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ढाका में पत्रकार बुलबुल हुसैन की पुलिस पिटाई, जेएमबीएफ ने निष्पक्ष जांच की मांग की

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ढाका में पत्रकार बुलबुल हुसैन की पुलिस पिटाई, जेएमबीएफ ने निष्पक्ष जांच की मांग की

सारांश

ढाका में एक पत्रकार को पुलिस वैन में ले जाकर कथित पिटाई — यह घटना महज एक हमले की खबर नहीं, बल्कि बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव का प्रतीक है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जेएमबीएफ ने तत्काल जांच की माँग की है।

मुख्य बातें

ग्लोबल टेलीविजन के पत्रकार बुलबुल हुसैन को ढाका के बिजॉय सरानी चौराहे पर कथित तौर पर पुलिस वैन में ले जाकर पीटा गया।
घटना तब हुई जब बुलबुल ने पुलिसकर्मियों द्वारा एक महिला की कथित पिटाई को कैमरे में रिकॉर्ड करने की कोशिश की।
चिकित्सकों ने ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उनके सिर, आँख और छाती पर चोटें दर्ज कीं।
बुलबुल ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) आयुक्त को लिखित शिकायत देकर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की माँग की।
अंतरराष्ट्रीय संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की अपील की।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में ग्लोबल टेलीविजन के पत्रकार बुलबुल हुसैन के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन वैन में बैठाकर बुरी तरह पीटा, जिसके बाद उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताते हुए तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना ढाका के बिजॉय सरानी चौराहे पर घटी। बुलबुल हुसैन वहाँ इस्लामी छात्र शिबिर और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प की कवरेज के लिए पहुँचे थे। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मियों को एक महिला के साथ मारपीट करते देखा और पत्रकारिता के दायित्व के तहत घटना को कैमरे में रिकॉर्ड करना शुरू किया।

आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बुलबुल से वीडियो डिलीट करने को कहा। जब उन्होंने इनकार किया और खुद को पत्रकार बताया, तो कथित तौर पर उन्हें जबरन पुलिस वैन में बैठाकर पीटा गया।

चोटें और अस्पताल में भर्ती

बुलबुल हुसैन ने ढाका ट्रिब्युन से बातचीत में बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनके सिर पर कई बार प्रहार किया, उन्हें वैन के फर्श पर गिरा दिया और मारपीट जारी रखी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनकी छाती पर अपना बूट रखकर दम घोंटने की कोशिश की। ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने पाया कि उनके सिर, आँख और छाती पर चोटें आई हैं।

शिकायत और कार्रवाई की मांग

बुलबुल ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के आयुक्त को लिखित शिकायत देकर संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानूनी और विभागीय कार्रवाई की माँग की है। जेएमबीएफ ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के आचरण को रिकॉर्ड करने पर किसी पत्रकार के साथ मारपीट करना प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के सूचना के अधिकार के लिए गंभीर खतरा है।

मानवाधिकार संगठन की प्रतिक्रिया

जेएमबीएफ ने कहा, 'यह घटना बांग्लादेश के संविधान और देश के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के तहत गंभीर सवाल खड़े करती है।' संगठन ने सरकार और संबंधित कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से बुलबुल की शिकायत की तत्काल, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही उस महिला के साथ हुई कथित मारपीट की भी अलग से स्वतंत्र जांच की माँग की गई है।

आगे क्या होगा

जेएमबीएफ ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें पहले से तेज हैं। डीएमपी की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा आने वाले दिनों में इस मामले की गंभीरता तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अधिकांश मामलों में जवाबदेही सीमित रही है। पुलिस द्वारा वीडियो डिलीट करवाने का कथित दबाव यह संकेत देता है कि यह महज आवेग में की गई हिंसा नहीं, बल्कि दस्तावेज़ीकरण को दबाने की सोची-समझी कोशिश हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद जब तक डीएमपी की जांच में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मामला बांग्लादेश की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग पर और सवाल खड़े करता रहेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में पत्रकार बुलबुल हुसैन के साथ क्या हुआ?
ग्लोबल टेलीविजन के पत्रकार बुलबुल हुसैन को ढाका के बिजॉय सरानी चौराहे पर पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर जबरन वैन में बैठाकर पीटा। यह घटना तब हुई जब उन्होंने पुलिसकर्मियों द्वारा एक महिला की कथित पिटाई को कैमरे में रिकॉर्ड करने की कोशिश की।
जेएमबीएफ ने इस मामले में क्या माँग की है?
जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने बुलबुल हुसैन की शिकायत की तत्काल, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की माँग की है। संगठन ने यह भी कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
बुलबुल हुसैन को किस तरह की चोटें आईं?
ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने पाया कि बुलबुल हुसैन के सिर, आँख और छाती पर चोटें आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनकी छाती पर बूट रखकर दम घोंटने की कोशिश भी की।
बुलबुल हुसैन ने शिकायत कहाँ दर्ज कराई?
बुलबुल हुसैन ने ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के आयुक्त को लिखित शिकायत दी है, जिसमें संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानूनी और विभागीय कार्रवाई की माँग की गई है।
यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
जेएमबीएफ के अनुसार, किसी पत्रकार को कानून-प्रवर्तन अधिकारियों के आचरण को रिकॉर्ड करने के कारण पीटना प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनता के सूचना के अधिकार के लिए गंभीर खतरा है। यह घटना बांग्लादेश के संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों पर भी सवाल उठाती है।
राष्ट्र प्रेस
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