वृश्चिकासन: शरीर का लचीलापन और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने वाला उन्नत योगासन

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वृश्चिकासन: शरीर का लचीलापन और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने वाला उन्नत योगासन

सारांश

वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है जो शरीर को बिच्छू की मुद्रा में लाकर मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारता है, एकाग्रता बढ़ाता है और हृदय को लाभ पहुंचाता है। आयुष मंत्रालय ने इसे विशेष महत्व दिया है। इसे केवल योग प्रशिक्षक की देखरेख में करें।

Key Takeaways

  • वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है जिसमें शरीर की मुद्रा बिच्छू के समान बनती है।
  • आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने इसे उन्नत स्तर का विशेष योगासन माना है।
  • यह आसन मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारकर स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाता है।
  • शुरुआत में 10 से 20 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
  • उच्च रक्तचाप, रीढ़ की चोट और हृदय रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • इसे केवल पिंचा मयूरासन में निपुण होने के बाद और योग प्रशिक्षक की देखरेख में करें।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वृश्चिकासन एक उन्नत स्तर का योगासन है जो शरीर की शक्ति, संतुलन और लचीलेपन को एक साथ विकसित करता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को विशेष रूप से मान्यता दी है। आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में यह आसन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत उपयोगी माना जाता है।

वृश्चिकासन का अर्थ और महत्व

वृश्चिकासन दो संस्कृत शब्दों — 'वृश्चिक' (बिच्छू) और 'आसन' (मुद्रा) — से मिलकर बना है। इस आसन में शरीर की आकृति ठीक उसी प्रकार दिखती है जैसे एक बिच्छू अपना डंक ऊपर उठाए खड़ा हो।

यह आसन योग की उस श्रेणी में आता है जिसे करने के लिए दीर्घकालिक अभ्यास और शारीरिक तैयारी की आवश्यकता होती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार इसे नियमित रूप से करने पर शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का अद्भुत संयोजन विकसित होता है।

वृश्चिकासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

जब इस आसन को सही तकनीक से किया जाता है, तो मस्तिष्क में रक्त संचार बेहतर होता है। इससे स्मरण शक्ति तेज होती है और एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार आता है।

इस आसन की इनवर्टेड पोजिशन हृदय के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि इस अवस्था में रक्त प्रवाह संतुलित और सुचारु बना रहता है। नियमित अभ्यास से तनाव में कमी और आत्मविश्वास में वृद्धि भी देखी जाती है।

इसके अतिरिक्त यह आसन कंधों, पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और समन्वय क्षमता में भी सुधार होता है।

वृश्चिकासन करने की सही विधि

सबसे पहले पिंचा मयूरासन की स्थिति में आएं। कोहनियों को कंधों के ठीक नीचे टिकाएं और हथेलियों से जमीन को मजबूती से पकड़ें।

अब शरीर को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा रखें। इसके बाद रीढ़ को धीरे-धीरे पीछे की ओर मोड़ते हुए पैरों को सिर की दिशा में लाएं, जिससे पैरों की उंगलियां सिर के करीब पहुंचने की कोशिश करें।

इस अवस्था में गहरी और लयबद्ध सांस लें तथा संतुलन बनाए रखें। शुरुआत में 10 से 20 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाएं। अभ्यास समाप्त होने के बाद शवासन या बालासन में विश्राम करें।

किन्हें नहीं करना चाहिए यह आसन

वृश्चिकासन एक अत्यंत कठिन आसन है। इसे केवल तभी करने का प्रयास करें जब आप पिंचा मयूरासन में पूरी तरह निपुण हो चुके हों।

उच्च रक्तचाप, रीढ़ की हड्डी में चोट या हृदय संबंधी समस्याओं से ग्रस्त व्यक्तियों को इस आसन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। नए अभ्यासियों को हमेशा किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में ही इसे करना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि योग को जीवनशैली में शामिल करना आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी जरूरत है। जैसे-जैसे भारत में योग के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, आयुष मंत्रालय भी उन्नत आसनों के प्रशिक्षण को संस्थागत रूप देने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के अवसर पर ऐसे उन्नत आसनों के प्रदर्शन और प्रशिक्षण शिविरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

Point of View

लेकिन देशभर में प्रमाणित योग प्रशिक्षकों की भारी कमी एक विरोधाभास पैदा करती है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हर साल करोड़ों लोग योग करते हैं, पर उन्नत आसनों के लिए सुरक्षित मार्गदर्शन की व्यवस्था अभी भी अपर्याप्त है। यही वह खाई है जिसे नीति-निर्माताओं को प्राथमिकता से पाटना होगा।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

वृश्चिकासन क्या है और इसे क्यों किया जाता है?
वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है जिसमें शरीर की मुद्रा डंक उठाए बिच्छू जैसी बनती है। इसे मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारने, एकाग्रता बढ़ाने और शरीर को लचीला बनाने के लिए किया जाता है।
वृश्चिकासन करने की सही विधि क्या है?
पहले पिंचा मयूरासन की स्थिति में आएं, कोहनियां जमीन पर टिकाएं और शरीर को ऊपर उठाएं। फिर रीढ़ को पीछे मोड़ते हुए पैरों को सिर की दिशा में लाएं और 10-20 सेकंड तक संतुलन बनाए रखें।
वृश्चिकासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप, रीढ़ की हड्डी में चोट और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए। शुरुआती अभ्यासियों को भी बिना योग प्रशिक्षक की देखरेख के इसे नहीं करना चाहिए।
वृश्चिकासन के क्या-क्या फायदे हैं?
इस आसन से मस्तिष्क में रक्त संचार सुधरता है, स्मरण शक्ति और एकाग्रता बेहतर होती है। साथ ही हृदय स्वास्थ्य, तनाव में कमी और आत्मविश्वास में वृद्धि भी इसके प्रमुख लाभ हैं।
क्या वृश्चिकासन शुरुआती योग अभ्यासी कर सकते हैं?
नहीं, वृश्चिकासन एक उन्नत स्तर का आसन है जिसे केवल वे लोग करें जो पिंचा मयूरासन में पूरी तरह दक्ष हों। शुरुआती लोगों को पहले बुनियादी आसनों का अभ्यास करना चाहिए।
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