22 जुलाई 2026
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यूएन साइबर सुरक्षा बैठक में चीन ने पेश किया डिजिटल प्रभुसत्ता का दस्तावेज, एआई शासन पर नया रुख

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यूएन साइबर सुरक्षा बैठक में चीन ने पेश किया डिजिटल प्रभुसत्ता का दस्तावेज, एआई शासन पर नया रुख

सारांश

न्यूयॉर्क में यूएन साइबर सुरक्षा तंत्र की पहली बैठक में चीन ने डिजिटल प्रभुसत्ता का नया सिद्धांत पेश किया — हर देश को एआई और डिजिटल तकनीक का रास्ता खुद चुनने का अधिकार। यह पश्चिमी 'मुक्त इंटरनेट' मॉडल को सीधी चुनौती है और वैश्विक साइबर नियमों की बहस को नई दिशा देता है।

मुख्य बातें

चीनी प्रतिनिधि मंडल ने 22 जुलाई 2025 को यूएन मुख्यालय, न्यूयॉर्क में वैश्विक साइबर शासन पर अपना पक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किया।
दस्तावेज में डिजिटल प्रभुसत्ता को केंद्रीय सिद्धांत बताया गया — हर देश को अपनी परिस्थितियों के अनुसार एआई और डिजिटल तकनीक का मार्ग चुनने का अधिकार।
साइबर स्पेस में यूएन चार्टर के सिद्धांतों के सम्मान और बहुपक्षवाद पर जोर दिया गया।
एआई सहित नई प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न साइबर खतरों से निपटने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय साइबर नियम बनाने की वकालत की गई।
यूएन साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की यह पहली बैठक 20 से 24 जुलाई तक जारी है।

संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की पहली बैठक में चीनी प्रतिनिधि मंडल ने 22 जुलाई 2025 को 'डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन का पक्ष' शीर्षक से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किया। यह बैठक 20 से 24 जुलाई तक न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित हो रही है। इस दस्तावेज में डिजिटल प्रभुसत्ता को केंद्रीय सिद्धांत के रूप में स्थापित करते हुए वैश्विक साइबर स्पेस के भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

दस्तावेज के मुख्य बिंदु

इस दस्तावेज में चीन ने साइबर प्रभुसत्ता के अपने पुराने रुख से आगे बढ़कर डिजिटल प्रभुसत्ता का व्यापक सिद्धांत प्रस्तुत किया है। दस्तावेज के अनुसार, प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) सहित डिजिटल तकनीक के विकास का मार्ग स्वयं चुनने का अधिकार है। यह वैश्विक साइबर शासन में 'एक आकार सभी के लिए उपयुक्त' के दृष्टिकोण को खारिज करता है।

यूएन चार्टर और बहुपक्षवाद पर जोर

दस्तावेज में यह भी रेखांकित किया गया है कि साइबर स्पेस में यूएन चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का सम्मान अनिवार्य है। चीन का तर्क है कि बहुपक्षवाद के आधार पर ही एआई और अन्य नई प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न साइबर सुरक्षा खतरों का प्रभावी समाधान संभव है। इसके साथ ही, वर्तमान डिजिटल युग के अनुकूल नए अंतरराष्ट्रीय साइबर नियम बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।

वैश्विक शासन पहल का नया आयाम

विश्लेषकों के अनुसार, यह दस्तावेज चीन की वैश्विक शासन पहल को लागू करने और 'साइबर स्पेस के साझा भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण की दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश और चीन के बीच इंटरनेट नियंत्रण, डेटा संप्रभुता और एआई नीति को लेकर मतभेद गहरे हो रहे हैं। गौरतलब है कि चीन लंबे समय से इंटरनेट के 'बहुहितधारक' मॉडल के बजाय 'अंतर-सरकारी' नियंत्रण का पक्षधर रहा है।

सार्वभौमिक विकास और समानता की वकालत

दस्तावेज में डिजिटल विभाजन को पाटने और विकासशील देशों को डिजिटल तकनीक तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है। चीन का कहना है कि डिजिटल प्रभुसत्ता के सम्मान और सार्वभौमिक विकास के बिना वैश्विक साइबर शासन अधूरा रहेगा।

आगे की राह

यूएन का यह स्थाई तंत्र 24 जुलाई तक अपनी बैठक जारी रखेगा। विभिन्न देशों के प्रतिनिधि साइबर सुरक्षा के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय ढाँचे पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। चीन के इस दस्तावेज पर अन्य देशों की प्रतिक्रिया और इसके बैठक के निष्कर्षों पर प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक इंटरनेट के भविष्य को लेकर जारी भू-राजनीतिक संघर्ष में एक सुनियोजित कदम है। 'डिजिटल प्रभुसत्ता' की भाषा विकासशील देशों को आकर्षित करने के लिए बनाई गई है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यही सिद्धांत राष्ट्रीय फ़ायरवॉल और सेंसरशिप को वैध ठहराने का औजार बन सकता है। यूएन के इस नए स्थाई तंत्र में चीन की सक्रिय भागीदारी यह भी दर्शाती है कि बीजिंग अब वैश्विक साइबर नियमों को बाहर से प्रभावित करने के बजाय भीतर से आकार देना चाहता है — जो पश्चिमी लोकतंत्रों के लिए एक नई चुनौती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन ने यूएन बैठक में कौन-सा दस्तावेज पेश किया?
चीनी प्रतिनिधि मंडल ने 'डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन का पक्ष' शीर्षक दस्तावेज पेश किया, जिसमें डिजिटल प्रभुसत्ता, बहुपक्षवाद और एआई शासन पर चीन का रुख स्पष्ट किया गया है। यह दस्तावेज 22 जुलाई 2025 को न्यूयॉर्क में यूएन साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की पहली बैठक में प्रस्तुत किया गया।
डिजिटल प्रभुसत्ता का सिद्धांत क्या है?
डिजिटल प्रभुसत्ता का अर्थ है कि प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार एआई सहित डिजिटल तकनीक के विकास का रास्ता स्वयं चुनने का अधिकार है। चीन इसे साइबर स्पेस में राष्ट्रीय स्वायत्तता की गारंटी के रूप में प्रस्तुत करता है।
यूएन वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की बैठक कब और कहाँ हो रही है?
यह बैठक 20 से 24 जुलाई 2025 तक न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हो रही है। यह इस स्थाई तंत्र की पहली औपचारिक बैठक है।
चीन के दस्तावेज में एआई और साइबर सुरक्षा पर क्या कहा गया है?
दस्तावेज में कहा गया है कि बहुपक्षवाद के आधार पर एआई और नई प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न साइबर खतरों का प्रभावी समाधान किया जाना चाहिए। साथ ही, वर्तमान डिजिटल युग के अनुकूल नए अंतरराष्ट्रीय साइबर नियम बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
चीन का यह दस्तावेज वैश्विक साइबर शासन बहस में क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दस्तावेज इंटरनेट के 'बहुहितधारक' और 'अंतर-सरकारी' नियंत्रण मॉडल के बीच चल रही वैश्विक बहस में चीन की स्थिति को औपचारिक रूप देता है। इसे चीन की वैश्विक शासन पहल का हिस्सा माना जा रहा है, जो विकासशील देशों को एक वैकल्पिक साइबर व्यवस्था की ओर आकर्षित करने का प्रयास करती है।
राष्ट्र प्रेस
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