बांग्लादेश में खसरे का कहर: 6 और बच्चों की मौत, कुल मृतक संख्या 1,233 पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप धारण कर चुका है — सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को छह और बच्चों की मौत हो गई, जिससे ढाका में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा दर्ज इस वर्ष की कुल मृतक संख्या 1,233 तक जा पहुँची। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये सभी छह नई मौतें संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में वर्गीकृत की गई हैं।
ताज़ा आँकड़े और स्थिति
डीजीएचएस के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों में 1,388 नए संदिग्ध मामले दर्ज हुए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 2,22,552 हो गई है। इसी अवधि में 78 नए पुष्ट मामले सामने आए, जिससे कुल पुष्ट मामलों की संख्या 23,478 तक पहुँच गई।
पुष्ट मौतों की संख्या 104 पर स्थिर है, जबकि संदिग्ध मौतों का आँकड़ा बढ़कर 1,129 हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे पर भारी दबाव से जूझ रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री हसीना के आरोप
इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 'द संडे गार्डियन' से बातचीत में खसरे की इस स्थिति को 'महामारी' करार देते हुए इसे सरकारी लापरवाही और दशकों पुराने टीकाकरण तंत्र के कमज़ोर पड़ने का नतीजा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान लिए गए राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के कारण वैक्सीन खरीद प्रभावित हुई, जिससे टीकाकरण में बड़ा अंतर पैदा हो गया।
हसीना ने दावा किया कि मार्च 2026 में बांग्लादेश में मीजल्स रुबेला वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया था और तय समय पर अतिरिक्त टीकाकरण अभियान शुरू नहीं किया गया। उन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि जब प्रकोप की गंभीरता स्पष्ट हो गई, तब भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने कहा, "एक ऐसी बीमारी से एक हजार से अधिक बच्चों की मौत, जिसे रोका जा सकता था — यह सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।" हसीना ने स्वतंत्र जाँच, विशेष टीकाकरण अभियान और रियल टाइम निगरानी की माँग की।
सरकारी प्रयास और विशेषज्ञों की राय
'द डेली स्टार' के अनुसार, बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन की फिर से खरीद शुरू की और आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया। हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की तेज़ रफ्तार को देखते हुए स्थिति शीघ्र नियंत्रण में नहीं आएगी।
डीजीएचएस के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक डॉ. बेनजीर अहमद ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संक्रमण बहुत तेज़ी से फैल रहा है, इसलिए महामारी को काबू में आने में समय लगेगा। गौरतलब है कि पिछले महीने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रकोप के दोबारा फैलने के पीछे पहले के टीकाकरण में हुई कमी, संक्रमित बच्चों की पहचान में देरी और उन्हें समय पर अलग न रखने को ज़िम्मेदार बताया था।
आम जनता और बच्चों पर असर
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने 'द डेली स्टार' से बातचीत में बताया कि वैक्सीन लगने के बाद बच्चों में पर्याप्त प्रतिरक्षा विकसित होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। उनके अनुसार, संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और मौतों की मौजूदा लहर कम से कम एक महीने और जारी रह सकती है।
यह स्थिति न केवल बांग्लादेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करती है, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी एक सतर्कता संकेत है। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि क्या आपातकालीन टीकाकरण प्रयास इस प्रकोप की रफ्तार को थाम पाते हैं।