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पश्चिम बंगाल सरकारी अस्पतालों में साप्ताहिक दवा जांच अनिवार्य, एक्सपायर्ड दवाओं पर नई एसओपी लागू होगी

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पश्चिम बंगाल सरकारी अस्पतालों में साप्ताहिक दवा जांच अनिवार्य, एक्सपायर्ड दवाओं पर नई एसओपी लागू होगी

सारांश

पश्चिम बंगाल में एक्सपायर्ड दवाओं की शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है — सरकारी अस्पतालों में हर हफ्ते दवा स्टॉक की जाँच अनिवार्य होगी और 24 घंटे पुरानी एक्सपायर्ड दवा भी तुरंत नष्ट करनी होगी। नई माताओं और नवजातों को एक्सपायर्ड सलाइन दिए जाने के आरोपों के बाद यह नई एसओपी लाई जा रही है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में साप्ताहिक दवा स्टॉक समीक्षा की नई एसओपी को मंजूरी दी।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
शरद्वत मुखोपाध्याय ने इस एसओपी को स्वीकृति प्रदान की है।
24 घंटे पहले भी एक्सपायर हो चुकी दवाएं तत्काल स्टॉक से हटाकर नष्ट करना अनिवार्य होगा।
बार-बार लापरवाही पर संबंधित अस्पताल प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
कथित तौर पर नवजात शिशुओं और नई माताओं को एक्सपायर्ड सलाइन व रिंगर्स लैक्टेट दिए जाने की शिकायतें इस फैसले की पृष्ठभूमि में हैं।
एक्सपायर्ड दवाएं अनधिकृत रूप से स्वास्थ्य शिविरों तक पहुँचाने के आरोप भी सामने आए थे।

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने 28 जुलाई 2026 को राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एक्सपायर्ड दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को मंजूरी दी है। इस एसओपी के तहत हर सप्ताह दवाओं के पूरे स्टॉक की अनिवार्य समीक्षा की जाएगी और 24 घंटे पहले भी एक्सपायर हो चुकी किसी भी दवा को तत्काल नष्ट करना होगा। सूत्रों के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. शरद्वत मुखोपाध्याय ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

नई एसओपी में क्या है

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होते ही राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में साप्ताहिक दवा स्टॉक समीक्षा अनिवार्य हो जाएगी। इस समीक्षा के दौरान प्रत्येक दवा की निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की बारीकी से जाँच की जाएगी।

यदि कोई दवा मात्र 24 घंटे पहले भी एक्सपायर हो चुकी पाई जाती है, तो उसे बिना किसी देरी के स्टॉक से हटाकर नष्ट करना अनिवार्य होगा। यह कदम मरीजों को एक्सपायर्ड दवाओं के दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में एक ठोस संस्थागत उपाय माना जा रहा है।

लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस

नई एसओपी में जवाबदेही का स्पष्ट प्रावधान भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यदि साप्ताहिक समीक्षा के दौरान किसी अस्पताल में गंभीर लापरवाही उजागर होती है या बार-बार एक्सपायर्ड दवाएं रखने का मामला सामने आता है, तो संबंधित अस्पताल प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में दवा प्रबंधन के लिए इतना संरचित और नियमित निगरानी तंत्र प्रस्तावित किया गया है।

शिकायतों की पृष्ठभूमि

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, यह निर्णय पिछले कुछ वर्षों में प्राप्त अनेक शिकायतों की पृष्ठभूमि में लिया गया है। इन शिकायतों में यह गंभीर आरोप लगाए गए थे कि सरकारी अस्पतालों में नई माताओं और नवजात शिशुओं तक को एक्सपायर्ड सलाइन और एक्सपायर्ड रिंगर्स लैक्टेट चढ़ाया गया।

इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप सामने आए थे कि सरकारी अस्पतालों से एक्सपायर्ड दवाएं अनधिकृत तरीके से विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों तक पहुँचाई जा रही थीं, जिससे वहाँ उपचार करा रहे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही थी। ये सभी आरोप अभी तक कथित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आम जनता और मरीजों पर असर

यदि यह एसओपी प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो पश्चिम बंगाल के लाखों वे मरीज लाभान्वित होंगे जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग, जो निजी स्वास्थ्य सेवाएं वहन नहीं कर सकते, उनके लिए यह कदम सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आश्वासन है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि साप्ताहिक निगरानी तंत्र तभी सफल होगा जब इसे पर्याप्त प्रशिक्षित जनशक्ति और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग के साथ जोड़ा जाए। एसओपी के क्रियान्वयन की समयसीमा और विस्तृत दिशानिर्देश अभी जारी होने बाकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — राज्य के सैकड़ों सरकारी अस्पतालों में साप्ताहिक जाँच के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारी और डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली की अनुपस्थिति इस एसओपी को कागजी घोषणा बना सकती है। नवजात शिशुओं को एक्सपायर्ड सलाइन दिए जाने के आरोप वर्षों से चले आ रहे हैं — यह एसओपी उन आरोपों की जाँच का विकल्प नहीं है, बल्कि भविष्य की रोकथाम का उपाय मात्र है। जब तक दोषी अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई और स्वतंत्र ऑडिट तंत्र नहीं बनता, तब तक कारण बताओ नोटिस की व्यवस्था पर्याप्त निवारक नहीं होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल की नई दवा जांच एसओपी क्या है?
यह एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर है जिसके तहत राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में हर सप्ताह दवाओं के पूरे स्टॉक की अनिवार्य जाँच की जाएगी। 24 घंटे पहले भी एक्सपायर हो चुकी दवाओं को तत्काल नष्ट करना अनिवार्य होगा।
इस एसओपी को किसने मंजूरी दी है?
सूत्रों के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. शरद्वत मुखोपाध्याय ने इस नई एसओपी को स्वीकृति प्रदान की है। विस्तृत दिशानिर्देश अभी जारी होने बाकी हैं।
यह एसओपी क्यों लाई जा रही है?
कथित तौर पर पिछले कुछ वर्षों में यह शिकायतें मिली थीं कि सरकारी अस्पतालों में नई माताओं और नवजात शिशुओं को एक्सपायर्ड सलाइन व रिंगर्स लैक्टेट दिया गया। साथ ही एक्सपायर्ड दवाएं अनधिकृत रूप से स्वास्थ्य शिविरों तक पहुँचाने के आरोप भी सामने आए थे।
लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर क्या कार्रवाई होगी?
यदि साप्ताहिक समीक्षा में किसी अस्पताल में गंभीर लापरवाही या बार-बार एक्सपायर्ड दवाएं रखने का मामला मिलता है, तो स्वास्थ्य विभाग संबंधित अस्पताल प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी करेगा।
इस एसओपी से आम मरीजों को क्या फायदा होगा?
सरकारी अस्पतालों पर निर्भर लाखों मरीजों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग, को एक्सपायर्ड दवाओं के दुष्प्रभावों से सुरक्षा मिलेगी। नवजात शिशुओं और प्रसूता माताओं जैसे संवेदनशील समूहों के लिए यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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