वाई-ब्रेक: आयुष मंत्रालय का योग फॉर्मूला जो लंबी शिफ्ट में भी रखेगा फिट और फोकस्ड
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू 'वाई-ब्रेक' एक योग-आधारित कार्यालय ब्रेक है जो कुर्सी पर बैठे-बैठे किया जा सकता है।
- यह अभ्यास मात्र 5 से 7 मिनट का है और दिन में 2-3 बार करने की सलाह दी गई है।
- इसमें ताड़ासन, कटिचक्रासन, ग्रीवा संचालन, नाड़ी शोधन प्राणायाम और ध्यान शामिल हैं।
- नियमित वाई-ब्रेक से पीठदर्द, गर्दन की जकड़न, तनाव और मोटापे का खतरा कम होता है।
- वाई-ब्रेक की पूरी विधि आयुष मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर निःशुल्क उपलब्ध है।
- स्वस्थ कर्मचारी = अधिक उत्पादकता — यह पहल कॉर्पोरेट और सरकारी दोनों क्षेत्रों के लिए लाभकारी है।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया 'वाई-ब्रेक' (Y-Break) उन लाखों कर्मचारियों के लिए एक क्रांतिकारी समाधान बनकर उभरा है, जो लंबी ऑफिस शिफ्ट में शारीरिक और मानसिक थकान से जूझते हैं। यह एक संक्षिप्त योग-आधारित ब्रेक है जिसे कर्मचारी अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कर सकते हैं — बिना किसी अतिरिक्त जगह या उपकरण की जरूरत के।
क्या है 'वाई-ब्रेक' और इसकी जरूरत क्यों?
आज के दौर में अधिकांश कार्यालय कर्मचारी दिन में 8 से 10 घंटे एक ही मुद्रा में बैठकर काम करते हैं। इससे गर्दन, पीठ, कंधों और घुटनों में दर्द, मांसपेशियों की जकड़न, तनाव और मानसिक थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
वाई-ब्रेक इसी समस्या का जवाब है। 'Y' का अर्थ है योग — और यह ब्रेक कर्मचारियों को कार्यस्थल पर ही योग के माध्यम से तरोताजा करने का अवसर देता है।
वाई-ब्रेक में क्या-क्या शामिल है
वाई-ब्रेक में कुछ चुनिंदा और सरल योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान शामिल किए गए हैं, जो कार्यालय परिवेश के अनुकूल हैं। इनमें प्रमुख हैं:
ताड़ासन (कुर्सी पर बैठे हुए शरीर को ऊपर की ओर खींचना), कटिचक्रासन (कमर को धीरे-धीरे घुमाना), और ग्रीवा संचालन (गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग) इस अभ्यास के मुख्य अंग हैं।
इसके साथ ही नाड़ी शोधन प्राणायाम (वैकल्पिक नासिका श्वास) और सरल ध्यान भी इस ब्रेक का हिस्सा हैं। ये अभ्यास रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं, मांसपेशियों की जकड़न घटाते हैं और मन को शांत करते हैं।
वाई-ब्रेक करने का सही तरीका
विशेषज्ञों के अनुसार वाई-ब्रेक करने के लिए सबसे पहले कुर्सी पर सीधे बैठें, पीठ को सीधा रखें और दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। फिर पेट को अंदर की ओर खींचें और धीरे-धीरे ढीला छोड़ें।
इसके बाद गर्दन को दाएं-बाएं और आगे-पीछे धीरे-धीरे घुमाएं। पैरों को जमीन पर सपाट रखें और गहरी, लयबद्ध सांस लें। पूरा अभ्यास मात्र 5 से 7 मिनट में पूरा हो जाता है।
स्वास्थ्य और उत्पादकता पर असर
नियमित रूप से वाई-ब्रेक अपनाने से कर्मचारियों में तनाव और चिंता में उल्लेखनीय कमी आती है। एकाग्रता बढ़ती है और कार्यक्षमता में सुधार होता है। लगातार बैठे रहने से शरीर में जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी को भी नियंत्रित करने में यह सहायक है, जिससे मोटापे और जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है।
आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर वाई-ब्रेक की संपूर्ण विधि और वीडियो उपलब्ध कराए हैं। मंत्रालय की सिफारिश है कि प्रत्येक कर्मचारी दिन में कम से कम दो से तीन बार यह ब्रेक अवश्य लें।
व्यापक संदर्भ: कॉर्पोरेट वेलनेस की बढ़ती जरूरत
गौरतलब है कि भारत में कॉर्पोरेट वेलनेस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार देश में लगभग 50 करोड़ कार्यरत लोगों में से बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यस्थल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय का यह कदम न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है — क्योंकि स्वस्थ कर्मचारी अधिक उत्पादक होते हैं और बीमारी के कारण कम छुट्टियां लेते हैं।
यह पहल ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब कोविड-19 के बाद वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड कार्य संस्कृति के चलते शारीरिक गतिविधि और भी कम हो गई है। आने वाले समय में वाई-ब्रेक को सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से लागू करने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।