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वशिष्ठासन से रीढ़ की हड्डी और शरीर का संतुलन होगा मजबूत, जानें सही अभ्यास विधि

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वशिष्ठासन से रीढ़ की हड्डी और शरीर का संतुलन होगा मजबूत, जानें सही अभ्यास विधि

सारांश

वशिष्ठासन सिर्फ एक साइड प्लैंक नहीं — यह रीढ़, संतुलन और एकाग्रता तीनों को एक साथ साधने वाला योगासन है। आयुष मंत्रालय द्वारा अनुशंसित इस आसन का नियमित अभ्यास पोश्चर सुधारता है और दैनिक जीवन की गतिविधियों को आसान बनाता है।

मुख्य बातें

वशिष्ठासन (साइड प्लैंक पोज़) रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने और शरीर का संतुलन विकसित करने वाला प्रमुख योगासन है।
आयुष मंत्रालय ने इस आसन को संतुलन, एकाग्रता और शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए विशेष रूप से अनुशंसित किया है।
इस आसन में शरीर का भार एक हाथ और एक पैर के बाहरी किनारे पर संतुलित रहता है, जिससे कोर मसल्स सक्रिय होती हैं।
नियमित अभ्यास से चलने, खड़े रहने और लंबे समय तक बैठने के दौरान पोश्चर में सुधार होता है।
कलाई, कोहनी या कंधे में गंभीर चोट होने पर इस आसन से बचना चाहिए।

वशिष्ठासन (साइड प्लैंक पोज़) एक शक्तिशाली योगासन है जो रीढ़ की हड्डी को सुदृढ़ करता है, शारीरिक संतुलन विकसित करता है और मानसिक एकाग्रता को तीव्र बनाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन शरीर की मुद्रा (पोश्चर) सुधारने और दीर्घकालिक स्थिरता बनाए रखने में विशेष रूप से प्रभावी है। यह केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि अपनी सीमाओं को चुनौती देकर आंतरिक संतुलन प्राप्त करने का मार्ग है।

वशिष्ठासन का अर्थ और महत्व

वशिष्ठासन संस्कृत के दो शब्दों से निर्मित है — 'वशिष्ठ' जिसका अर्थ है 'श्रेष्ठ' या 'सबसे उत्तम', और 'आसन' जिसका अर्थ है 'शरीर की मुद्रा'। अंग्रेज़ी में इसे साइड प्लैंक पोज़ कहा जाता है। इस आसन में शरीर का संपूर्ण भार एक हाथ और एक पैर के बाहरी किनारे पर संतुलित रहता है, जिससे सिर से एड़ी तक शरीर एक सीधी तिरछी रेखा बनाता है।

आयुष मंत्रालय ने इस आसन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया है कि नियमित अभ्यास से चलने, खड़े रहने और लंबे समय तक बैठने के दौरान शरीर की मुद्रा पहले से बेहतर हो जाती है। यह आसन संतुलन, स्थिरता और एकाग्रता — तीनों को एक साथ विकसित करता है।

वशिष्ठासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास चरणबद्ध तरीके से करें:

सबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैला लें। दोनों हथेलियाँ कूल्हों के पास जमीन पर टिका लें। अब शरीर का पूरा वजन धीरे-धीरे दाहिनी हथेली और दाहिने पैर के बाहरी हिस्से पर स्थानांतरित करें। बाएं पैर को दाहिने पैर के ऊपर बिल्कुल सीधा रखें ताकि दोनों पैर एक-दूसरे के ऊपर आ जाएं।

बाएं हाथ को कमर पर टिकाकर दाहिने हाथ के सहारे शरीर को ऊपर उठाएं। गहरी सांस लेते हुए बाएं हाथ को आकाश की दिशा में बिल्कुल सीधा ऊपर उठाएं। गर्दन को ऊपर की ओर मोड़ें और बाएं हाथ की उंगलियों की तरफ दृष्टि केंद्रित करें। इस स्थिति में शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए। कुछ सेकंड सामान्य श्वास लेते हुए इस मुद्रा में रुकें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में लौट आएं।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

यदि कलाई, कोहनी या कंधे में गंभीर चोट अथवा दर्द हो, तो इस आसन का अभ्यास करने से बचें। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।

नियमित अभ्यास के लाभ

वशिष्ठासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर का पोश्चर सुधरता है। यह आसन कोर मसल्स को सक्रिय करता है, जिससे दैनिक गतिविधियों — जैसे चलना, खड़े रहना और लंबे समय तक बैठना — में संतुलन और स्थिरता बेहतर होती है। मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, वशिष्ठासन उन आसनों में से एक है जो शरीर और मन दोनों को एक साथ साधते हैं — इसे नियमित दिनचर्या में शामिल करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सराहनीय है। हालाँकि, आम पाठकों तक पहुँचने वाली ऐसी सामग्री में प्रशिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में अभ्यास करने की सलाह और अधिक स्पष्टता से दी जानी चाहिए — विशेषकर उन लोगों के लिए जो पहली बार इस आसन को आज़मा रहे हैं। चोट की चेतावनी को लेख के अंत में रखने के बजाय प्रमुखता से उल्लेख करना पाठकों की सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वशिष्ठासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
वशिष्ठासन एक योगासन है जिसे अंग्रेज़ी में साइड प्लैंक पोज़ कहते हैं। यह रीढ़ की हड्डी मजबूत करने, शरीर का संतुलन सुधारने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने के लिए विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। आयुष मंत्रालय ने भी इसे नियमित योगाभ्यास में शामिल करने की सिफारिश की है।
वशिष्ठासन करने की सही विधि क्या है?
जमीन पर बैठकर पैर सामने फैलाएं, फिर शरीर का भार दाहिनी हथेली और दाहिने पैर के बाहरी किनारे पर स्थानांतरित करें। बाएं पैर को दाहिने पैर के ऊपर रखें, गहरी सांस लेते हुए बाएं हाथ को सीधा ऊपर उठाएं और दृष्टि उंगलियों पर केंद्रित करें। कुछ सेकंड इस स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं।
वशिष्ठासन के नियमित अभ्यास से क्या फायदे होते हैं?
नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, कोर मसल्स सक्रिय होती हैं और शरीर का पोश्चर सुधरता है। चलने, खड़े रहने और लंबे समय तक बैठने के दौरान संतुलन बेहतर होता है। साथ ही मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
किन लोगों को वशिष्ठासन नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों को कलाई, कोहनी या कंधे में गंभीर चोट या दर्द हो, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए। किसी भी नए योगाभ्यास से पहले प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।
आयुष मंत्रालय ने वशिष्ठासन के बारे में क्या कहा है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, वशिष्ठासन संतुलन और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाला एक प्रमुख योगासन है। मंत्रालय ने इसे रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और शरीर की मुद्रा सुधारने में बेहद प्रभावी बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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