प्लांट-बेस्ड उत्पाद डेयरी का विकल्प नहीं: लैंसेट अध्ययन में आयोडीन, कैल्शियम की कमी का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, डेयरी उत्पादों को पूरी तरह या आंशिक रूप से प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदलने पर शरीर में आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और राइबोफ्लेविन जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की गंभीर कमी हो सकती है। यह अध्ययन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर 'वीगन' जीवनशैली का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और बादाम, सोया तथा ओट्स से बने उत्पाद डेयरी का स्थान लेते दिख रहे हैं।
अध्ययन का दायरा और पद्धति
शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के बाज़ार में उपलब्ध 289 प्लांट-बेस्ड उत्पादों का विस्तृत पोषण-विश्लेषण किया। इनमें 146 प्लांट-बेस्ड दूध, 76 दही के विकल्प और 67 पनीर के विकल्प शामिल थे। विश्लेषण में आयोडीन, कैल्शियम, विटामिन बी12 और विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) की मात्रा की जाँच की गई।
निष्कर्ष चिंताजनक रहे — जाँचे गए उत्पादों में केवल 12 प्रतिशत में आयोडीन, 61 प्रतिशत में कैल्शियम, 46 प्रतिशत में विटामिन बी12 और मात्र 19 प्रतिशत में राइबोफ्लेविन को अतिरिक्त रूप से मिलाया गया था। गौरतलब है कि पोषक तत्वों को शामिल करने की मात्रा और प्रक्रिया में भी उत्पादों के बीच व्यापक असमानता पाई गई।
किशोरियों और महिलाओं पर सर्वाधिक असर
अध्ययन के अनुसार, यदि डेयरी उत्पादों की खपत में 20 से 35 प्रतिशत तक की जगह प्लांट-बेस्ड विकल्प ले लें, तो 14 से 18 वर्ष की किशोरियों में आयोडीन की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 54 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच सकता है। वहीं 19 से 49 वर्ष की महिलाओं में यह जोखिम 32 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत तक जा सकता है।
यदि डेयरी उत्पादों को पूर्णतः प्लांट-बेस्ड विकल्पों से बदल दिया जाए, तो किशोरियों में आयोडीन की कमी का जोखिम 80 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है — एक आँकड़ा जिसे शोधकर्ताओं ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी के रूप में रेखांकित किया है।
कैल्शियम और विटामिन बी2 की स्थिति
कैल्शियम के मोर्चे पर भी तस्वीर चिंताजनक है। अध्ययन के अनुसार, डेयरी उत्पादों को पूरी तरह बदलने की स्थिति में 14 से 18 वर्ष के किशोरों में कैल्शियम की अपर्याप्त मात्रा का जोखिम 30 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत और किशोरियों में 54 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत तक हो सकता है।
विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) की कमी का जोखिम भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है। 19 से 49 वर्ष के पुरुषों में यह 14 प्रतिशत से 26 प्रतिशत और महिलाओं में 29 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया है।
इन पोषक तत्वों की ज़रूरत क्यों
विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि के सुचारु कार्य और मस्तिष्क के विकास के लिए अनिवार्य है — गर्भावस्था के दौरान इसकी पर्याप्त मात्रा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण होती है। कैल्शियम हड्डियों और दाँतों की मज़बूती के साथ-साथ मांसपेशियों के संकुचन और हृदय की लय को नियंत्रित करता है।
विटामिन बी12 तंत्रिका तंत्र और रक्त कोशिकाओं के सामान्य कार्य के लिए ज़रूरी है, जबकि राइबोफ्लेविन त्वचा, आँखों और तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य में सक्रिय भूमिका निभाता है।
नीतिगत सिफारिशें और आगे की राह
अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खानपान को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों की पोषण संबंधी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। शोधकर्ताओं ने खाद्य उत्पादों में पोषक तत्वों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की नीति पर बल दिया है।
उनका मानना है कि बाज़ार में प्लांट-बेस्ड विकल्पों की उपलब्धता बढ़ाना तब तक पर्याप्त नहीं होगा, जब तक इन उत्पादों को पोषण के दृष्टिकोण से डेयरी उत्पादों का सही विकल्प नहीं बनाया जाता। विशेषज्ञों की राय में इस दिशा में सरकारी नियामक हस्तक्षेप और उद्योग मानकों में सुधार की ज़रूरत है।