IBBY विश्व सम्मेलन ओटावा: बाल पुस्तकों पर अंतर्राष्ट्रीय संवाद, त्साइ काओ ने साझा किए रचनात्मक अनुभव
सारांश
मुख्य बातें
ओटावा में 8 अगस्त 2026 को 40वें अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक परिषद (IBBY) विश्व सम्मेलन के अंतर्गत बाल पुस्तक निर्माण पर एक विशेष अंतर्राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया। कनाडा की राजधानी में आयोजित इस चर्चा का विषय था — 'कहानियाँ दुनिया को कैसे जोड़ती हैं: बाल पुस्तकों की खोज और पहुँच।'
प्रमुख प्रतिभागी और संवाद की रूपरेखा
इस संवाद में चीनी चित्रकार त्साइ काओ — जो 2026 अंतर्राष्ट्रीय हंस क्रिश्चियन एंडरसन पुरस्कार के चित्रण वर्ग की विजेता हैं — और 2026 हंस क्रिश्चियन एंडरसन पुरस्कार निर्णायक मंडल की अध्यक्ष शेरीन क्रेडी सहित कई देशों के बाल पुस्तक प्रकाशन विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस मंच पर विभिन्न संस्कृतियों के बीच बाल साहित्य के प्रसार और निर्माण पर विचारों का व्यापक आदान-प्रदान हुआ।
त्साइ काओ की रचनात्मक दृष्टि
त्साइ काओ ने इस अवसर पर अपनी चित्र पुस्तकों की मूल प्रेरणा साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी रचनाएँ चीनी ग्रामीण और शहरी जीवन की रोज़मर्रा की गतिविधियों से प्रेरित हैं। उनका मानना है कि सांस्कृतिक पहचान को केवल प्रतीकों के माध्यम से नहीं, बल्कि जीवन के छोटे-छोटे दृश्यों के ज़रिए भी प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सकता है। उन्होंने स्थानीय परंपराओं और पूर्वी सौंदर्य दृष्टि को अपनी कृतियों में समाहित करने की अपनी कार्यशैली का उल्लेख किया।
शेरीन क्रेडी का दृष्टिकोण
शेरीन क्रेडी ने कहा कि आधुनिक बाल पुस्तक निर्माण में स्थानीय सांस्कृतिक विशेषताओं और सार्वभौमिक मानवीय भावनाओं के बीच संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, एक श्रेष्ठ बाल पुस्तक में उच्च कलात्मक गुणवत्ता, समृद्ध साहित्यिकता और बच्चों के दृष्टिकोण को समझने की क्षमता — ये तीनों तत्व अनिवार्य रूप से होने चाहिए।
आयोजन की पृष्ठभूमि
इस कार्यक्रम का आयोजन चाइना साउथ पब्लिशिंग एंड मीडिया ग्रुप ने किया, जबकि हुनान चिल्ड्रन पब्लिशिंग हाउस और लाइफ ट्री कल्चर प्रमोशन सेंटर ने इसे संयुक्त रूप से संचालित किया। गौरतलब है कि IBBY का यह सम्मेलन वैश्विक बाल साहित्य जगत का सबसे प्रतिष्ठित मंच माना जाता है, जहाँ दशकों से विभिन्न देशों के लेखक, चित्रकार और प्रकाशक एकत्रित होते हैं।
आगे की राह
यह संवाद ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर बाल साहित्य में विविधता और समावेश की माँग बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय कहानियों को वैश्विक मंच पर ले जाने की यह प्रक्रिया बच्चों में सांस्कृतिक समझ और सहानुभूति विकसित करने में सहायक होगी।