फ्रांस ने होर्मुज स्ट्रेट से वापस बुलाया चार्ल्स डी गॉल, अमेरिका-ईरान MOU के बाद बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 4 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर घोषणा की कि फ्रांस का विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल मध्य पूर्व से अपने घरेलू बंदरगाह टूलॉन की ओर वापस लौट रहा है। यह निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के बाद क्षेत्रीय स्थिति में आए बदलाव के मद्देनज़र लिया गया है। फिलहाल यह पोत भूमध्य सागर में स्थित बताया जा रहा है।
मिशन की पृष्ठभूमि
फ्रांस और ब्रिटेन ने अप्रैल 2026 के मध्य में संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि वे होर्मुज स्ट्रेट में एक बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एस्कॉर्ट मिशन का नेतृत्व करेंगे। इसी तैयारी के तहत मई 2026 में चार्ल्स डी गॉल को मध्य पूर्व भेजा गया था, ताकि संघर्ष विराम के बाद मिशन को औपचारिक रूप से शुरू किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट — जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता है — पर भू-राजनीतिक तनाव चरम पर था।
मैक्रों का रुख और सीमित उपस्थिति
मैक्रों ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि अमेरिका-ईरान MOU से क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, इसीलिए फ्रांस ने अपनी सैन्य मौजूदगी में बदलाव का फैसला किया। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस के बारूदी सुरंग हटाने वाले संसाधन और उनका सुरक्षा बेड़ा क्षेत्र में तैनात रहेंगे और सहयोगी देशों के साथ आवश्यकता पड़ने पर अभियान चलाने के लिए तैयार रहेंगे। गौरतलब है कि 15 जून को ही मैक्रों ने कहा था कि अनुकूल हालात में चार्ल्स डी गॉल दो से तीन दिनों में होर्मुज पहुँचकर मिशन में शामिल हो सकता है।
ट्रंप का बयान और परमाणु वार्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर चल रही बातचीत में "लगभग उन सभी बातों पर सहमत हो गया है, जिनकी अमेरिका को ज़रूरत थी।" CNBC को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, "बातचीत जारी है और आगे क्या होता है, यह देखा जाएगा। लेकिन मेरा मानना है कि वे हमारी लगभग सभी प्रमुख शर्तों पर सहमत हो चुके हैं।" उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य तेहरान में शासन परिवर्तन नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमज़ोर हुई है।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
फ्रांस का यह कदम संकेत देता है कि पश्चिमी देश अमेरिका-ईरान MOU को पर्याप्त रूप से विश्वसनीय मानते हैं। होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा से जुड़े किसी भी घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाज़ारों पर पड़ता है। आलोचकों का कहना है कि जब तक ईरान के साथ कोई बाध्यकारी समझौता नहीं होता, तब तक सैन्य उपस्थिति में कटौती जोखिम भरी हो सकती है।
आगे क्या होगा
परमाणु वार्ता की अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं है। फ्रांस के बारूदी सुरंग हटाने वाले दस्ते और सुरक्षा बेड़े की क्षेत्र में मौजूदगी यह दर्शाती है कि पेरिस स्थिति पर नज़र बनाए रखना चाहता है। यदि वार्ता विफल हुई, तो चार्ल्स डी गॉल की वापसी को पलटना भी संभव है।