विपरीतकरणी मुद्रा के लाभ: पाचन सुधार से मानसिक सतर्कता तक, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे
सारांश
मुख्य बातें
विपरीतकरणी मुद्रा — जिसे 'उलटी क्रिया वाला आसन' भी कहा जाता है — योग की उन प्राचीन साधनाओं में से एक है जो शरीर और मन दोनों को एक साथ संतुलित करती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन गुरुत्वाकर्षण के विपरीत कार्य करते हुए रक्त-प्रवाह को पैरों और निचले शरीर से वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर ले जाता है, जिससे थकान, तनाव और पाचन-संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। रोज़मर्रा की भागदौड़ में जब शरीर थक जाता है और मन बोझिल हो जाता है, तब यह सरल अभ्यास एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आता है।
विपरीतकरणी मुद्रा क्या है
'विपरीतकरणी' संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'विपरीत' अर्थात 'उलटा' और 'करणी' अर्थात 'करना'। इस आसन में सर्वांगासन के समान पैरों को ऊपर की ओर उठाया जाता है। आधुनिक योग अभ्यास में इसे प्रायः दीवार के सहारे किया जाता है, जिससे यह हर उम्र के व्यक्ति के लिए सुलभ और सुरक्षित बन जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार मुख्य लाभ
आयुष मंत्रालय ने इस आसन के कई लाभ रेखांकित किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को प्रबंधित करने में सहायक है। साथ ही, यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे मानसिक सतर्कता बढ़ती है और तनाव कम होता है।
पाचन के संदर्भ में, विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन के नियमित अभ्यास से जठराग्नि तीव्र होती है — अर्थात पाचन-शक्ति में सुधार आता है, भूख बढ़ती है और पेट से जुड़ी शिकायतें कम होती हैं। जिन लोगों को भूख कम लगती है, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से कारगर बताया गया है।
रक्त संचार और थायरॉइड पर प्रभाव
गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में शरीर को रखने से पैरों में जमा रक्त वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर प्रवाहित होता है। इससे समग्र रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर को नई ऊर्जा मिलती है। थायरॉइड नियंत्रण भी इस आसन का एक महत्त्वपूर्ण लाभ माना गया है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो हाइपोएक्टिव थायरॉइड की समस्या से जूझ रहे हैं।
अभ्यास के लिए सावधानियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में 5 से 10 मिनट के अभ्यास से आरंभ करना चाहिए और धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप के रोगियों और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले अपने चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
नियमित अभ्यास का महत्त्व
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आसन का प्रतिदिन अभ्यास शरीर और मन दोनों में दीर्घकालिक संतुलन बनाए रखता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब शहरी जीवनशैली में तनाव, अनिद्रा और पाचन विकार तेज़ी से बढ़ रहे हैं। विपरीतकरणी मुद्रा — अपनी सरलता और व्यापक लाभों के कारण — आधुनिक जीवन में योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम हो सकती है।