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माइग्रेन का दर्द बढ़ाती हैं ये 5 रोज़मर्रा की गलतियाँ, जानें कैसे पाएँ राहत

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माइग्रेन का दर्द बढ़ाती हैं ये 5 रोज़मर्रा की गलतियाँ, जानें कैसे पाएँ राहत

सारांश

माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं — यह तंत्रिका तंत्र की जटिल समस्या है जिसे रोज़मर्रा की 5 गलत आदतें और गंभीर बना देती हैं। पानी की कमी, अनियमित नींद, अत्यधिक कैफीन, लंबा स्क्रीन टाइम और असंतुलित खान-पान इसके प्रमुख ट्रिगर हैं। छोटे बदलाव, बड़ी राहत दे सकते हैं।

मुख्य बातें

माइग्रेन तंत्रिका तंत्र से जुड़ी जटिल समस्या है, जो तेज़ दर्द, रोशनी-आवाज़ की संवेदनशीलता और जी मिचलाने जैसे लक्षणों के साथ आती है।
शरीर में पानी की कमी माइग्रेन के दर्द को और बढ़ा सकती है; दिनभर पर्याप्त जलयोजन ज़रूरी है।
वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नियमित नींद माइग्रेन के दौरों को नियंत्रित रखने में सहायक मानी जाती है।
अत्यधिक कैफीन और शराब कई माइग्रेन पीड़ितों के लिए प्रमुख ट्रिगर हो सकते हैं।
लंबे स्क्रीन टाइम और अनियमित भोजन से भी माइग्रेन के लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

माइग्रेन एक जटिल तंत्रिका-तंत्र विकार है, जिसमें बार-बार तेज सिरदर्द, रोशनी और आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता, जी मिचलाना और कमज़ोरी जैसे लक्षण देखे जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामान्य सिरदर्द से बिल्कुल अलग स्थिति है और इसे नज़रअंदाज़ करना दीर्घकालिक परेशानी को बढ़ा सकता है। गौरतलब है कि रोज़मर्रा की कुछ सामान्य आदतें माइग्रेन के दौरों को और गंभीर बना सकती हैं।

पानी की कमी और माइग्रेन का संबंध

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पर्याप्त जलयोजन न होने पर थकान, चक्कर और सिर में भारीपन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जो माइग्रेन के दर्द को और बढ़ा देती हैं। पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और कोशिकाओं की सामान्य कार्यप्रणाली बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीने के साथ-साथ नारियल पानी, सूप और जलयुक्त फल भी शरीर में तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

अनियमित नींद का असर

माइग्रेन और नींद का गहरा संबंध माना जाता है। कम नींद लेना या रोज़ाना अलग-अलग समय पर सोना शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को बाधित कर सकता है, जिससे कुछ लोगों में माइग्रेन के दौरे बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञ आमतौर पर वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद को आवश्यक मानते हैं। नियमित समय पर सोने और जागने की आदत तंत्रिका तंत्र को स्थिर रखने में मदद करती है।

कैफीन और शराब: छिपे हुए ट्रिगर

कई लोग सिरदर्द में राहत के लिए चाय या कॉफी का सहारा लेते हैं, लेकिन अत्यधिक कैफीन का सेवन कुछ लोगों में माइग्रेन को और उग्र कर सकता है। इसी तरह, शराब भी कई माइग्रेन पीड़ितों के लिए एक प्रमुख ट्रिगर साबित हो सकती है। ये पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी, नींद में गड़बड़ी और तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। चूँकि हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग होती है, इसलिए यह पहचानना ज़रूरी है कि कौन-सा पेय पदार्थ आपके माइग्रेन को बढ़ाता है।

लंबे समय तक स्क्रीन देखना

डिजिटल युग में मोबाइल, कंप्यूटर और टेलीविज़न का बढ़ता उपयोग आँखों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। माइग्रेन के दौरान स्क्रीन की तेज़ चमक और नीली रोशनी कई लोगों में दर्द को और गंभीर बना सकती है। ऐसे में स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखना, हर 20 मिनट पर आँखों को आराम देना और शांत वातावरण में कुछ समय बिताना राहत दिला सकता है।

अनियमित भोजन और असंतुलित खान-पान

माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए भोजन की नियमितता अत्यंत महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक खाली पेट रहना या अचानक खाने का समय बदलना कुछ लोगों में माइग्रेन का कारण बन सकता है। संतुलित आहार में फल, हरी सब्ज़ियाँ, प्रोटीन और ज़रूरी पोषक तत्व शामिल होने चाहिए। अत्यधिक तला हुआ भोजन, बहुत मसालेदार खाना या व्यक्तिगत रूप से परेशानी देने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज़ करना बेहतर हो सकता है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। छोटी-छोटी दैनिक आदतों में सुधार माइग्रेन के दौरों की आवृत्ति और तीव्रता को कम करने में सहायक हो सकता है — हालाँकि किसी भी उपाय को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि जीवनशैली ट्रिगर — जो रोकथाम की पहली पंक्ति हैं — प्रायः नज़रअंदाज़ हो जाते हैं। भारत में जहाँ स्व-चिकित्सा की प्रवृत्ति अधिक है और न्यूरोलॉजिस्ट तक पहुँच सीमित है, वहाँ जीवनशैली जागरूकता की भूमिका और भी अहम हो जाती है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस लेख में दी गई सलाह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है और किसी भी माइग्रेन पीड़ित को योग्य चिकित्सक के मार्गदर्शन का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में क्या अंतर है?
माइग्रेन एक तंत्रिका तंत्र से जुड़ी जटिल स्थिति है, जिसमें बार-बार तेज़ सिरदर्द के साथ रोशनी-आवाज़ की संवेदनशीलता, जी मिचलाना और कमज़ोरी जैसे लक्षण भी होते हैं। सामान्य सिरदर्द आमतौर पर इन अतिरिक्त लक्षणों के बिना होता है और जल्दी ठीक हो जाता है।
माइग्रेन के दौरान पानी पीना क्यों ज़रूरी है?
शरीर में पानी की कमी माइग्रेन के दर्द को बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हो सकती है। पर्याप्त जलयोजन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है और कोशिकाओं को सामान्य रूप से काम करने में मदद करता है, जिससे थकान और सिर में भारीपन जैसे लक्षण कम हो सकते हैं।
माइग्रेन में कितनी नींद लेनी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नियमित नींद माइग्रेन के दौरों को नियंत्रित रखने में सहायक मानी जाती है। रोज़ाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत शरीर की जैविक घड़ी को स्थिर रखती है।
क्या चाय-कॉफी माइग्रेन को बढ़ाती है?
अत्यधिक कैफीन का सेवन कुछ लोगों में माइग्रेन को उग्र कर सकता है। हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव अलग-अलग होता है, इसलिए यह पहचानना ज़रूरी है कि किसी खास पेय पदार्थ के बाद दर्द शुरू होता है या नहीं — और यदि हाँ, तो उससे दूरी बनाना बेहतर हो सकता है।
माइग्रेन में खान-पान का क्या ध्यान रखें?
माइग्रेन पीड़ितों के लिए नियमित समय पर भोजन करना और संतुलित आहार लेना ज़रूरी है। लंबे समय तक खाली पेट रहना, अत्यधिक तला-मसालेदार भोजन और व्यक्तिगत रूप से परेशानी देने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज़ करना माइग्रेन के दौरों को कम करने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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