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एनएफएचएस-6 डेटा विवाद: नड्डा ने खड़गे को घेरा, बोले — 'अधूरी जानकारी जन-स्वास्थ्य के लिए खतरनाक'

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एनएफएचएस-6 डेटा विवाद: नड्डा ने खड़गे को घेरा, बोले — 'अधूरी जानकारी जन-स्वास्थ्य के लिए खतरनाक'

सारांश

एनएफएचएस-6 के आंकड़ों पर खड़गे के आरोपों के जवाब में नड्डा ने एक्स पर पलटवार किया। एनएफएचएस-3 से तुलना कर उन्होंने संस्थागत प्रसव 38.7% से 90.6% और स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9% से 60.2% तक पहुँचने का दावा किया। डेटा की पारदर्शिता बनाम चयनात्मक प्रस्तुति — यह बहस जारी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 7 जून 2026 को एक्स पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की स्वास्थ्य टिप्पणियों को 'अधूरी जानकारी' बताया।
नड्डा के अनुसार संस्थागत प्रसव 38.7% से बढ़कर 90.6% और स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9% से बढ़कर 60.2% हुआ — एनएफएचएस-3 (2005-06) बनाम एनएफएचएस-6 ।
बच्चों में स्टंटिंग दर 48% से घटकर 29.3% ; पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1% दर्ज।
खड़गे ने दावा किया कि 57% महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं और 84% शिशुओं को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता; सरकार पर डेटा दबाने का आरोप।
नड्डा ने यूपीए कार्यकाल को नीतिगत विफलता का दौर बताते हुए तुलनात्मक आंकड़ों को अपने तर्क का आधार बनाया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 7 जून 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की स्वास्थ्य संबंधी टिप्पणियों को सीधे चुनौती दी और उन्हें 'अधूरी जानकारी' पर आधारित बताया। नड्डा ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का बचाव किया।

विवाद की पृष्ठभूमि

इस राजनीतिक टकराव की शुरुआत खड़गे की एक एक्स पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एनएफएचएस-6 के कुछ अहम आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं कर रही। खड़गे ने दावा किया कि हर पाँच में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है, एक-तिहाई बच्चों का वजन कम है, और 6 से 23 महीने आयु वर्ग के 84 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि 57 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं और सरकार पर चुनिंदा आंकड़े पेश कर विफलताओं को छिपाने का आरोप लगाया।

खड़गे ने अपनी पोस्ट में कहा, 'मोदी सरकार न सिर्फ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में महिलाओं और बच्चों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि अहम डेटा को भी दबा रही है।'

नड्डा का पलटवार और एनएफएचएस-6 के आंकड़े

नड्डा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'खड़गे जी की अधूरी जानकारी खतरनाक है। जन-स्वास्थ्य का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। चुनिंदा जानकारी से राजनीति तो सध सकती है, लेकिन देश का भला तथ्यों से ही होता है।'

उन्होंने एनएफएचएस-3 (2005-06) और एनएफएचएस-6 के आंकड़ों की तुलना करते हुए कई सुधारों का उल्लेख किया। नड्डा के अनुसार, गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 43.9% से बढ़कर 76.2% हो गया है। संस्थागत प्रसव 38.7% से बढ़कर 90.6% तक पहुँचा, जबकि कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 46.6% से बढ़कर 91.3% हो गया।

टीकाकरण, बीमा और कुपोषण के आंकड़े

नड्डा ने आगे बताया कि पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1% दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9% से बढ़कर 60.2% तक पहुँच गया है। बच्चों में स्टंटिंग की दर — जो कुपोषण का प्रमुख संकेतक है — 48% से घटकर 29.3% रह गई है। उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि लाखों माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की कहानी हैं।

यूपीए पर निशाना

नड्डा ने यूपीए सरकार के कार्यकाल की भी आलोचना की और उसे नीतिगत विफलता का दौर बताया। गौरतलब है कि एनएफएचएस-3 के आंकड़े 2005-06 के हैं, जब कांग्रेस नीत यूपीए सत्ता में थी, और नड्डा ने इसी तुलना को अपने तर्क का आधार बनाया।

आगे क्या

एनएफएचएस-6 के सभी आंकड़ों के सार्वजनिक होने की माँग और उनकी व्याख्या को लेकर यह राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा की पारदर्शिता और उसकी संपूर्ण प्रस्तुति ही किसी भी नीतिगत बहस को विश्वसनीय बनाती है — चाहे तर्क किसी भी पक्ष का हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खड़गे के एनीमिया और शिशु पोषण संबंधी आंकड़े — यदि सही हैं — तो वे बताते हैं कि सुधार अभी भी अधूरे हैं। असली सवाल यह है कि एनएफएचएस-6 के वे आंकड़े, जिन्हें अभी सार्वजनिक नहीं किया गया, क्या कहते हैं — और उन्हें रोका क्यों गया। डेटा की चयनात्मक प्रस्तुति दोनों पक्षों से हो सकती है; जवाबदेही के लिए पूर्ण और समयबद्ध डेटा प्रकाशन ही एकमात्र विश्वसनीय रास्ता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएफएचएस-6 डेटा विवाद क्या है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एनएफएचएस-6 के कुछ आंकड़े दबा रही है, जिनमें बाल कुपोषण और महिला एनीमिया से जुड़े नकारात्मक संकेतक शामिल हैं। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एनएफएचएस-3 से तुलना करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति के आंकड़े पेश किए।
नड्डा ने एनएफएचएस-6 में कौन-से सुधार गिनाए?
नड्डा के अनुसार एनएफएचएस-3 (2005-06) की तुलना में संस्थागत प्रसव 38.7% से 90.6%, स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9% से 60.2%, और पहली तिमाही में गर्भावस्था पंजीकरण 43.9% से 76.2% हो गया है। बच्चों में स्टंटिंग दर 48% से घटकर 29.3% और पूर्ण टीकाकरण 87.1% दर्ज किया गया।
खड़गे ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
खड़गे ने दावा किया कि 57% महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं, हर पाँच में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है, और 6 से 23 महीने आयु वर्ग के 84% बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चुनिंदा आंकड़े पेश कर अपनी विफलताओं को छिपा रही है।
एनएफएचएस-6 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) भारत सरकार का प्रमुख स्वास्थ्य और जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है, जो देश की स्वास्थ्य नीतियों के लिए आधार डेटा प्रदान करता है। एनएफएचएस-6 सबसे हालिया संस्करण है, जिसके आंकड़ों की व्याख्या और सार्वजनिक उपलब्धता को लेकर यह राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है।
क्या एनएफएचएस-6 के सभी आंकड़े सार्वजनिक हैं?
खड़गे के अनुसार एनएफएचएस-6 के कुछ आंकड़े अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, और उन्होंने सरकार पर इन्हें दबाने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से इस विशेष आरोप पर अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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