चीन के जातीय एकता कानून का विरोध: तिब्बतियों पर निगरानी और उत्पीड़न के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
चीन के जातीय एकता और प्रगति कानून का विरोध करने वाले तिब्बती समुदाय के सदस्यों को कथित तौर पर निगरानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। न्यूजीलैंड में रहने वाले एक तिब्बती नागरिक ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में यह गंभीर दावा किया है, जो प्रवासी तिब्बती समुदाय की बढ़ती चिंताओं को उजागर करता है।
मुख्य घटनाक्रम
न्यूजीलैंड में रहने वाले गाडेन नाम के एक तिब्बती व्यक्ति ने रेडियो न्यूजीलैंड को बताया कि उन्हें ऐसे कई मामलों की जानकारी है जहाँ तिब्बतियों पर चीनी नागरिकों की ओर से दबाव डाला गया। उन्होंने कहा, 'वे सीधे हमारे पास नहीं आते... वे बस दूर से हमारी तस्वीर लेते हैं।' यह बयान विदेश में रहने वाले तिब्बतियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करता है।
न्यूजीलैंड की सुरक्षा खुफिया सेवा (SIS) ने अपने नवीनतम खतरा आकलन में स्वीकार किया है कि देश में रहने वाले प्रवासी समुदायों को विदेशी राज्यों और उनके प्रतिनिधियों द्वारा अनुचित रूप से निशाना बनाया जा रहा है — जिसका उद्देश्य उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्रता को सीमित करना है।
तिब्बती संस्कृति पर कथित दबाव
गाडेन ने चीन के जातीय एकता कानून को तिब्बती सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि तिब्बत में तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, मठों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाने वाले प्रार्थना झंडों को भी कथित तौर पर हटाया जा रहा है और कुछ मामलों में उन्हें जलाया तथा पैरों से रौंदा जा रहा है।
गौरतलब है कि ये प्रार्थना झंडे तिब्बती बौद्ध परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं और इनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इन पर कथित कार्रवाई को तिब्बती समुदाय अपनी धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला मानता है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह की घटना
गाडेन ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर हाल ही में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को आग लगा ली और बाद में उसकी मौत हो गई। उनके अनुसार, कुछ तिब्बती जातीय एकता कानून के विरोध में आत्मदाह जैसे चरम कदम उठा रहे हैं। गाडेन ने कहा, 'उसने तिब्बतियों के न्यायपूर्ण उद्देश्य के लिए खुद को जला लिया, क्योंकि हम सभी बेहद निराश हैं।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तिब्बती लोग शांतिप्रिय हैं और चीन के भीतर किसी प्रकार की हिंसा या नुकसान नहीं चाहते — उनकी एकमात्र माँग अपनी पहचान और संस्कृति को बनाए रखने की है।
विशेषज्ञ और दलाई लामा परिवार की राय
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के भतीजे खेद्रूब थोंडुप ने 'द यूरोपियन टाइम्स' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा कि इतिहास गवाह है कि कोई भी साम्राज्य अनंतकाल तक नहीं टिकता। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) आज तिब्बती पठार पर आधुनिकीकरण, निगरानी और जनसांख्यिकीय बदलावों के माध्यम से अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी है।
उसी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि तिब्बत में CCP की नीतियाँ 'समावेशन के जरिए साम्राज्य विस्तार' का उदाहरण हैं, और इतिहास बताता है कि जबरन समावेशन की ऐसी नीतियाँ अंततः व्यवस्थागत सीमाओं से टकराती हैं।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन तिब्बत में CCP की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। न्यूजीलैंड SIS का खतरा आकलन इस बात का संकेत है कि पश्चिमी देश प्रवासी समुदायों पर विदेशी हस्तक्षेप को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं। तिब्बती समुदाय की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को और तीव्रता से उठाए जाने की संभावना है।