अफगानिस्तान: गजनी में पुराने युद्ध का बिना फटा बम फटा, किशोर गंभीर रूप से घायल
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के पूर्वी गजनी प्रांत के गिलान जिले में मंगलवार को पुराने युद्धों का एक बिना फटा बम अचानक फट जाने से एक किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रांतीय पुलिस कार्यालय ने बुधवार को बताया कि लड़के को एक खिलौने जैसी दिखने वाली वस्तु मिली थी और वह उससे खेलने लगा, तभी वह वस्तु फट गई।
रिपोर्टों के अनुसार, यह वस्तु पिछले युद्धों के दौरान बची हुई बिना फटी बारूदी सामग्री थी, जो किसी कारणवश सक्रिय हो गई। घायल किशोर का इलाज जारी है, हालाँकि उसकी पहचान या स्थिति का विस्तृत ब्यौरा अधिकारियों ने सार्वजनिक नहीं किया है।
बारूदी सुरंगों की पुरानी छाया
अफगानिस्तान दुनिया के उन देशों में शुमार है जहाँ बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद (UXO) की समस्या सबसे विकराल है। दशकों तक चले संघर्ष का यह अवशेष आज भी ज़मीन के नीचे दबा है और बच्चों के लिए सबसे बड़े जोखिमों में से एक बना हुआ है।
हाल की घटनाएँ
इससे पहले 5 मई को परवान प्रांत के बगराम जिले में भी ऐसा ही एक हादसा हुआ था, जिसमें एक 20 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी और दो लड़कियाँ तथा एक लड़का घायल हुए थे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, युवक बिना फटे गोला-बारूद के एक टुकड़े को खोलने की कोशिश कर रहा था।
वहीं फरवरी में फराह प्रांत के पुश्त-ए-कोह जिले में एक घर के अंदर रखा बिना फटा गोला-बारूद किसी चीज़ से टकराने के बाद फट गया था, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
आँकड़े क्या कहते हैं
तालिबान के आपदा प्रबंधन अधिकारियों की ओर से जारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में अफगानिस्तान में बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद से हुए विस्फोटों में कम से कम 96 लोगों की मौत हुई और 328 लोग घायल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच ऐसे 225 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें कुल 474 लोग प्रभावित हुए — इनमें 321 बच्चे और 153 वयस्क शामिल थे।
सबसे प्रभावित क्षेत्र
बिना फटा गोला-बारूद अफगानिस्तान में एक गंभीर मानवीय खतरा बना हुआ है, विशेषकर ग्रामीण इलाकों और उन क्षेत्रों में जो कभी संघर्ष का केंद्र रहे हैं। हेरात, कुनार, फराह, नंगरहार और कंधार जैसे प्रांतों में ऐसे हादसों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है, जहाँ युद्ध के अवशेष अब भी ज़मीन में दबे हैं या अब तक खोजे नहीं जा सके हैं।
आगे क्या
अंतरराष्ट्रीय मानवीय एजेंसियाँ लंबे समय से अफगानिस्तान में व्यापक माइन-क्लियरेंस अभियानों की वकालत करती रही हैं, परन्तु 2021 के बाद से सहायता प्रवाह में आई कटौती ने इस काम की रफ़्तार पर असर डाला है। आँकड़ों के अनुसार, पीड़ितों में बच्चों की बड़ी हिस्सेदारी इस संकट के लिए केंद्रित जागरूकता और मलबा-सफ़ाई कार्यक्रमों की तात्कालिकता को रेखांकित करती है।