बर्लिन आईएलए एयरशो में भारतीय राजदूत अजीत विनायक गुप्ते ने इंडिया पवेलियन का उद्घाटन किया
सारांश
मुख्य बातें
जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत विनायक गुप्ते ने 13 जून 2026 को बर्लिन में आयोजित प्रतिष्ठित आईएलए एयरशो में इंडिया पवेलियन का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स के प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत की, जो भारत की बढ़ती एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रतीक है।
इंडिया पवेलियन में कौन-सी कंपनियाँ शामिल थीं
जर्मनी स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि राजदूत गुप्ते ने डायनामेटिक टेक्नोलॉजी, पारस, स्काईरूट एयरोस्पेस सहित कई भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। दूतावास ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन प्रतिनिधियों में युवा महिला उद्यमी भी शामिल थीं, जो रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करता है। भारतीय कंपनी रैफे एमफाइबर ने आईएलए में अपना नवीनतम ड्रोन प्रदर्शित किया।
जर्मन कंपनियों से द्विपक्षीय बातचीत
राजदूत गुप्ते ने भारत में विमानन, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय जर्मन कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी भेंट की। इनमें एमटीयू-रोल्स रॉयस, एयरबस, हेन्सोल्ड्ट, लियबेर, क्वांटम सिस्टम्स और डाइहल जैसी प्रमुख यूरोपीय कंपनियाँ शामिल थीं। यह बातचीत भारत-जर्मनी रक्षा और तकनीकी साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूरोपीय स्पेस एजेंसी का स्पेस पवेलियन
यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने आईएलए में 'स्पेस4फ्यूचर' थीम के तहत एक विशेष स्पेस पवेलियन आयोजित किया, जो 10 से 14 जून तक हॉल बी में चला। ESA के अनुसार, इस पवेलियन में चंद्र अन्वेषण, जलवायु निगरानी, नेविगेशन, दूरसंचार और यूरोपीय लॉन्चर तकनीकों पर प्रकाश डाला गया।
आईएलए बर्लिन का महत्व और यूरोपीय आयोग की भागीदारी
आईएलए बर्लिन विश्व के अग्रणी एयरोस्पेस ट्रेड शो में गिना जाता है और 1909 से एयरोस्पेस उद्योग की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को एक मंच पर लाता है। हर दो वर्षों में आयोजित यह शो वैश्विक एयरोस्पेस समुदाय को यूरोप के केंद्र में एकत्र करता है। 2026 में यूरोपीय आयोग एक बार फिर आईएलए बर्लिन का रणनीतिक साझेदार है। यूरोपीय परिषद के अनुसार, इस साझेदारी के तहत स्वच्छ विमानन और अत्याधुनिक परियोजनाओं पर नवीनतम प्रगति प्रदर्शित की गई। 'एयरबोर्न इन यूरोप' के ध्येय वाक्य के तहत यह साझेदारी यूरोप की तकनीकी नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखती है।
आगे की राह
आईएलए बर्लिन में भारत की सक्रिय उपस्थिति यह संकेत देती है कि भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप्स और स्थापित कंपनियों, दोनों की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत का रक्षा निर्यात एजेंडा अब केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र भी उसमें बराबर की भूमिका निभा रहा है।