क्या ऊंचाई पर यात्रा करने से पेट खराब हो जाता है? जानें तैयारी कैसे करें

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क्या ऊंचाई पर यात्रा करने से पेट खराब हो जाता है? जानें तैयारी कैसे करें

सारांश

क्या आपने कभी सोचा है कि ऊंचाई पर यात्रा करते समय पेट खराब क्यों होता है? जानें इसके पीछे के कारण और सही तैयारी के टिप्स।

मुख्य बातें

हाइपोक्सिया के कारण पाचन धीमा होता है।
वेगस नर्व का कार्य प्रभावित होता है।
ठंड का मौसम पाचन को और प्रभावित करता है।
ऊंचाई पर माइक्रोबायोम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यात्रा से पहले हल्का भोजन और हाइड्रेशन महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नए साल में लोग छुट्टियां मनाने पहाड़ों और ऊंचे स्थानों पर यात्रा कर रहे हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि ऊंचाई पर यात्रा करते समय अक्सर पेट खराब क्यों हो जाता है? इसका मुख्य कारण है हाइपोक्सिया, यानी ऑक्सीजन की कमी।

ऊंचाई पर वेगस नर्व ठीक से कार्य नहीं करती, जिससे पाचन धीमा पड़ जाता है, गैस बनती है और पेट में ऐंठन होती है। ठंड भी पाचन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावित करती है। यात्रा के दौरान माइक्रोबायोम पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस संदर्भ में सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने ऊंचाई पर यात्रा करने वालों के लिए जरूरी सुझाव दिए हैं।

न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं कि हाई एल्टीट्यूड पर सिर्फ पेट में गैस नहीं बनती, बल्कि पाचन तंत्र भी अस्वस्थ हो जाता है। इसका मुख्य कारण हाइपोक्सिया है, जो शरीर के नर्वस सिस्टम पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इससे पाचन प्रक्रिया में बदलाव आता है।

उन्होंने एक अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा कि हाइपोक्सिया जीआई मोटिलिटी को धीमा कर देता है और पाचन में गड़बड़ी करता है।

ऊंचाई पर हाइपोक्सिया के कारण वेगस नर्व का कार्य प्रभावित होता है। यह नर्व पाचन को नियंत्रित करती है, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण यह ठीक से कार्य नहीं कर पाती। परिणामस्वरूप, आंतों की गतिशीलता धीमी हो जाती है, एंजाइम सही से रिलीज नहीं होते और पेट समय पर खाली नहीं होता। इससे गैस, ब्लोटिंग और असुविधा बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, ऊंचाई पर ठंड का मौसम सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर देता है, जो 'फाइट या फ्लाइट' मोड में शरीर को ऊर्जा बचाने के लिए मजबूर करता है, जिससे पाचन धीमा हो जाता है।

विशेषज्ञ के अनुसार, यह केवल एयर प्रेशर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरा नर्वस सिस्टम ऊर्जा संरक्षण मोड में चला जाता है। यात्रा का प्रभाव पेट के माइक्रोबायोम पर भी पड़ता है, जो गट बैक्टीरिया के संतुलन को प्रभावित करता है। ऊंचाई पर यह प्रभाव और भी बढ़ जाता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।

न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह है कि जिस तरह आप सूटकेस पैक करने से पहले सोच-समझकर तैयारी करते हैं, उसी तरह अपने पेट को भी तैयार करें। यात्रा पर निकलने से पहले हल्का भोजन करें, हाइड्रेशन का ध्यान रखें और ऐसे भोजन का चुनाव करें, जो पाचन को सहारा दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऊंचाई पर यात्रा करते समय पेट खराब होने की समस्या एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दा है। इसे समझने और इससे बचने के उपायों की जानकारी सभी यात्रियों के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऊंचाई पर पेट खराब होने के क्या कारण हैं?
ऊंचाई पर पेट खराब होने का मुख्य कारण हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी है।
क्या ऊंचाई पर यात्रा करते समय पाचन धीमा हो जाता है?
जी हां, हाइपोक्सिया के कारण पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
ऊंचाई पर यात्रा करने से कैसे बचा जा सकता है?
हल्का भोजन करें, हाइड्रेशन का ध्यान रखें और पाचन को सहारा देने वाले खाद्य पदार्थों का चुनाव करें।
राष्ट्र प्रेस
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