18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन से बनाई दूरी, रणनीतिक साझेदारी पर सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन से बनाई दूरी, रणनीतिक साझेदारी पर सवाल

सारांश

BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग ने पुतिन से गर्मजोशी दिखाई, मोदी से मिले — लेकिन 'रणनीतिक साझेदार' ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन से कोई सार्वजनिक बातचीत नहीं हुई। SCO के बाद अब BRICS में भी यही पैटर्न दिखा, जो चीन-ईरान संबंधों की असली परतें उघाड़ता है।

मुख्य बातें

BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग और मसूद पेजेश्कियन के बीच कोई सार्वजनिक बातचीत नहीं हुई।
शी जिनपिंग नई दिल्ली में एक दिन से भी कम रुके और केवल PM मोदी से औपचारिक बैठक की।
बिश्केक के SCO शिखर सम्मेलन में भी शी ने पेजेश्कियन को काफी कम तवज्जो दी थी।
चीन के कुल वैश्विक व्यापार में ईरान की हिस्सेदारी 1% से भी कम है, जबकि ईरान चीन पर बड़े पैमाने पर निर्भर है।
दोनों देशों ने 2021 में 25 साल का सहयोग समझौता किया था, लेकिन वास्तविक निवेश काफी कम रहा है।

चीन-ईरान रणनीतिक साझेदारी के दावों पर नए सवाल उठ खड़े हुए हैं, जब नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से कोई सार्वजनिक बातचीत नहीं की। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच घनिष्ठ आर्थिक निर्भरता के बावजूद बीजिंग ने तेहरान के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित करने से परहेज किया।

BRICS में क्या दिखा

एमबीएन न्यूज़ वेबसाइट पर प्रकाशित एक विश्लेषण में लेखक जिम स्नाइडर के अनुसार, शी जिनपिंग नई दिल्ली में एक दिन से भी कम समय तक रुके। इस दौरान उन्होंने मेज़बान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और ग्लोबल साउथ के देशों का अपनी शासन-संबंधी पहलों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की।

स्नाइडर ने लिखा, 'ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि उन्होंने पेजेश्कियन से बात की हो। यह उन दो देशों के बीच एक साफ दूरी दिखाता है, जिन्हें अक्सर रणनीतिक साझेदार के तौर पर पेश किया जाता है।'

SCO में भी यही पैटर्न

यह पहली बार नहीं है जब इस दूरी को महसूस किया गया। पिछले महीने किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी यही स्थिति देखी गई थी। विश्लेषण के मुताबिक, शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं — जिनकी आधिकारिक तस्वीरें भी जारी हुईं — जबकि पेजेश्कियन के साथ केवल एक संक्षिप्त मुलाकात हुई और उन्हें काफी कम महत्व मिला।

गौरतलब है कि इसी दौरान शी ने पुतिन के प्रति अपना समर्थन कहीं अधिक खुलकर व्यक्त किया — जो चीन की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।

आर्थिक संबंध: असमान साझेदारी

एमबीएन के पहले 'ग्रेट पावर्स इंडेक्स' में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र के किसी भी अन्य देश की तुलना में ईरान को चीन के सबसे करीब दर्शाया गया है। ईरान किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक निर्यात चीन को करता है और चीनी वस्तुओं के आयात पर भी बड़े पैमाने पर निर्भर है। चीन को ईरान से रियायती दरों पर कच्चा तेल मिलता है, जबकि ईरान को इससे विदेशी मुद्रा और चीनी उत्पादों तक पहुँच मिलती है।

हालाँकि, विश्लेषण यह भी बताता है कि यह रिश्ता बराबरी का नहीं है। चीन के कुल वैश्विक व्यापार में ईरान की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों ने 2021 में 25 साल का व्यापक सहयोग समझौता किया था, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग शामिल था — फिर भी वास्तविक निवेश का स्तर काफी कम रहा है।

विशेषज्ञों का नज़रिया

विश्लेषण में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि चीन इस समय यह संदेश नहीं देना चाहता कि वह ईरान के अत्यधिक करीब है। इसके पीछे बीजिंग की व्यापक मध्य पूर्व रणनीति है, जिसमें वह अरब देशों, इज़राइल और पश्चिम के साथ भी अपने संबंध संतुलित रखना चाहता है।

आलोचकों का कहना है कि चीन-ईरान संबंध आंकड़ों में जितने गहरे दिखते हैं, व्यवहार में वे उससे कहीं अधिक जटिल और परिस्थितिजन्य हैं। आगे के घटनाक्रम यह तय करेंगे कि बीजिंग अपने 'रणनीतिक साझेदार' तेहरान के साथ कितना खुलकर खड़ा होने को तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि वैचारिक या सामरिक सहयोगी। BRICS और SCO दोनों में शी का व्यवहार यह साफ करता है कि चीन अरब देशों, पश्चिम और इज़राइल के साथ अपने व्यापक संबंध खतरे में डालकर ईरान को गले लगाने का जोखिम नहीं उठाएगा। विडंबना यह है कि 2021 के 25 साल के समझौते की जितनी धूम मचाई गई, निवेश उतना ही खोखला साबित हुआ। ईरान के लिए यह संकेत स्पष्ट है — बहुध्रुवीय विश्व में भी उसका एकमात्र बड़ा साझेदार उसे सार्वजनिक मंच पर अकेला छोड़ने में नहीं हिचकता।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग और ईरानी राष्ट्रपति के बीच क्या हुआ?
नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच कोई सार्वजनिक बातचीत नहीं हुई। शी ने PM मोदी से तो मुलाकात की, लेकिन पेजेश्कियन के साथ किसी भी औपचारिक बैठक की रिपोर्ट सामने नहीं आई।
चीन और ईरान के बीच आर्थिक संबंध कैसे हैं?
चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है — ईरान उसे सस्ते दर पर कच्चा तेल निर्यात करता है और चीनी सामान का बड़ा आयातक भी है। हालाँकि, चीन के कुल वैश्विक व्यापार में ईरान की हिस्सेदारी 1% से भी कम है, जो इस रिश्ते की असमानता को दर्शाता है।
चीन-ईरान का 25 साल का समझौता क्या है?
दोनों देशों ने 2021 में एक व्यापक 25 साल का सहयोग समझौता किया था, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढाँचा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग शामिल था। विश्लेषकों के अनुसार, इसके बावजूद वास्तविक निवेश का स्तर काफी कम रहा है।
क्या SCO में भी शी जिनपिंग ने ईरान से दूरी बनाई थी?
हाँ, बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन में भी यही पैटर्न देखा गया था। शी ने पुतिन, मिर्जियोयेव और जापारोव के साथ औपचारिक बैठकें कीं, जबकि पेजेश्कियन के साथ केवल एक संक्षिप्त मुलाकात हुई और उन्हें काफी कम महत्व मिला।
चीन ईरान से सार्वजनिक दूरी क्यों बना रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन इस समय यह प्रदर्शित नहीं करना चाहता कि वह ईरान के अत्यधिक करीब है। इसके पीछे बीजिंग की व्यापक मध्य पूर्व रणनीति है, जिसमें वह अरब देशों और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध भी संतुलित बनाए रखना चाहता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 5 दिन पहले
  6. 5 दिन पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 2 महीने पहले