चीन-अमेरिका समुद्री सैन्य सुरक्षा परामर्श बैठक हवाई में संपन्न, समुद्री-हवाई सुरक्षा पर खुली चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
चीन और अमेरिका की सेनाओं ने 28-29 मई 2026 को अमेरिका के हवाई में 2026 चीन-अमेरिका समुद्री सैन्य सुरक्षा परामर्श कार्य समूह की बैठक आयोजित की, जिसमें दोनों देशों के बीच मौजूदा समुद्री और हवाई सुरक्षा स्थिति पर खुलकर बातचीत हुई। यह बैठक दोनों महाशक्तियों के बीच ‘रचनात्मक रणनीतिक और स्थिर संबंध’ बनाने की सहमति की पृष्ठभूमि में आयोजित की गई।
बैठक का मुख्य एजेंडा
दोनों पक्षों ने समानता और सम्मान के आधार पर समुद्री और हवाई क्षेत्र में आमने-सामने की स्थितियों पर रचनात्मक चर्चा की। बैठक में 2025 में हुई पिछली परामर्श बैठक के बाद से समुद्र और हवा में दोनों देशों की सेनाओं की मुलाकातों के लिए तय सुरक्षित आचार संहिता के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई, और समुद्री सैन्य सुरक्षा मुद्दों में सुधार के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ।
संचार और गलतफहमी से बचाव
दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि सेनाओं के बीच प्रभावी संचार और आदान-प्रदान अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को अपने मिशन पेशेवर तरीके से पूरा करने में मदद करेगा। इससे आपसी समझ बढ़ेगी और गलतफहमियों तथा गलत निर्णयों से बचा जा सकेगा — एक ऐसा बिंदु जो हाल के वर्षों में दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ी सैन्य आवाजाही के संदर्भ में विशेष रूप से अहम है।
चीन का कड़ा रुख
चीन ने स्पष्ट किया कि वह नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता की आड़ में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी कार्रवाई का कड़ा विरोध करता है। बीजिंग के अनुसार, वह चीन के विरुद्ध किसी भी प्रकार के उल्लंघन, उकसावे या निकटवर्ती जासूसी और उत्पीड़न का घोर विरोध करता है, और कानूनों के अनुसार अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता तथा समुद्री हितों की रक्षा करता रहेगा।
क्षेत्रीय संदर्भ
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की नौसैनिक उपस्थिति लगातार बढ़ी है और दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य तथा पूर्वी चीन सागर में आमने-सामने की घटनाएँ बार-बार सुर्खियाँ बन चुकी हैं। गौरतलब है कि चीन-अमेरिका सैन्य संवाद कई बार रुक चुका है, और 2023 के बाद इसकी क्रमिक बहाली को क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
आगे क्या
दोनों पक्षों ने आचार संहिता के बेहतर क्रियान्वयन और संवाद तंत्र को मजबूत बनाने पर ज़ोर दिया है। बीजिंग ने दोहराया कि वह क्षेत्रीय शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि अगली परामर्श बैठक का कार्यक्रम बाद में तय किया जाना है।