इजरायली हमले की पहली वर्षगांठ पर बाघेई का दावा: 'दुश्मन का सपना शर्मनाक हार में बदला'
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 13 जून 2025 को इजरायल द्वारा अमेरिकी समर्थन से ईरान पर किए गए सैन्य हमले की पहली वर्षगांठ पर कहा कि ईरानी जनता की अटूट इच्छाशक्ति, प्रतिरोध और बलिदान ने हमलावरों के सभी मकसदों को विफल कर दिया। उनके अनुसार, जो शक्तियाँ 'जीत के भ्रम' में आई थीं, उनका सपना अंततः 'शर्मनाक हार' में तब्दील हो गया।
वर्षगांठ पर बाघेई का संदेश
14 जून 2026 को बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रसिद्ध फारसी कवि साएब तबरीजी की काव्य-पंक्तियाँ साझा कीं, जिनमें बलिदान, संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की भावना को रेखांकित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह हमला उस धरती पर किया गया जो 'इतिहास में अपने मजबूत प्रतिरोध और दुश्मनों को परास्त करने के संकल्प के लिए जानी जाती है।' बाघेई ने यह भी कहा कि इन घटनाओं ने ईरान की ताकत, धैर्य और सम्मान के साथ जीने की उसकी इच्छा को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया।
13 जून 2025 का सैन्य संघर्ष: पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने 13 जून 2025 को ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसके दौरान ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों की हत्या की गई। इसके जवाब में ईरान ने भारी हवाई हमले किए। कुछ दिनों के भीतर अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो गया। यह युद्ध 12 दिनों तक चला और अंततः युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ।
नेतन्याहू की परमाणु चेतावनी
इसी बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा कि जब तक वह इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 'पूरी सहमति' है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह 30 से अधिक वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय अभियान में सबसे आगे रहे हैं।
ईरान का रुख और आगे की राह
बाघेई के बयान को ईरानी नेतृत्व की उस व्यापक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें घरेलू स्तर पर प्रतिरोध की भावना को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देना है कि ईरान दबाव में नहीं झुका। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान-इजरायल तनाव और अमेरिका की भूमिका को लेकर कूटनीतिक हलकों में बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से इस तरह के बयान क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बने रहते हैं।