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दीन मोहम्मद बलोच की गुमशुदगी के 17 साल: फ्रंट लाइन डिफेंडर्स और एमनेस्टी ने पाकिस्तान से रिहाई की माँग की

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दीन मोहम्मद बलोच की गुमशुदगी के 17 साल: फ्रंट लाइन डिफेंडर्स और एमनेस्टी ने पाकिस्तान से रिहाई की माँग की

सारांश

28 जून 2009 को खुजदार से कथित तौर पर उठाए गए बीएनएम नेता दीन मोहम्मद बलोच की गुमशुदगी के 17 साल पूरे होने पर फ्रंट लाइन डिफेंडर्स, एमनेस्टी इंटरनेशनल और बीएनएम ने लंदन व सियोल में प्रदर्शन कर पाकिस्तान से जवाबदेही और रिहाई की माँग की।

मुख्य बातें

दीन मोहम्मद बलोच को कथित तौर पर 28 जून 2009 को खुजदार सिविल अस्पताल , बलूचिस्तान से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिया गया था।
17 वर्ष बाद भी उनका कोई पता नहीं; अदालतों में कई याचिकाओं और परिवार के लंबे अभियान के बावजूद कोई जानकारी नहीं।
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से उनके ठिकाने की जानकारी देने और रिहाई सुनिश्चित करने की माँग की।
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट और दक्षिण कोरिया में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए।
प्रदर्शनकारियों ने महरंग बलोच , सिबगतुल्लाह बलोच और बलाच कादिर को कथित 'गोपनीय मुकदमों' में दी गई आजीवन कारावास की सजा की भी निंदा की।

बलूच मानवाधिकार रक्षक सम्मी दीन बलोच के पिता दीन मोहम्मद बलोच को कथित तौर पर 28 जून 2009 को बलूचिस्तान के खुजदार जिले से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के 17 वर्ष पूरे होने पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने उनकी तत्काल रिहाई की माँग उठाई है। फ्रंट लाइन डिफेंडर्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई संगठनों ने पाकिस्तान सरकार से दीन मोहम्मद के ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है।

मामले की पृष्ठभूमि

आयरलैंड स्थित मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार, दीन मोहम्मद बलोच — जो बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं — को 28 जून 2009 को खुजदार सिविल अस्पताल से कथित तौर पर उठाया गया था। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पुष्टि की कि अदालतों में कई याचिकाओं, अधिकारियों से अपील और परिवार के लंबे अभियान के बावजूद उनकी स्थिति अज्ञात बनी हुई है।

गौरतलब है कि एक पिता की तलाश से शुरू हुआ यह संघर्ष अब पाकिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी के विरुद्ध सबसे प्रमुख आंदोलनों में से एक बन चुका है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंताएँ

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने अपने बयान में कहा, 'बलूचिस्तान में कई वर्षों से जबरन गुमशुदगी को दमन के एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।' संगठन ने यह भी कहा कि लापता लोगों के परिवारों — विशेषकर माताओं, पत्नियों, बहनों और बेटियों — को भी कथित तौर पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

संगठन ने आरोप लगाया कि सम्मी दीन बलोच के घर पर कई बार छापे मारे गए, उनकी निगरानी की गई, उनके खिलाफ ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान चलाया गया और मानवाधिकार गतिविधियों के कारण उन्हें कई बार मनमाने ढंग से गिरफ्तार भी किया गया।

फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान सरकार से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: दीन मोहम्मद की स्थिति और ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करना, उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करना, और सम्मी दीन व अन्य प्रभावित परिवारों के खिलाफ कथित उत्पीड़न, निगरानी तथा प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों को तत्काल रोकना।

लंदन और सियोल में विरोध प्रदर्शन

बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने इस अवसर पर ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर हुए प्रदर्शन का उद्देश्य ब्रिटेन सरकार, संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक समुदाय का ध्यान बलूचिस्तान की बिगड़ती सामाजिक-राजनीतिक स्थिति की ओर आकर्षित करना था।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने दीन मोहम्मद की 17 वर्षों से जारी कथित गुमशुदगी, गैरकानूनी हिरासत और यातना की कड़ी निंदा करते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया। दक्षिण कोरिया में आयोजित प्रदर्शन में बीएनएम कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि दीन मोहम्मद पिछले 17 वर्षों से पाकिस्तान सेना की हिरासत में हैं।

व्यापक संदर्भ: बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी

बीएनएम ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी अब एक संगठित सरकारी नीति का रूप ले चुकी है, जिसके कारण हजारों बलूच परिवार प्रभावित हुए हैं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह बलोच और बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (बीएसओ) अध्यक्ष बलाच कादिर को कथित रूप से 'गोपनीय मुकदमों' के जरिए सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की भी आलोचना की।

आगे की राह

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की बढ़ती आवाज़ें और लंदन-सियोल जैसे वैश्विक केंद्रों में प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी का मुद्दा अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार चिंता बन चुका है। पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दबाव के अभाव में ये अक्सर बयानों तक सिमट जाती हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या लंदन और सियोल जैसे वैश्विक मंचों पर बढ़ती आवाज़ें पाकिस्तान पर ठोस जवाबदेही के लिए पर्याप्त दबाव बना पाएँगी।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीन मोहम्मद बलोच कौन हैं और वे कब से लापता हैं?
दीन मोहम्मद बलोच बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं। उन्हें कथित तौर पर 28 जून 2009 को बलूचिस्तान के खुजदार सिविल अस्पताल से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिया गया था और तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है।
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान से क्या माँगें की हैं?
आयरलैंड स्थित फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने पाकिस्तान सरकार से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: दीन मोहम्मद की स्थिति और ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक करना, उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करना, और उनकी बेटी सम्मी दीन बलोच तथा अन्य प्रभावित परिवारों के खिलाफ कथित उत्पीड़न एवं निगरानी को तत्काल रोकना।
सम्मी दीन बलोच को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है?
फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के अनुसार, सम्मी दीन बलोच के घर पर कई बार छापे मारे गए, उनकी निगरानी की गई, उनके खिलाफ ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान चलाया गया और मानवाधिकार गतिविधियों के कारण उन्हें कई बार मनमाने ढंग से गिरफ्तार भी किया गया।
बीएनएम ने 17वीं वर्षगाँठ पर कहाँ-कहाँ प्रदर्शन किए?
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर प्रदर्शन कर ब्रिटेन सरकार और संयुक्त राष्ट्र का ध्यान बलूचिस्तान की स्थिति की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा कितना व्यापक है?
बीएनएम का आरोप है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी अब एक संगठित नीति का रूप ले चुकी है, जिससे हजारों बलूच परिवार प्रभावित हुए हैं। फ्रंट लाइन डिफेंडर्स ने भी कहा है कि लापता लोगों के परिवारों — विशेषकर महिला सदस्यों — को भी कथित तौर पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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