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ब्रिक्स NSA बैठक में डोभाल का संदेश: दुनिया की आधी आबादी का यह समूह वैश्विक सुरक्षा में निभाए अहम भूमिका

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ब्रिक्स NSA बैठक में डोभाल का संदेश: दुनिया की आधी आबादी का यह समूह वैश्विक सुरक्षा में निभाए अहम भूमिका

सारांश

डोभाल का संदेश साफ था — ब्रिक्स अब केवल आर्थिक मंच नहीं, बल्कि दुनिया की आधी आबादी की सामूहिक आवाज़ है। जब बहुपक्षीय संस्थाएँ कमज़ोर पड़ रही हैं और सीमापार खतरे बढ़ रहे हैं, तब यह समूह वैश्विक स्थिरता का एक अपरिहार्य स्तंभ बन सकता है।

मुख्य बातें

NSA अजीत डोभाल ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक की अध्यक्षता की।
ब्रिक्स देशों की सामूहिक जीडीपी विश्व अर्थव्यवस्था के 30 प्रतिशत से अधिक और भूभाग 42 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक है।
डोभाल ने चेताया कि बहुपक्षवाद में गिरावट ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक सहयोग की सर्वाधिक ज़रूरत है।
बैठक में काउंटर-टेररिज्म और साइबर सुरक्षा पर ब्रिक्स संयुक्त कार्यकारी समूहों के निष्कर्षों पर चर्चा हुई।
डोभाल ने अमेरिका-ईरान के कथित ज्ञापन समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक कदम बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ब्रिक्स महज देशों का एक समूह नहीं, बल्कि दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी का साझा मंच है, जिसकी वैश्विक उथल-पुथल और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में 'खास भूमिका' है। उन्होंने सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के समक्ष रेखांकित किया कि जब अंतरराष्ट्रीय संस्थागत ढाँचे कमज़ोर पड़ रहे हैं, तब ब्रिक्स जैसे बहुध्रुवीय मंच की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

बैठक का संदर्भ और भारत की अध्यक्षता

भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख शामिल हुए। डोभाल ने उद्घाटन संबोधन में कहा, 'मैं आज आपकी मौजूदगी और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के आपके लगातार प्रतिबद्धता के लिए आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ।' भारत ने इस बैठक के माध्यम से सदस्य देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की अपनी मंशा स्पष्ट की।

वैश्विक संकट और बहुपक्षवाद की गिरावट

डोभाल ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को 'असाधारण रूप से कठिन' बताया। उन्होंने कहा, 'हम बहुत मुश्किल समय में मिल रहे हैं। दुनिया सैन्य झगड़ों और कठिन सुरक्षा समस्याओं से जूझ रही है। यह भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबाव और विघटनकारी प्रौद्योगिकी का सामना कर रही है।' उन्होंने चेताया कि न केवल खतरे जटिल होते जा रहे हैं, बल्कि उनसे निपटने के मौजूदा संस्थागत तंत्र भी 'लगातार अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।'

बहुपक्षीय सहयोग के कमज़ोर होने पर चिंता जताते हुए डोभाल ने कहा, 'बहुपक्षवाद कम हो रहा है' — और यह ठीक ऐसे समय में हो रहा है जब मिलकर काम करने की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे वैश्विक संदर्भ में आई है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत कई बहुपक्षीय मंचों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

ब्रिक्स की आर्थिक और भौगोलिक शक्ति

डोभाल ने ब्रिक्स की व्यापक उपस्थिति के आँकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि यह समूह 1.4 अरब लोगों का घर है — जो विश्व जनसंख्या का लगभग 49 प्रतिशत है। सामूहिक रूप से ब्रिक्स देश वैश्विक संपदा निर्माण में 31.5 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देते हैं और इनकी जीडीपी विश्व अर्थव्यवस्था के 30 प्रतिशत से अधिक के बराबर है। इन देशों का भूभाग 42 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक है। उन्होंने ब्रिक्स को 'शांति, विकास और सहयोग की साझा आकांक्षाओं से जुड़े देशों का एक विशेष गठबंधन' बताया।

गैर-पारंपरिक खतरे और साइबर सुरक्षा

एनएसए डोभाल ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, 'गैर-पारंपरिक खतरों ने देश की सीमाओं को पार कर लिया है और पारंपरिक जवाबों के खिलाफ प्रतिरोध के तंत्र विकसित कर लिए हैं। नई विघटनकारी प्रौद्योगिकी, आतंकवाद के अधिक छिपे हुए रूप, साइबर खतरे — एक ऐसी दुनिया में जो तेज़ी से डिजिटल हो रही है — ये सभी हमारे लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं।' उन्होंने बताया कि बैठक में काउंटर-टेररिज्म और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा पर ब्रिक्स संयुक्त कार्यकारी समूहों के निष्कर्षों पर भी चर्चा होगी।

अमेरिका-ईरान समझौते पर भारत की प्रतिक्रिया

डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच कथित तौर पर हुए ज्ञापन समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इस विकास को 'सावधानी के साथ उम्मीद' की नज़र से देख रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि यह काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना एक बहुत सकारात्मक कदम है। इससे आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएँ दूर होंगी और उर्वरक तथा रसायन क्षेत्र में कई कमियाँ दूर हो जाएँगी।' उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता से आर्थिक समृद्धि में भी सुधार होगा।

आगे की राह

इस बैठक के माध्यम से भारत ने स्पष्ट किया है कि वह ब्रिक्स को एक सक्रिय और प्रभावशाली वैश्विक मंच के रूप में देखता है। डोभाल के अनुसार, ब्रिक्स का मूल विज़न एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय मामलों में ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूत करना था — और आज के संकटग्रस्त वैश्विक माहौल में यह विज़न पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस विविध समूह में रूस-चीन और भारत-ब्राज़ील जैसे परस्पर विरोधी हितों वाले देशों के बीच वास्तविक सुरक्षा सहयोग कितना संभव है। बहुपक्षवाद की गिरावट पर चिंता जताना सही है, लेकिन ब्रिक्स स्वयं भी अभी तक किसी ठोस सुरक्षा वास्तुकला का निर्माण नहीं कर पाया है। काउंटर-टेररिज्म पर 'जॉइंट वर्किंग ग्रुप' के नतीजे कागज़ों से ज़मीन तक कितने उतरे हैं, यह पारदर्शी रूप से सामने नहीं आता — और यही वह अंतर है जो इस मंच की विश्वसनीयता की असली परीक्षा है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

16वीं ब्रिक्स NSA बैठक में क्या हुआ?
23 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता NSA अजीत डोभाल ने की, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, काउंटर-टेररिज्म और साइबर सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया। भारत इस वर्ष ब्रिक्स NSA बैठक की अध्यक्षता कर रहा है।
डोभाल ने ब्रिक्स को इतना महत्वपूर्ण क्यों बताया?
डोभाल के अनुसार ब्रिक्स विश्व की लगभग 49 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और इसकी सामूहिक जीडीपी वैश्विक अर्थव्यवस्था के 30 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि जब पारंपरिक बहुपक्षीय संस्थाएँ कमज़ोर पड़ रही हैं, तब ब्रिक्स जैसे मंच की भूमिका और अधिक अहम हो जाती है।
डोभाल ने किन सुरक्षा खतरों का ज़िक्र किया?
उन्होंने गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों — जैसे साइबर हमले, आतंकवाद के नए और छिपे हुए रूप, तथा विघटनकारी प्रौद्योगिकी — को प्रमुख चिंता बताया। उन्होंने कहा कि ये खतरे राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुके हैं और पारंपरिक जवाब इनके खिलाफ अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
अमेरिका-ईरान समझौते पर भारत का क्या रुख है?
डोभाल ने कहा कि भारत इस कथित ज्ञापन समझौते को 'सावधानी के साथ उम्मीद' की नज़र से देखता है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और उर्वरक-रसायन क्षेत्र के लिए सकारात्मक बताया।
ब्रिक्स का मूल विज़न क्या है और यह कैसे बदला है?
डोभाल के अनुसार ब्रिक्स की मूल परिकल्पना उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक अनौपचारिक समूह के रूप में थी, जिसका उद्देश्य बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मज़बूत करना था। समूह के विस्तार और बढ़ते भू-राजनीतिक दबाव के साथ अब इसकी भूमिका सुरक्षा सहयोग तक भी विस्तारित हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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