पाक-अफगान तनाव के बीच अफगान मंत्री हक्कानी की चेतावनी: 'बमबारी से नहीं डरते, ताकतवर दुश्मनों को हरा चुके हैं'
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के सूचना और संस्कृति मंत्री शर अहमद हक्कानी ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि अफगान जनता बाहरी दबाव या सैन्य हमलों से नहीं डरती। काबुल में आयोजित एक पत्रकारिता सेमिनार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान पहले ही उन विरोधियों को परास्त कर चुका है जो हथियारों और आधुनिक तकनीक में कहीं अधिक सक्षम थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कई महीनों से लगातार गहराता जा रहा है।
मुख्य बयान और संदर्भ
पत्रकारों की बौद्धिक, वैचारिक और पेशेवर क्षमता विकास के लिए आयोजित सेमिनार में हक्कानी ने कहा, 'जिन लोगों ने बेरहमी से बमबारी करके हमारे बच्चों को नींद में मार डाला, उनसे हम कहना चाहते हैं कि हम बम धमाकों और मुश्किलों से नहीं डरते। हमने उन लोगों को हराया है, जो आधुनिक तकनीक और हथियारों के मामले में आपसे कहीं ज्यादा ताकतवर थे।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'हम न डरते हैं और न ही हारे हैं।' हक्कानी ने रेखांकित किया कि अफगानिस्तान दशकों के संघर्ष से गुज़रा है और धमकियाँ उसे झुका नहीं सकतीं।
अफगान वायु सेना के हमले — क्या हुआ
इससे पहले अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु सेना ने मंगलवार रात पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में कथित तौर पर आईएसआईएस (दाएश) से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए। रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, बलूचिस्तान के पिशिन जिले के सरानान इलाके में एक संयुक्त केंद्र को निशाना बनाया गया, जिसे अफगानिस्तान में तोड़फोड़ की गतिविधियाँ संचालित करने और नागरिकों पर बम हमलों की योजना बनाने का अड्डा बताया गया।
इसके अलावा, खैबर पख्तूनख्वा के कंबर खेल इलाके और चित्राल के शाह सलीम घाटी के गरम चश्मा क्षेत्र में भी दाएश के केंद्रों पर हमले किए गए। मंत्रालय ने दावा किया कि इन हमलों में आईएसआईएस और उसके समर्थकों को भारी नुकसान हुआ तथा बड़ी संख्या में लोग मारे गए — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
पाक-अफगान तनाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से दोनों देशों के बीच सीमा पर कई बार गोलीबारी की घटनाएँ हो चुकी हैं और आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं। यह ऐसे समय में है जब तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार और इस्लामाबाद के बीच सीमा प्रबंधन, शरणार्थियों की वापसी और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे मुद्दों पर मतभेद लगातार बढ़ते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
आम नागरिकों पर असर
सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिक इस तनाव की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। दोनों तरफ से हुई गोलीबारी और हवाई हमलों की वजह से नागरिक हताहत होने की खबरें आई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
आगे क्या
अफगान मंत्री के इस कड़े बयान के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की संभावना फिलहाल सीमित दिखती है। क्षेत्रीय पर्यवेक्षक इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि क्या यह तनाव और अधिक सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा या दोनों पक्ष बातचीत का रास्ता चुनेंगे।