पीएमएफएमई योजना: बिहार के खलीलचक गांव की रंजना कुमारी का नूडल्स उद्यम, 10 लोगों को मिला रोज़गार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड के खलीलचक गांव की निवासी रंजना कुमारी और उनके पति संजय कुमार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (पीएमएफएमई) का लाभ उठाकर न केवल अपनी आर्थिक दशा बदली, बल्कि स्थानीय स्तर पर 10 लोगों को स्थायी रोज़गार भी दिया। कभी घरेलू खर्चों के बोझ तले दबा यह परिवार आज स्मृति नूडल्स के नाम से अपना सफल कारोबार चला रहा है, जिसके उत्पाद नालंदा, नवादा और राजगीर समेत आसपास के कई इलाकों में बिकते हैं।
कैसे मिली योजना की जानकारी और कैसे बदली ज़िंदगी
रंजना कुमारी ने बताया कि एक दौर ऐसा था जब बढ़ती महंगाई के कारण परिवार का खर्च चलाना और बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करना बेहद कठिन हो रहा था। वह कुछ स्वतंत्र काम शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूँजी की कमी आड़े आती थी। इसी दौरान उन्हें पीएमएफएमई योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने तत्काल आवेदन किया।
सरकारी सहायता से मशीनें खरीदी गईं और नूडल्स निर्माण इकाई की स्थापना हुई। रंजना ने कहा कि यदि समय पर इस योजना की जानकारी और मदद नहीं मिलती, तो शायद यह कारोबार कभी शुरू नहीं हो पाता। आज वह पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और परिवार की जिम्मेदारियाँ बेहतर ढंग से निभा रही हैं।
स्मृति नूडल्स: रोज़गार का स्थानीय केंद्र
रंजना की इकाई में फ़िलहाल 10 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें महिलाएँ और पुरुष दोनों शामिल हैं। इकाई में काम करने वाले देवानंद कुमार ने बताया कि वह पहले गाजियाबाद में रोज़गार की तलाश में थे। गांव के नज़दीक ही काम मिलने से उनका जीवन सुविधाजनक हो गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में अपने परिवार को भी यहीं बुलाने की योजना है।
गौरतलब है कि ग्रामीण युवाओं का पलायन रोकना बिहार जैसे राज्यों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। इस प्रकार की स्थानीय इकाइयाँ उस दिशा में एक छोटी लेकिन सार्थक पहल मानी जा सकती हैं।
संजय कुमार की भूमिका और विस्तार की योजना
संजय कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी की उद्यमशीलता की चाह थी, लेकिन घरेलू खर्चों और महंगाई के बीच पूँजी जुटाना मुश्किल था। पीएमएफएमई ने वह अवसर दिया जो उन्हें चाहिए था। अब नालंदा, नवादा और राजगीर जैसे क्षेत्रों से ऑर्डर मिल रहे हैं।
उनका लक्ष्य भविष्य में इकाई का विस्तार करना और और अधिक लोगों को रोज़गार देना है। यह सफलता दर्शाती है कि सही समय पर सरकारी योजनाओं तक पहुँच मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक दशा में ठोस बदलाव संभव है।
बेटी की शिक्षा और परिवार का बदलता भविष्य
रंजना ने बताया कि कारोबार से हुई आमदनी से बच्चों की पढ़ाई का खर्च अब बिना बाधा के उठाया जा रहा है। उनकी बेटी ने अपनी शिक्षा पूरी कर अच्छा मुकाम हासिल किया है — जो पहले मुश्किल लगता था। परिवार की यह तरक्की पीएमएफएमई के उस उद्देश्य की मिसाल है, जो सूक्ष्म उद्यमों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए बनाई गई है।
यह कहानी उन लाखों ग्रामीण उद्यमियों के लिए प्रेरणा है जो सरकारी योजनाओं की जानकारी और पहुँच के अभाव में अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते। भविष्य में यदि स्मृति नूडल्स का विस्तार होता है, तो यह इकाई जिले के लिए एक मॉडल बन सकती है।