एपेक का तीसरा वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन 17 अगस्त से ताल्येन में, 2,300 से अधिक प्रतिनिधि होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
चीन के ल्याओनिंग प्रांत के ताल्येन शहर में 17 से 28 अगस्त के बीच एपेक (APEC) के तीसरे वरिष्ठ अधिकारियों के सम्मेलन और उससे जुड़ी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने बताया कि उपस्थिति और आयोजनों की संख्या के लिहाज़ से यह एपेक के वरिष्ठ अधिकारियों के सम्मेलन के इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन होगा।
सम्मेलन का दायरा और एजेंडा
इस सम्मेलन के दौरान पूर्णाधिवेशन, उपसमिति बैठकें, कार्य समूह बैठकें और संगोष्ठियों सहित करीब 130 बैठकें आयोजित की जाएंगी। इनमें व्यापार, परिवहन, अनाज, कस्टम्स, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और भ्रष्टाचार-विरोध जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा होगी। अनुमान के अनुसार इन बैठकों में 2,300 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
नवंबर शिखर सम्मेलन की तैयारी
प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने कहा कि यह सम्मेलन एपेक के ढाँचे के भीतर विभिन्न क्षेत्रों और व्यवस्थाओं में सहयोग की उपलब्धियों को और आगे ले जाएगा। साथ ही यह नवंबर 2026 में होने वाले एपेक शिखर सम्मेलन की ज़मीन तैयार करने का काम भी करेगा। गौरतलब है कि चीन इस वर्ष एपेक की अध्यक्षता कर रहा है, जिससे इस आयोजन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
हुआंगयान द्वीप पर चीन का रुख
सम्मेलन की घोषणा के साथ ही प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने हुआंगयान द्वीप पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के बयान को लेकर चीन का पक्ष भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हुआंगयान द्वीप चीन के भूभाग का अभिन्न हिस्सा है और वहाँ राष्ट्र स्तरीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र की स्थापना एवं प्रबंधन पूरी तरह चीन की संप्रभुता के दायरे में आता है।
क्वो च्याखुन ने कहा कि अमेरिका को इस मामले में 'गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी' करने का कोई अधिकार नहीं है। चीन ने अमेरिका से दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ाने और टकराव भड़काने वाली गतिविधियाँ बंद करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को समुद्री मुद्दों को चीन पर आरोप लगाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना होगा।
क्षेत्रीय सहयोग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक तनाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दोनों चरम पर हैं। एपेक के मंच पर इतने बड़े पैमाने पर बहुपक्षीय संवाद, आलोचकों के अनुसार, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को गति देने की चीन की कोशिश का हिस्सा है। आने वाले हफ्तों में इन बैठकों के नतीजे नवंबर शिखर सम्मेलन के एजेंडे को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।