एफसीआरए संशोधन पर विदेश मंत्रालय का कड़ा जवाब: 'विधायी मामले भारत का आंतरिक विषय'
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 7 अगस्त 2025 को स्पष्ट किया कि फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित संशोधनों पर अंतरराष्ट्रीय टिप्पणियाँ — जिनमें एक अमेरिकी सांसद की भी शामिल हैं — भारत को स्वीकार्य नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, देश के विधायी निर्णय पूरी तरह भारतीय संसद का विशेषाधिकार हैं और इन पर बाहरी दखलंदाज़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
नई दिल्ली में आयोजित MEA की नियमित मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवाल के जवाब में कहा, 'हमने इन टिप्पणियों को देखा है। भारत से जुड़े विधायी मामले हमारे आंतरिक विषय हैं, जिन पर निर्णय हमारे देश की संसद की ओर से लिए जाते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि अमेरिका सहित कई देश विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।'
हाल ही में अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारत में विदेशी चंदे और दान से जुड़े कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह प्रतिक्रिया सामने आई। केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में FCRA संशोधन विधेयक पेश कर सकती है।
एफसीआरए क्या है और इसका उद्देश्य
FCRA वह कानून है जो यह तय करता है कि भारत के व्यक्ति, संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएँ (NGO), ट्रस्ट और कंपनियाँ विदेशों से मिलने वाले धन, प्रतिभूतियों या अन्य वस्तुओं को किस तरह प्राप्त और उपयोग कर सकती हैं। इसका संचालन गृह मंत्रालय करता है।
यह कानून तीन मुख्य कार्य करता है: यह निर्धारित करता है कि कौन विदेशी योगदान स्वीकार कर सकता है और किन शर्तों पर; यह तय करता है कि उस धनराशि का हिसाब-किताब और रिपोर्टिंग कैसे हो; और यह उन सीमित गतिविधियों पर रोक लगाता है जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। सरकार के 22 जुलाई के आधिकारिक बयान के अनुसार, डिजिटल लेनदेन और सीमा-पार फंडिंग के तेजी से बढ़ने से वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं।
वैश्विक संदर्भ: भारत अकेला नहीं
सरकार ने तर्क दिया है कि FCRA दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में मौजूद इसी तरह के कानूनी ढाँचों के अनुरूप है। कनाडा ने वर्ष 2024 में फॉरेन इन्फ्लुएंस ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी एक्ट लागू किया। अमेरिका ने 2025 में 87 वर्ष पुरानी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) को अधिक सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। यूनाइटेड किंगडम की फॉरेन इन्फ्लुएंस रजिस्ट्रेशन स्कीम 1 जुलाई 2025 से लागू हुई।
गौरतलब है कि यूरोपीय संघ के एक यूरोबैरोमीटर सर्वेक्षण में 81 प्रतिशत यूरोपीय नागरिकों ने गुप्त विदेशी हस्तक्षेप को गंभीर समस्या बताया था। भारत इस प्रकार का ढाँचा 1976 से बनाए हुए है — यानी कई पश्चिमी देशों से पहले।
सरकार का पक्ष
सरकार का स्पष्ट कहना है कि FCRA वैध और वास्तविक सामाजिक या परोपकारी गतिविधियों को रोकने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा कानूनी ढाँचा उपलब्ध कराना है जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रह सके और विदेशी योगदान भारतीय कानूनों के अनुसार प्राप्त, उपयोग और दर्ज किए जा सकें। सरकार के मुताबिक, 'दुनिया की लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ अब यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि यदि विदेशी धन, निर्देश या संस्थागत संबंध घरेलू सार्वजनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं, तो उनमें पारदर्शिता हो।'
विदेश सचिव की श्रीलंका यात्रा
ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विदेश सचिव की श्रीलंका यात्रा पर भी जानकारी दी। इस यात्रा में विकास सहयोग, मछुआरों से जुड़े मुद्दे, विभिन्न विकास परियोजनाएँ और चक्रवात 'दितवाह' के बाद शुरू किए गए नए कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। विदेश सचिव ने श्रीलंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और अपने समकक्ष श्रीलंकाई विदेश सचिव से मुलाकात की।
आने वाले दिनों में FCRA संशोधन विधेयक के संसद में पेश होने के बाद यह देखना अहम होगा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है और सरकार इस कानून के क्रियान्वयन को किस रूप में परिभाषित करती है।