यूएन साइबर सुरक्षा बैठक में चीन ने पेश किया डिजिटल प्रभुसत्ता का दस्तावेज, एआई शासन पर नया रुख
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की पहली बैठक में चीनी प्रतिनिधि मंडल ने 22 जुलाई 2025 को 'डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन का पक्ष' शीर्षक से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किया। यह बैठक 20 से 24 जुलाई तक न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित हो रही है। इस दस्तावेज में डिजिटल प्रभुसत्ता को केंद्रीय सिद्धांत के रूप में स्थापित करते हुए वैश्विक साइबर स्पेस के भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
दस्तावेज के मुख्य बिंदु
इस दस्तावेज में चीन ने साइबर प्रभुसत्ता के अपने पुराने रुख से आगे बढ़कर डिजिटल प्रभुसत्ता का व्यापक सिद्धांत प्रस्तुत किया है। दस्तावेज के अनुसार, प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) सहित डिजिटल तकनीक के विकास का मार्ग स्वयं चुनने का अधिकार है। यह वैश्विक साइबर शासन में 'एक आकार सभी के लिए उपयुक्त' के दृष्टिकोण को खारिज करता है।
यूएन चार्टर और बहुपक्षवाद पर जोर
दस्तावेज में यह भी रेखांकित किया गया है कि साइबर स्पेस में यूएन चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का सम्मान अनिवार्य है। चीन का तर्क है कि बहुपक्षवाद के आधार पर ही एआई और अन्य नई प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न साइबर सुरक्षा खतरों का प्रभावी समाधान संभव है। इसके साथ ही, वर्तमान डिजिटल युग के अनुकूल नए अंतरराष्ट्रीय साइबर नियम बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
वैश्विक शासन पहल का नया आयाम
विश्लेषकों के अनुसार, यह दस्तावेज चीन की वैश्विक शासन पहल को लागू करने और 'साइबर स्पेस के साझा भविष्य वाले समुदाय' के निर्माण की दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश और चीन के बीच इंटरनेट नियंत्रण, डेटा संप्रभुता और एआई नीति को लेकर मतभेद गहरे हो रहे हैं। गौरतलब है कि चीन लंबे समय से इंटरनेट के 'बहुहितधारक' मॉडल के बजाय 'अंतर-सरकारी' नियंत्रण का पक्षधर रहा है।
सार्वभौमिक विकास और समानता की वकालत
दस्तावेज में डिजिटल विभाजन को पाटने और विकासशील देशों को डिजिटल तकनीक तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है। चीन का कहना है कि डिजिटल प्रभुसत्ता के सम्मान और सार्वभौमिक विकास के बिना वैश्विक साइबर शासन अधूरा रहेगा।
आगे की राह
यूएन का यह स्थाई तंत्र 24 जुलाई तक अपनी बैठक जारी रखेगा। विभिन्न देशों के प्रतिनिधि साइबर सुरक्षा के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय ढाँचे पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। चीन के इस दस्तावेज पर अन्य देशों की प्रतिक्रिया और इसके बैठक के निष्कर्षों पर प्रभाव पर सभी की नजरें टिकी हैं।