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52वीं जी7 बैठक एवियन में: क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व पर होगी अहम चर्चा

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52वीं जी7 बैठक एवियन में: क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व पर होगी अहम चर्चा

सारांश

फ्रांस के एवियन में 52वीं जी7 बैठक महज एक औपचारिक सम्मेलन नहीं — यह वैश्विक तनाव के बीच कूटनीति की परीक्षा है। क्रिटिकल मिनरल्स का सामूहिक भंडार, ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिति एजेंडे में हैं। PM मोदी की उपस्थिति भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

52वीं जी7 बैठक 15 से 17 जून 2025 तक फ्रांस के एवियन में आयोजित हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारत , ब्राजील , मिस्र , केन्या , दक्षिण कोरिया और कतर को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स का सामूहिक भंडार बनाने पर जापान के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीतिक स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं।
जी7 रिसर्च ग्रुप के विश्लेषक बहराम हाथी के अनुसार, बैठक का मुख्य लक्ष्य नई घोषणाओं से ज्यादा कूटनीतिक समाधान तय करना है।

52वीं जी7 शिखर बैठक 15 जून से 17 जून 2025 के बीच फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित हो रही है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भाग ले रहे हैं। जी7 रिसर्च ग्रुप के प्रमुख विश्लेषक बहराम हाथी के अनुसार, वैश्विक तनाव के मौजूदा माहौल में यह बैठक असाधारण कूटनीतिक महत्व रखती है।

बैठक का एजेंडा और प्रमुख विषय

विश्लेषक बहराम हाथी ने स्पष्ट किया कि इस शिखर सम्मेलन में उठाए जाने वाले अधिकांश मुद्दे नए नहीं हैं, बल्कि पहले से जारी वैश्विक बहस को आगे बढ़ाने का प्रयास होगा। क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और सामूहिक भंडारण व्यवस्था प्रमुख एजेंडे में शामिल है। उन्होंने बताया कि जापान की ओर से हाल ही में एक प्रस्ताव सामने आया था, जिसमें जी7 देशों को इन संसाधनों का साझा भंडार बनाने की सिफारिश की गई थी।

भारत और मध्य पूर्व की भूमिका

इस बार फ्रांस ने भारत के अलावा ब्राजील, मिस्र, केन्या, दक्षिण कोरिया और कतर को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। बहराम हाथी के अनुसार, मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीतिक स्थिति भी बैठक का एक केंद्रीय विषय होगी। इस चर्चा में डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना बताई जा रही है।

कूटनीतिक समाधान पर जोर

विश्लेषक के अनुसार, इस सम्मेलन का मुख्य ध्यान नई घोषणाओं की बजाय शांति और कूटनीतिक समाधान पर रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे समय में जब कई क्षेत्रों में तनाव की स्थिति बनी हुई है, यह बैठक कुछ सकारात्मक परिणाम दे सकती है। उन्होंने कहा, "जी7 नेताओं के बीच होने वाली चर्चाएं केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इसमें अन्य देशों की भागीदारी भी देखने को मिलेगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य पूर्व के कुछ देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होंगे, जो वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।"

ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती पर भी विस्तृत विमर्श होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश चीन पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक खनिज आपूर्ति मार्ग तलाश रहे हैं। गौरतलब है कि जी7 के सात स्थायी सदस्य — अमेरिका, यूके, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान — मिलकर वैश्विक GDP का एक बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं।

आगे क्या

बैठक 17 जून 2025 को समाप्त होगी, जिसके बाद एक संयुक्त घोषणापत्र जारी होने की संभावना है। विश्लेषकों की नजर इस बात पर होगी कि क्रिटिकल मिनरल्स पर जापान के प्रस्ताव को औपचारिक समर्थन मिलता है या नहीं, और मध्य पूर्व पर कोई ठोस कूटनीतिक रूपरेखा उभरती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि सात देश इस पर बाध्यकारी प्रतिबद्धता दे पाते हैं या नहीं — क्योंकि पिछले सम्मेलनों में ऐसे प्रस्ताव अक्सर घोषणापत्र की भाषा तक सिमट कर रह जाते हैं। भारत की उपस्थिति रणनीतिक है, पर यह देखना होगा कि मोदी एवियन से कोई ठोस द्विपक्षीय या बहुपक्षीय उपलब्धि लेकर लौटते हैं या नहीं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

52वीं जी7 बैठक कहाँ और कब हो रही है?
52वीं जी7 बैठक 15 जून से 17 जून 2025 के बीच फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित हो रही है। इसमें जी7 के सात स्थायी सदस्य देशों — अमेरिका, यूके, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान — के नेता भाग ले रहे हैं।
जी7 बैठक में भारत की क्या भूमिका है?
फ्रांस ने इस बार भारत को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में भाग लेंगे, जो वैश्विक भू-राजनीतिक विमर्श में भारत की बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है।
जी7 बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स पर क्या चर्चा होगी?
बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और सामूहिक भंडारण व्यवस्था पर चर्चा होगी। जापान ने हाल ही में एक प्रस्ताव रखा है जिसमें जी7 देशों को इन संसाधनों का साझा भंडार बनाने की सिफारिश की गई है।
इस जी7 बैठक में मध्य पूर्व का मुद्दा क्यों अहम है?
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) की भू-राजनीतिक स्थिति बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। विश्लेषक बहराम हाथी के अनुसार, इस चर्चा में डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना है।
जी7 बैठक से क्या परिणाम की उम्मीद है?
विश्लेषक बहराम हाथी के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य नई घोषणाओं से ज्यादा मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करना है। 17 जून को बैठक समाप्त होने के बाद एक संयुक्त घोषणापत्र जारी होने की संभावना है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिरता पर प्रतिबद्धताएं शामिल हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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