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विपरीतकरणी मुद्रा के लाभ: पाचन सुधार से मानसिक सतर्कता तक, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

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विपरीतकरणी मुद्रा के लाभ: पाचन सुधार से मानसिक सतर्कता तक, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

सारांश

विपरीतकरणी मुद्रा सिर्फ एक योगासन नहीं — यह गुरुत्वाकर्षण को उलटकर शरीर को भीतर से पुनर्जीवित करने की विधि है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह पाचन, थायरॉइड और मानसिक सतर्कता तीनों पर एक साथ असर करती है — और हर उम्र के लिए सुलभ है।

मुख्य बातें

विपरीतकरणी मुद्रा संस्कृत के 'विपरीत' (उलटा) और 'करणी' (करना) शब्दों से बनी है; इसमें पैरों को ऊपर उठाया जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत रक्त-प्रवाह को हृदय और मस्तिष्क की ओर सुचारू करता है।
नियमित अभ्यास से जठराग्नि तीव्र होती है, भूख बढ़ती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है।
यह हाइपोएक्टिव थायरॉइड प्रबंधन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक है।
शुरुआत 5-10 मिनट से करें; गर्भवती महिलाओं और उच्च रक्तचाप के रोगियों को पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

विपरीतकरणी मुद्रा — जिसे 'उलटी क्रिया वाला आसन' भी कहा जाता है — योग की उन प्राचीन साधनाओं में से एक है जो शरीर और मन दोनों को एक साथ संतुलित करती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत कार्य करते हुए रक्त-प्रवाह को पैरों और निचले शरीर से वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर ले जाता है, जिससे थकान, तनाव और पाचन-संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। रोज़मर्रा की भागदौड़ में जब शरीर थक जाता है और मन बोझिल हो जाता है, तब यह सरल अभ्यास एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आता है।

विपरीतकरणी मुद्रा क्या है

'विपरीतकरणी' संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'विपरीत' अर्थात 'उलटा' और 'करणी' अर्थात 'करना'। इस आसन में सर्वांगासन के समान पैरों को ऊपर की ओर उठाया जाता है। आधुनिक योग अभ्यास में इसे प्रायः दीवार के सहारे किया जाता है, जिससे यह हर उम्र के व्यक्ति के लिए सुलभ और सुरक्षित बन जाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार मुख्य लाभ

आयुष मंत्रालय ने इस आसन के कई लाभ रेखांकित किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को प्रबंधित करने में सहायक है। साथ ही, यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे मानसिक सतर्कता बढ़ती है और तनाव कम होता है।

पाचन के संदर्भ में, विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन के नियमित अभ्यास से जठराग्नि तीव्र होती है — अर्थात पाचन-शक्ति में सुधार आता है, भूख बढ़ती है और पेट से जुड़ी शिकायतें कम होती हैं। जिन लोगों को भूख कम लगती है, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से कारगर बताया गया है।

रक्त संचार और थायरॉइड पर प्रभाव

गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में शरीर को रखने से पैरों में जमा रक्त वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर प्रवाहित होता है। इससे समग्र रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर को नई ऊर्जा मिलती है। थायरॉइड नियंत्रण भी इस आसन का एक महत्त्वपूर्ण लाभ माना गया है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो हाइपोएक्टिव थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे हैं।

अभ्यास के लिए सावधानियाँ

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में 5 से 10 मिनट के अभ्यास से आरंभ करना चाहिए और धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप के रोगियों और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

नियमित अभ्यास का महत्त्व

विशेषज्ञों का मानना है कि इस आसन का प्रतिदिन अभ्यास शरीर और मन दोनों में दीर्घकालिक संतुलन बनाए रखता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब शहरी जीवनशैली में तनाव, अनिद्रा और पाचन विकार तेज़ी से बढ़ रहे हैं। विपरीतकरणी मुद्रा — अपनी सरलता और व्यापक लाभों के कारण — आधुनिक जीवन में योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि इन दावों के पीछे नैदानिक साक्ष्य की गहराई अभी भी सीमित है। थायरॉइड और पाचन जैसी जटिल समस्याओं में योग एक पूरक उपाय हो सकता है, प्राथमिक उपचार नहीं। जब तक योग के लाभों को कठोर, पीयर-रिव्यूड शोध से नहीं जोड़ा जाता, तब तक इन्हें 'सहायक अभ्यास' के रूप में प्रस्तुत करना अधिक जिम्मेदारीपूर्ण होगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विपरीतकरणी मुद्रा क्या है और इसे कैसे करते हैं?
विपरीतकरणी मुद्रा एक योगासन है जिसमें पैरों को ऊपर की ओर उठाया जाता है — आधुनिक अभ्यास में प्रायः दीवार के सहारे। इसका शाब्दिक अर्थ 'उलटी क्रिया वाला आसन' है और यह सर्वांगासन के समान मुद्रा में किया जाता है।
विपरीतकरणी मुद्रा से पाचन कैसे सुधरता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से जठराग्नि तीव्र होती है, जिससे भूख बढ़ती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। जिन लोगों को भूख कम लगती है, उनके लिए यह विशेष रूप से कारगर बताया गया है।
क्या विपरीतकरणी मुद्रा थायरॉइड में फायदेमंद है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को प्रबंधित करने में सहायक है। हालाँकि, इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए — डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।
विपरीतकरणी मुद्रा किन लोगों को नहीं करनी चाहिए?
गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप के रोगियों और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन करने से पहले चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
विपरीतकरणी मुद्रा का अभ्यास कितने समय तक करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि शुरुआत में 5 से 10 मिनट से अभ्यास आरंभ करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ। नियमित दैनिक अभ्यास से शरीर और मन दोनों में दीर्घकालिक संतुलन बनता है।
राष्ट्र प्रेस
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