यूएस-ईरान डील पर यूरोपीय देशों की मुहर, ईरान के प्रतिबंध हटाने का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली के शीर्ष नेताओं ने 15 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (एमओयू) का खुलकर स्वागत किया और इसे मध्य-पूर्व में स्थिरता की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता करार दिया। चारों देशों ने एक संयुक्त बयान में स्पष्ट किया कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट और सत्यापन-योग्य कदम उठाता है, तो वे ईरान पर लगे आवश्यक प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार करने के लिए तैयार हैं।
संयुक्त बयान में क्या कहा गया
चारों यूरोपीय नेताओं ने अपने साझा बयान में अमेरिकी और ईरानी सरकारों के साथ-साथ इस प्रक्रिया में मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान, कतर और अन्य सभी पक्षों को बधाई दी। बयान में कहा गया, "हम अमेरिका और ईरान के बीच एमओयू की घोषणा का दिल से स्वागत करते हैं। हम इस कूटनीतिक कामयाबी पर अमेरिकी, ईरानी सरकार और इसमें शामिल सभी लोगों को बधाई देते हैं, जिनमें पाकिस्तान, कतर और सभी दूसरे मध्यस्थ शामिल हैं।"
नेताओं ने इस डील को क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को संबल देने के एक ऐतिहासिक अवसर के रूप में रेखांकित किया। साथ ही विस्तृत वार्ता को बिना देरी के पूरा करने और समझौते को तत्काल व पूर्ण रूप से लागू करने पर बल दिया।
होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल खोलने की माँग
चारों देशों ने खाड़ी में समुद्री सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई और होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शर्त के तत्काल पुनः खोलने की माँग की। बयान में कहा गया, "होर्मुज स्ट्रेट को बिना शर्त और बिना रोक-टोक के नेविगेशन की आज़ादी के साथ तुरंत फिर से खोलना ज़रूरी है।"
नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे वाणिज्यिक शिपिंग को सुरक्षा का भरोसा दिलाने और समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए पूरी तरह रक्षात्मक एवं स्वतंत्र नौसैनिक मिशन संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर होर्मुज की नाकेबंदी का गहरा असर पड़ रहा था।
परमाणु कार्यक्रम पर यूरोप का रुख
यूरोपीय नेताओं ने अपनी पुरानी स्थिति दोहराई कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने दिए जाएँगे। उन्होंने इस लक्ष्य को सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। गौरतलब है कि 2015 के जेसीपीओए (Joint Comprehensive Plan of Action) के टूटने के बाद से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों और तेहरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ था।
बयान में यह भी कहा गया कि यदि तेहरान सत्यापन-योग्य और स्पष्ट कदम उठाता है, तो यूरोपीय देश प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार करने को तैयार हैं — हालाँकि इसकी शर्तें और समयसीमा अभी तय नहीं की गई हैं।
लेबनान और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
संयुक्त बयान में यूरोपीय नेताओं ने लेबनान की संप्रभुता, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूर्ण समर्थन दोहराया और वहाँ एक मजबूत युद्धविराम की अनिवार्यता पर बल दिया। नेताओं ने अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक दीर्घकालिक कूटनीतिक समझौते की दिशा में काम करने का वादा किया।
आगे क्या होगा
विस्तृत वार्ता की रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह डील मध्य-पूर्व में एक नए शक्ति-संतुलन की शुरुआत हो सकती है — बशर्ते कार्यान्वयन पारदर्शी और समयबद्ध हो।