चीन में 1 अगस्त से सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार व उद्यमिता पर नया नियम लागू होगा
सारांश
मुख्य बातें
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने राज्य परिषद का औपचारिक आदेश जारी करते हुए घोषणा की है कि सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार और उद्यमिता संवर्धन नियम इस वर्ष 1 अगस्त 2026 से पूरे चीन में प्रभावी होगा। यह नियम सेवानिवृत्त सैनिकों को नागरिक जीवन में सम्मानजनक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम माना जा रहा है।
नियम के मुख्य उद्देश्य
नए नियम का केंद्रीय लक्ष्य सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर विस्तारित करना और उद्यमिता को प्रोत्साहन देना है। इसके साथ ही नियम में सेवानिवृत्त सैनिकों के कानूनी हितों की रक्षा और उनके मानव संसाधन कौशल का समाज में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। दीर्घकालिक दृष्टि से इस नियम का उद्देश्य सैन्य सेवा को समाज में एक सम्मानित और आकर्षक पेशे के रूप में स्थापित करना भी है।
नीति का ढाँचा और सिद्धांत
नियम में स्पष्ट किया गया है कि सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार और उद्यमिता कार्यक्रम समावेशी और उदार नीति के सिद्धांत पर आधारित होंगे। इस ढाँचे में सरकारी प्रोत्साहन, बाजार-आधारित मार्गदर्शन और सामाजिक समर्थन — तीनों स्तंभों को एकीकृत किया गया है। सेवानिवृत्त सैनिकों को करियर चुनाव के संबंध में उचित दृष्टिकोण विकसित करने में भी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
शिक्षा, प्रशिक्षण और सब्सिडी प्रावधान
नियम के अनुसार, सरकार सेवानिवृत्त सैनिकों के शिक्षण और व्यावसायिक प्रशिक्षण को मजबूत करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा परीक्षाओं में भाग लेने और औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए सेवानिवृत्त सैनिक संबंधित नियमों के तहत उदार नीतियों और सब्सिडी का लाभ उठा सकेंगे। यह प्रावधान उन सैनिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो सेवानिवृत्ति के बाद अपनी शैक्षणिक योग्यता उन्नत करना चाहते हैं।
रोजगार अधिमान्यता और उद्यमिता समर्थन
नियम में रोजगार अधिमान्य उपाय और उद्यमिता समर्थन उपाय भी निर्धारित किए गए हैं, जो सेवानिवृत्त सैनिकों को निजी व्यवसाय स्थापित करने या प्राथमिकता के आधार पर नियोजन पाने में सहायता करेंगे। यह नीति ऐसे समय में आई है जब चीन अपनी सेना के आधुनिकीकरण के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मियों के पुनर्एकीकरण को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देख रहा है।
आगे की राह
नियम के 1 अगस्त 2026 से लागू होने के साथ, संबंधित सरकारी विभागों से अपेक्षा है कि वे क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निजी क्षेत्र और स्थानीय सरकारें इसे किस हद तक अपनाती हैं।