एनएफएचएस-6 डेटा विवाद: नड्डा ने खड़गे को घेरा, बोले — 'अधूरी जानकारी जन-स्वास्थ्य के लिए खतरनाक'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 7 जून 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की स्वास्थ्य संबंधी टिप्पणियों को सीधे चुनौती दी और उन्हें 'अधूरी जानकारी' पर आधारित बताया। नड्डा ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का बचाव किया।
विवाद की पृष्ठभूमि
इस राजनीतिक टकराव की शुरुआत खड़गे की एक एक्स पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एनएफएचएस-6 के कुछ अहम आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं कर रही। खड़गे ने दावा किया कि हर पाँच में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है, एक-तिहाई बच्चों का वजन कम है, और 6 से 23 महीने आयु वर्ग के 84 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि 57 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं और सरकार पर चुनिंदा आंकड़े पेश कर विफलताओं को छिपाने का आरोप लगाया।
खड़गे ने अपनी पोस्ट में कहा, 'मोदी सरकार न सिर्फ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में महिलाओं और बच्चों के साथ विश्वासघात कर रही है, बल्कि अहम डेटा को भी दबा रही है।'
नड्डा का पलटवार और एनएफएचएस-6 के आंकड़े
नड्डा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'खड़गे जी की अधूरी जानकारी खतरनाक है। जन-स्वास्थ्य का मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। चुनिंदा जानकारी से राजनीति तो सध सकती है, लेकिन देश का भला तथ्यों से ही होता है।'
उन्होंने एनएफएचएस-3 (2005-06) और एनएफएचएस-6 के आंकड़ों की तुलना करते हुए कई सुधारों का उल्लेख किया। नड्डा के अनुसार, गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 43.9% से बढ़कर 76.2% हो गया है। संस्थागत प्रसव 38.7% से बढ़कर 90.6% तक पहुँचा, जबकि कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 46.6% से बढ़कर 91.3% हो गया।
टीकाकरण, बीमा और कुपोषण के आंकड़े
नड्डा ने आगे बताया कि पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1% दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9% से बढ़कर 60.2% तक पहुँच गया है। बच्चों में स्टंटिंग की दर — जो कुपोषण का प्रमुख संकेतक है — 48% से घटकर 29.3% रह गई है। उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि लाखों माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की कहानी हैं।
यूपीए पर निशाना
नड्डा ने यूपीए सरकार के कार्यकाल की भी आलोचना की और उसे नीतिगत विफलता का दौर बताया। गौरतलब है कि एनएफएचएस-3 के आंकड़े 2005-06 के हैं, जब कांग्रेस नीत यूपीए सत्ता में थी, और नड्डा ने इसी तुलना को अपने तर्क का आधार बनाया।
आगे क्या
एनएफएचएस-6 के सभी आंकड़ों के सार्वजनिक होने की माँग और उनकी व्याख्या को लेकर यह राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा की पारदर्शिता और उसकी संपूर्ण प्रस्तुति ही किसी भी नीतिगत बहस को विश्वसनीय बनाती है — चाहे तर्क किसी भी पक्ष का हो।