन्वंतरि दिवस का महत्व
आयुष मंत्री ने कहा, 'धनतेरस हमारे लिए केवल धन और समृद्धि का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति, यानी अच्छे स्वास्थ्य के महत्व की भी याद दिलाता है।' उन्होंने बताया कि धन्वंतरि को स्वास्थ्य के देवता के रूप में पूजा जाता है और इसीलिए हर घर व संस्थान में धन्वंतरि पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार यह भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य विरासत है।
जीवनशैली रोगों की बढ़ती चुनौती
जाधव ने चिंता व्यक्त की कि आज की तेज़ रफ़्तार जीवनशैली में खान-पान और दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ चुकी है, जिसके कारण गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases) बड़े पैमाने पर फैल रहे हैं। उन्होंने कहा कि डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, कैंसर, हृदय रोग और किडनी की बीमारियां न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बार-बार जीवनशैली जनित रोगों को वैश्विक स्वास्थ्य संकट बता चुका है।
आयुर्वेद और योग की भूमिका
मंत्री ने स्पष्ट किया कि आयुष प्रणाली का प्राथमिक उद्देश्य रोगों की रोकथाम करना है, न कि केवल उपचार। उन्होंने कहा, 'एलोपैथी किसी बीमारी के होने के बाद उसके उपचार का कार्य करती है, लेकिन बीमारी ही न हो, इसके लिए आयुर्वेद और योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।' उन्होंने आयुर्वेद के मूल सिद्धांत 'स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्' का उल्लेख करते हुए नागरिकों से आग्रह किया कि वे आयुर्वेद और योग को अपनी रोज़मर्रा की जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।
आयुष मंत्रालय की उपलब्धियां और 2047 का लक्ष्य
प्रतापराव जाधव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि आयुष पद्धतियों का लाभ अधिकतम नागरिकों तक पहुंचे। उन्होंने जानकारी दी कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत देश में अब साढ़े 12 हज़ार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। गौरतलब है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों के साथ-साथ AIIMS जैसे वैश्विक स्तर के संस्थानों में भी आयुष विभाग स्थापित किए जा रहे हैं।
वैश्विक मान्यता: योग और आयुर्वेद
आयुष मंत्री ने कहा कि 180 से अधिक देशों में योग को मान्यता मिल चुकी है और करोड़ों लोग इसे अपनाए हुए हैं। इसी प्रकार, लगभग 150 देशों में आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा हज़ारों वर्ष पहले की गई खोजें आज पूरा विश्व अपना रहा है और उन्हें व्यापक मान्यता दे रहा है। यह भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है।