ब्रिक्स NSA बैठक में डोभाल का संदेश: दुनिया की आधी आबादी का यह समूह वैश्विक सुरक्षा में निभाए अहम भूमिका
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ब्रिक्स महज देशों का एक समूह नहीं, बल्कि दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी का साझा मंच है, जिसकी वैश्विक उथल-पुथल और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में 'खास भूमिका' है। उन्होंने सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के समक्ष रेखांकित किया कि जब अंतरराष्ट्रीय संस्थागत ढाँचे कमज़ोर पड़ रहे हैं, तब ब्रिक्स जैसे बहुध्रुवीय मंच की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
बैठक का संदर्भ और भारत की अध्यक्षता
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख शामिल हुए। डोभाल ने उद्घाटन संबोधन में कहा, 'मैं आज आपकी मौजूदगी और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के आपके लगातार प्रतिबद्धता के लिए आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ।' भारत ने इस बैठक के माध्यम से सदस्य देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की अपनी मंशा स्पष्ट की।
वैश्विक संकट और बहुपक्षवाद की गिरावट
डोभाल ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को 'असाधारण रूप से कठिन' बताया। उन्होंने कहा, 'हम बहुत मुश्किल समय में मिल रहे हैं। दुनिया सैन्य झगड़ों और कठिन सुरक्षा समस्याओं से जूझ रही है। यह भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबाव और विघटनकारी प्रौद्योगिकी का सामना कर रही है।' उन्होंने चेताया कि न केवल खतरे जटिल होते जा रहे हैं, बल्कि उनसे निपटने के मौजूदा संस्थागत तंत्र भी 'लगातार अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।'
बहुपक्षीय सहयोग के कमज़ोर होने पर चिंता जताते हुए डोभाल ने कहा, 'बहुपक्षवाद कम हो रहा है' — और यह ठीक ऐसे समय में हो रहा है जब मिलकर काम करने की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे वैश्विक संदर्भ में आई है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत कई बहुपक्षीय मंचों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
ब्रिक्स की आर्थिक और भौगोलिक शक्ति
डोभाल ने ब्रिक्स की व्यापक उपस्थिति के आँकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि यह समूह 1.4 अरब लोगों का घर है — जो विश्व जनसंख्या का लगभग 49 प्रतिशत है। सामूहिक रूप से ब्रिक्स देश वैश्विक संपदा निर्माण में 31.5 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देते हैं और इनकी जीडीपी विश्व अर्थव्यवस्था के 30 प्रतिशत से अधिक के बराबर है। इन देशों का भूभाग 42 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक है। उन्होंने ब्रिक्स को 'शांति, विकास और सहयोग की साझा आकांक्षाओं से जुड़े देशों का एक विशेष गठबंधन' बताया।
गैर-पारंपरिक खतरे और साइबर सुरक्षा
एनएसए डोभाल ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, 'गैर-पारंपरिक खतरों ने देश की सीमाओं को पार कर लिया है और पारंपरिक जवाबों के खिलाफ प्रतिरोध के तंत्र विकसित कर लिए हैं। नई विघटनकारी प्रौद्योगिकी, आतंकवाद के अधिक छिपे हुए रूप, साइबर खतरे — एक ऐसी दुनिया में जो तेज़ी से डिजिटल हो रही है — ये सभी हमारे लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं।' उन्होंने बताया कि बैठक में काउंटर-टेररिज्म और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा पर ब्रिक्स संयुक्त कार्यकारी समूहों के निष्कर्षों पर भी चर्चा होगी।
अमेरिका-ईरान समझौते पर भारत की प्रतिक्रिया
डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच कथित तौर पर हुए ज्ञापन समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इस विकास को 'सावधानी के साथ उम्मीद' की नज़र से देख रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि यह काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना एक बहुत सकारात्मक कदम है। इससे आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएँ दूर होंगी और उर्वरक तथा रसायन क्षेत्र में कई कमियाँ दूर हो जाएँगी।' उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता से आर्थिक समृद्धि में भी सुधार होगा।
आगे की राह
इस बैठक के माध्यम से भारत ने स्पष्ट किया है कि वह ब्रिक्स को एक सक्रिय और प्रभावशाली वैश्विक मंच के रूप में देखता है। डोभाल के अनुसार, ब्रिक्स का मूल विज़न एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय मामलों में ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूत करना था — और आज के संकटग्रस्त वैश्विक माहौल में यह विज़न पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है।