गर्दन दर्द से राहत: डेस्क जॉब करने वालों के लिए आयुष मंत्रालय के 4 आसान नेक मूवमेंट
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय ने कॉमन योग प्रोटोकॉल में गर्दन की 4 सरल मूवमेंट शामिल की हैं।
- ये व्यायाम फ्लेक्सन-एक्सटेंशन, साइड बेंडिंग, रोटेशन और पूर्ण रोटेशन पर आधारित हैं।
- रोज़ाना 5 से 10 मिनट के अभ्यास से गर्दन और कंधों की जकड़न में उल्लेखनीय राहत मिलती है।
- ये व्यायाम ऑफिस या घर — कहीं भी बिना किसी उपकरण के किए जा सकते हैं।
- गर्दन की मांसपेशियां स्वैच्छिक होती हैं और इनका सही उपयोग ऊपरी रीढ़ को मजबूत रखता है।
- गंभीर दर्द की स्थिति में योग प्रशिक्षक से परामर्श लेकर ही अभ्यास शुरू करें।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय ने डेस्क जॉब करने वाले लाखों भारतीयों के लिए गर्दन दर्द और जकड़न से निजात दिलाने हेतु कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत चार सरल नेक मूवमेंट की सिफारिश की है। घंटों कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने बैठे रहने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियां जकड़ जाती हैं, जो अब एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। मंत्रालय का कहना है कि रोज़ाना मात्र 5 से 10 मिनट इन व्यायामों को करने से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
गर्दन की मांसपेशियां क्यों होती हैं तनावग्रस्त
गर्दन की मांसपेशियां खोपड़ी, जबड़े, कंधों की हड्डियों और कॉलरबोन तक विस्तृत होती हैं। ये मांसपेशियां सिर को सहारा देने के साथ-साथ चबाने, निगलने, सांस लेने और सिर घुमाने जैसी दैनिक क्रियाओं में सहायक होती हैं। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठा रहता है, तो ये मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और दर्द उत्पन्न होता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, ये मांसपेशियां स्वैच्छिक प्रकृति की होती हैं, अर्थात इन्हें सचेत रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। इनका नियमित और सही उपयोग शरीर की ऊपरी रीढ़ को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करता है।
आयुष मंत्रालय के 4 नेक मूवमेंट स्टेप
1. फ्लेक्सन और एक्सटेंशन: गर्दन को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाएं और ठोड़ी को छाती से लगाने का प्रयास करें, फिर सावधानी से पीछे की ओर ले जाएं। यह क्रिया गर्दन की अगली और पिछली मांसपेशियों का तनाव दूर करती है।
2. साइड बेंडिंग: गर्दन को दाईं और फिर बाईं दिशा में झुकाएं। इससे गर्दन की पार्श्व मांसपेशियां लचीली बनती हैं और जकड़न में तत्काल राहत मिलती है।
3. रोटेशन: गर्दन को दाईं ओर और फिर बाईं ओर घुमाएं। यह गतिविधि गर्दन की गतिशीलता बढ़ाती है और कंधों की अकड़न को भी कम करती है।
4. पूर्ण रोटेशन: गर्दन को अत्यंत धीमी गति से गोलाकार घुमाएं — पहले दक्षिणावर्त, फिर वामावर्त। इससे मांसपेशियों को संपूर्ण खिंचाव मिलता है और रक्त संचार बेहतर होता है।
व्यायाम करते समय किन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, ये सभी मूवमेंट अत्यंत धीरे और सावधानीपूर्वक करने चाहिए। व्यायाम के दौरान सांस सामान्य रखें और किसी भी मूवमेंट में जोर-जबरदस्ती न करें। यदि किसी को पहले से गर्दन में गंभीर दर्द हो, तो किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक से परामर्श लेकर ही अभ्यास शुरू करें।
ये व्यायाम ऑफिस ब्रेक के दौरान भी किए जा सकते हैं। रोज़ाना 5 से 10 मिनट के इस अभ्यास से न केवल शारीरिक थकान कम होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी घटता है और कार्यक्षमता में सुधार होता है।
डेस्क वर्कर्स के लिए क्यों जरूरी है यह सलाह
भारत में आईटी सेक्टर, बैंकिंग, मीडिया और अन्य क्षेत्रों में करोड़ों लोग प्रतिदिन औसतन 8 से 10 घंटे डेस्क पर बिताते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, गर्दन और पीठ दर्द वैश्विक स्तर पर कार्यक्षमता घटाने के प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसे में आयुष मंत्रालय की यह पहल न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि राष्ट्रीय उत्पादकता के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि मंत्रालय 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले योग जागरूकता अभियान को और तेज करता है। इस वर्ष भी कॉमन योग प्रोटोकॉल को अद्यतन कर कार्यालयीन स्वास्थ्य समस्याओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जो आने वाले महीनों में और व्यापक रूप से प्रचारित किए जाने की संभावना है।