गर्मियों में तिल के तेल से अभ्यंग: क्या है सही तरीका और सावधानियां?
सारांश
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नई दिल्ली, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में शरीर को ठंड से बचाने और गर्माहट प्रदान करने के लिए तिल के तेल से अभ्यंग और सेवन की सलाह दी जाती है।
तिल शरीर को मजबूती प्रदान करता है और हड्डियों को भी मजबूत बनाने में सहायता करता है। लेकिन क्या गर्मियों में तिल के तेल से अभ्यंग करना उचित है? आयुर्वेद के अनुसार, जहाँ सर्दियों में तिल के तेल से अभ्यंग को आवश्यक माना गया है, वहीं गर्मियों में भी यदि सही समय पर अभ्यंग किया जाए तो लाभकारी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
आयुर्वेद में अभ्यंग का अर्थ होता है पूरे शरीर पर गुनगुने तेल से नियमित और हल्के दबाव के साथ मालिश करना। आयुर्वेद के ग्रंथों में तिल के तेल को “श्रेष्ठ स्नेह” कहा गया है, क्योंकि यह त्वचा में गहराई तक जाकर पोषण देता है और वात दोष को शांत करता है। अब सवाल यह है कि गर्मियों में तिल से तेल की मालिश करनी चाहिए या नहीं। गर्मियों में पित्त दोष बढ़ता है और तिल के तेल की तासीर भी गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में गर्म तासीर वाली चीजों से परहेज करना चाहिए।
गर्मियों में हफ्ते में दो से तीन दिन तिल के तेल से मालिश करना फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए तेल को हल्का गुनगुना करके सुबह नाश्ता करने से पहले खाली पेट हल्के हाथों से मालिश करें। इससे रक्त संचार सही रहता है, जोड़ों को सुरक्षा मिलती है, वात दोष कम होता है, त्वचा को गहराई से पोषण मिलता है, रुखापन कम होता है, तनाव में कमी आती है और नींद में सुधार होता है। आयुर्वेद में अभ्यंग केवल मालिश नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित करने की एक पारंपरिक पद्धति है। गर्मियों में इसे पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि समझदारी से अपनाने की आवश्यकता है।
तिल के तेल से अभ्यंग के फायदे तो जान लिए, लेकिन अभ्यंग करते समय कुछ सावधानियां बरतना भी आवश्यक है। यदि तेज बुखार या संक्रमण है, या त्वचा पर किसी प्रकार की एलर्जी या दाने हो रहे हैं, पित्त के कारण त्वचा लाल है और जलन का अनुभव हो रहा है, या फिर पाचन में किसी तरह की बाधा उत्पन्न हो रही है, तब तिल के तेल से अभ्यंग करने से परहेज करना चाहिए। इससे बुखार और संक्रमण दोनों तेजी से बढ़ सकते हैं।