30 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांग्लादेश में पढ़े-लिखे बेरोज़गारों की बढ़ती संख्या, प्रतिभाशाली युवाओं का पलायन जारी: रिपोर्ट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश में पढ़े-लिखे बेरोज़गारों की बढ़ती संख्या, प्रतिभाशाली युवाओं का पलायन जारी: रिपोर्ट

सारांश

बांग्लादेश में हर साल हज़ारों डिग्रीधारी युवा योग्य नौकरी से वंचित रह जाते हैं — और जो सबसे प्रतिभाशाली हैं, वे देश छोड़ रहे हैं। सैद्धांतिक शिक्षा और बाज़ार की ज़रूरतों के बीच की खाई, कम वेतन और सीमित शोध के अवसर मिलकर एक ऐसा संकट बना रहे हैं जो बांग्लादेश की विकास क्षमता को खोखला कर रहा है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिल रही, जिससे शिक्षित बेरोज़गारी लगातार बढ़ रही है।
योग्य नौकरियों की कमी, कम वेतन, पेशेवर पहचान का अभाव और शोध के सीमित अवसर युवाओं को विदेश पलायन के लिए मजबूर कर रहे हैं।
घरेलू कंपनियों को स्थानीय कुशल कर्मचारियों की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण पदों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2026 पर किए गए सर्वेक्षण में बेरोज़गारी को युवाओं की सबसे बड़ी चुनौती बताया गया।
सर्वेक्षण में बेरोज़गारी, मानसिक तनाव, डिजिटल लत और नीति-निर्माण में सीमित भागीदारी को प्रमुख समस्याओं के रूप में चिह्नित किया गया।
सर्वेक्षण 'स्वप्नपुरी कल्याण संस्था' और 'बांग्लादेश को-क्रिएशन' ने संयुक्त रूप से किया था।

बांग्लादेश में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के सामने रोज़गार संकट गहराता जा रहा है — हर साल हज़ारों स्नातक और परास्नातक डिग्रीधारी युवा अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी पाने में विफल हो रहे हैं। बांग्लादेशी अखबार 'द डेली ऑब्जर्वर' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति देश में शिक्षित बेरोज़गारी की गंभीर समस्या को उजागर करती है और बड़ी तादाद में प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश पलायन के लिए मजबूर कर रही है।

शिक्षा और रोज़गार के बीच बढ़ती खाई

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा सैद्धांतिक ज्ञान और रटकर सीखने पर आधारित है। इसके विपरीत, आधुनिक उद्योगों, कारोबार और तकनीकी क्षेत्र में व्यावहारिक दक्षता, समस्या सुलझाने की क्षमता और नई तकनीकों की समझ की माँग लगातार बढ़ रही है। नतीजतन, जब युवा नौकरी के बाज़ार में कदम रखते हैं, तो उन्हें अपनी शिक्षा और नियोक्ताओं की अपेक्षाओं के बीच एक बड़ी खाई का सामना करना पड़ता है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेज़ तकनीकी बदलावों के दौर से गुज़र रही है और डिजिटल कौशल की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश की शिक्षा व्यवस्था इन बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने में संघर्ष कर रही है।

प्रतिभा पलायन: देश का नुकसान, विदेश का फायदा

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि योग्य नौकरियों की कमी, अपेक्षाकृत कम वेतन, पेशेवर पहचान का अभाव और शोध के सीमित अवसर — ये चार प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से प्रतिभाशाली युवा विदेशों का रुख कर रहे हैं। इनमें से कई युवा उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं और वहीं नौकरी कर लेते हैं, और कुछ अंततः स्थायी रूप से विदेश में बस जाते हैं।

गौरतलब है कि इन युवाओं की प्रतिभा और कौशल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में काम आ सकते थे, लेकिन अब वे अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं में योगदान दे रहे हैं। इसी का दूसरा पहलू यह है कि उपयुक्त कौशल वाले स्थानीय कर्मचारियों की कमी के चलते घरेलू कंपनियों को कई महत्वपूर्ण पदों के लिए विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ रही है।

युवा सर्वेक्षण: बेरोज़गारी सबसे बड़ी चुनौती

इस वर्ष अगस्त में सामने आए एक सर्वेक्षण ने भी बांग्लादेश के युवाओं के सामने बढ़ते रोज़गार संकट को उजागर किया था। 'बांग्लादेश में युवाओं की समस्याएँ और संभावित समाधान' शीर्षक वाले इस सर्वेक्षण में बेरोज़गारी, कौशल की कमी, मानसिक तनाव, डिजिटल लत, ऑनलाइन जुआ और नशे की समस्या को युवाओं के समक्ष प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया गया।

'ढाका ट्रिब्यून' के अनुसार, यह सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2026 के अवसर पर सामाजिक शोध संगठन 'स्वप्नपुरी कल्याण संस्था' और 'बांग्लादेश को-क्रिएशन' ने संयुक्त रूप से किया था। इसमें बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से छात्रों, युवा संगठनों के प्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों, सामाजिक एवं विकास कार्यकर्ताओं और युवा पहलों से जुड़े लोगों ने भागीदारी की।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता दबाव

डिसेबल वेलफेयर सोसाइटी बांग्लादेश की सदस्य सालेहा के ने सर्वेक्षण में युवाओं में बढ़ती निराशा और अवसाद को प्रमुख चिंताओं में शामिल किया। गबुरा वेलफेयर सोसाइटी के आयोजन सचिव रबीउल इस्लाम ने कहा कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता, आत्मविश्वास की कमी और उचित मार्गदर्शन का अभाव बांग्लादेश के युवाओं को तेज़ी से मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है।

सर्वेक्षण में नीतिगत फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में युवाओं की सीमित भागीदारी का मुद्दा भी उठाया गया, जो दीर्घकालिक नीति-निर्माण में एक बड़े अंतर की ओर संकेत करता है।

आगे क्या होगा

रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट की जड़ में शिक्षा व्यवस्था की कमज़ोरियाँ, रोज़गार के सीमित अवसर और प्रतिभा को उचित सम्मान देने में विफलता जैसे ढाँचागत कारण हैं। जब तक बांग्लादेश अपनी शिक्षा प्रणाली को उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप नहीं ढालता और रोज़गार के पर्याप्त अवसर नहीं बनाता, तब तक यह पलायन और शिक्षित बेरोज़गारी का दुष्चक्र जारी रहने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उद्योग नीति और प्रतिभा प्रबंधन तीनों एक साथ चूक रहे हैं। विडंबना यह है कि जिन युवाओं में देश के भविष्य की नींव रखने की क्षमता है, उनकी प्रतिभा दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं को समृद्ध कर रही है। मुख्यधारा की चर्चा प्राय: पलायन के आँकड़ों पर केंद्रित रहती है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि बांग्लादेश की नीतिगत प्रक्रिया में युवाओं की आवाज़ कितनी सीमित है — सर्वेक्षण ने इस खामोश संकट को भी रेखांकित किया है। जब तक शिक्षा प्रणाली को बाज़ार की वास्तविक ज़रूरतों से नहीं जोड़ा जाता, तब तक डिग्रियाँ बढ़ती रहेंगी और अवसर सिकुड़ते रहेंगे।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में शिक्षित बेरोज़गारी की समस्या क्यों बढ़ रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश की शिक्षा प्रणाली सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित है, जबकि आधुनिक उद्योगों को व्यावहारिक दक्षता और तकनीकी कौशल की ज़रूरत है। इस अंतर के कारण डिग्रीधारी युवाओं को नौकरी के बाज़ार में अपेक्षाओं पर खरा उतरना मुश्किल हो रहा है।
बांग्लादेश में युवाओं का विदेश पलायन क्यों हो रहा है?
योग्य नौकरियों की कमी, अपेक्षाकृत कम वेतन, पेशेवर पहचान का अभाव और शोध के सीमित अवसर युवाओं को विदेश जाने पर मजबूर कर रहे हैं। कई युवा उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं और वहीं स्थायी रूप से बस जाते हैं।
बांग्लादेश के युवाओं पर किए गए सर्वेक्षण में क्या सामने आया?
'बांग्लादेश में युवाओं की समस्याएँ और संभावित समाधान' शीर्षक सर्वेक्षण में बेरोज़गारी को सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। इसके अलावा मानसिक तनाव, डिजिटल लत, ऑनलाइन जुआ, नशे की समस्या और नीति-निर्माण में युवाओं की सीमित भागीदारी को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में चिह्नित किया गया।
यह सर्वेक्षण किसने किया और इसमें किसने हिस्सा लिया?
यह सर्वेक्षण अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2026 के अवसर पर 'स्वप्नपुरी कल्याण संस्था' और 'बांग्लादेश को-क्रिएशन' ने संयुक्त रूप से किया था। इसमें बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों से छात्र, युवा संगठनों के प्रतिनिधि, स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
बांग्लादेश में युवा रोज़गार संकट का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?
प्रतिभाशाली युवाओं के पलायन से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को मानव संसाधन का सीधा नुकसान हो रहा है। वहीं, स्थानीय कुशल कर्मचारियों की कमी के चलते घरेलू कंपनियों को कई महत्वपूर्ण पदों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले