चीन ने क्यूबा को सौंपी 5,000 सौर ऊर्जा प्रणालियाँ, हवाना में हुआ सुपुर्दगी समारोह
सारांश
मुख्य बातें
चीन ने 8 अगस्त 2026 को क्यूबा को 5,000 घरेलू सौर ऊर्जा प्रणालियों की नई खेप सौंपी, जिसका औपचारिक सुपुर्दगी समारोह हवाना में आयोजित किया गया। यह शिपमेंट चीन-क्यूबा द्विपक्षीय सहयोग के तहत भेजी गई है और ऊर्जा संकट से जूझ रहे क्यूबा के लिए एक महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है।
सुपुर्दगी समारोह में कौन-कौन शामिल रहे
इस अवसर पर क्यूबा के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश व्यापार व विदेशी निवेश मंत्री ऑस्कर पेरेज ओलिवा फ्रागा तथा हवाना में चीनी राजदूत हुआ शिन उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने इस सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का प्रतीक बताया।
क्यूबा की ऊर्जा स्थिति और इस खेप का महत्व
उपप्रधानमंत्री ओलिवा फ्रागा ने कहा कि देश की राष्ट्रीय विद्युत व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से घिरी हुई है और आम नागरिकों को प्रतिदिन अमेरिकी नाकेबंदी के प्रभावों से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चीन की यह सहायता क्यूबा के ऊर्जा परिवर्तन में अहम भूमिका निभा रही है।
इन सौर ऊर्जा उपकरणों को दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के साथ-साथ नर्सरी, बैंकों और वृद्धाश्रमों में वितरित किया जाएगा, जो ऊर्जा संकट से सर्वाधिक प्रभावित हैं।
बेल्ट एंड रोड पहल से जुड़ाव
चीनी राजदूत हुआ शिन ने कहा कि ये उपकरण चीनी जनता की ओर से क्यूबाई नागरिकों के लिए एक उपहार हैं। उन्होंने बताया कि यह सहयोग 'बेल्ट एंड रोड' पहल के अंतर्गत ऊर्जा और जनजीवन से जुड़े सहयोग का एक महत्वपूर्ण परिणाम है। राजदूत ने यह भी कहा कि चीन क्यूबा को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में सहायता देता रहेगा और दोनों देशों के बीच 'साझा भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण को और मजबूत करेगा।
पिछली खेप से तुलना और तकनीकी उन्नयन
गौरतलब है कि चीन ने नवंबर 2025 में भी क्यूबा को 2 किलोवाट क्षमता वाली 5,000 फोटोवोल्टिक प्रणालियाँ सौंपी थीं। इस बार भेजी गई नई खेप में प्रति इकाई क्षमता और बैटरी भंडारण क्षमता को और बढ़ाया गया है। इन उपकरणों को क्यूबा की बिजली ग्रिड व्यवस्था और उष्ण कटिबंधीय जलवायु को ध्यान में रखकर विशेष रूप से तैयार किया गया है।
आगे क्या
यह खेप ऐसे समय में आई है जब क्यूबा लंबे समय से बिजली आपूर्ति की कमी और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। चीन-क्यूबा ऊर्जा सहयोग का यह सिलसिला आने वाले समय में और विस्तार पाने की संभावना है, क्योंकि दोनों देश 'साझा भविष्य' की अवधारणा के तहत अपने संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं।