10 अगस्त 2026
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जी7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने विश्व नेताओं को दिए नागौरी अश्वगंधा, रंबन शहद और बनारसी सिल्क के उपहार

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जी7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने विश्व नेताओं को दिए नागौरी अश्वगंधा, रंबन शहद और बनारसी सिल्क के उपहार

सारांश

जी7 मंच पर PM मोदी के उपहार महज शिष्टाचार नहीं थे — वे भारत की 'लोकल फॉर ग्लोबल' कूटनीति का व्यावहारिक प्रदर्शन थे। नागौरी अश्वगंधा, रंबन शहद और बनारसी सिल्क — तीनों जीआई-प्रमाणित उत्पाद — ग्रामीण शिल्पकारों और किसानों की आजीविका को वैश्विक मंच पर रखते हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े तीन विशेष उपहार भेंट किए।
नागौरी अश्वगंधा ( राजस्थान , जीआई टैग प्राप्त) को आयुर्वेद में 'रसायन' औषधि माना जाता है; उच्च विथेनोलाइड सांद्रता के लिए विख्यात।
रंबन हनी ( जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी) हिमालयी वनस्पतियों से तैयार, प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर।
बनारसी सिल्क स्टोल ( वाराणसी , जीआई टैग प्राप्त) हस्तकरघा बुनकर समुदाय की सदियों पुरानी कलात्मक परंपरा का प्रतीक।
तीनों उपहार भारत की 'लोकल फॉर ग्लोबल' नीति और जीआई उत्पादों के वैश्विक प्रचार की दिशा में एक कूटनीतिक कदम हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व के शीर्ष नेताओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय शिल्पकला का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों में राजस्थान की नागौरी अश्वगंधा, जम्मू-कश्मीर की रंबन शहद और वाराणसी का बनारसी सिल्क स्टोल शामिल थे — तीनों उत्पाद भारत की 'लोकल फॉर ग्लोबल' नीति के जीवंत प्रतीक हैं।

नागौरी अश्वगंधा: आयुर्वेद की वैश्विक पहचान

राजस्थान के नागौर जिले की शुष्क जलवायु और रेतीली मिट्टी में उगाई जाने वाली नागौरी अश्वगंधा अपनी उच्च गुणवत्ता और अधिक विथेनोलाइड सांद्रता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। इस औषधीय जड़ी-बूटी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है, जो इसकी क्षेत्रीय विशिष्टता को प्रमाणित करता है।

आयुर्वेद में इसे 'रसायन' औषधि की श्रेणी में रखा जाता है, जो शरीर की ऊर्जा, मानसिक क्षमता, रोग प्रतिरोधक शक्ति और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है। यह उत्पाद ग्रामीण आजीविका को मजबूती देने के साथ-साथ पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक शोध से जोड़ने का प्रतीक भी है।

रंबन शहद: हिमालय की जैव विविधता का सार

जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में तैयार होने वाली रंबन हनी अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता और विशिष्ट स्वाद के लिए विख्यात है। हिमालयी वनस्पतियों और जंगली फूलों के रस से तैयार इस शहद में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, एंजाइम और कई जैव-सक्रिय तत्व पाए जाते हैं।

स्थानीय मधुमक्खी पालकों द्वारा पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल विधियों से तैयार यह शहद क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली का जीवंत उदाहरण है। यह उपहार भारत के उत्तरी सीमांत क्षेत्र की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक मंच पर रेखांकित करता है।

बनारसी सिल्क स्टोल: भारतीय हस्तकरघा की श्रेष्ठता

वाराणसी में हाथों से बुना गया बनारसी सिल्क स्टोल भारतीय वस्त्र परंपरा का उत्कृष्ट नमूना है। महीन रेशम और जरी की बारीक कारीगरी से सजे इस स्टोल पर प्रकृति से प्रेरित आकर्षक डिज़ाइन उकेरे जाते हैं।

जीआई टैग प्राप्त बनारसी सिल्क भारत की सबसे प्रतिष्ठित हस्तकरघा परंपराओं में से एक है। यह न केवल बुनकर समुदाय की आजीविका का आधार है, बल्कि सदियों पुरानी भारतीय कलात्मक विरासत और शिल्प कौशल का भी प्रतिनिधित्व करता है।

उपहारों का संदेश: 'लोकल फॉर ग्लोबल'

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पारंपरिक उत्पादों और हस्तशिल्प को वैश्विक बाज़ार में स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जीआई टैग उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है।

तीनों उपहार — नागौरी अश्वगंधा, रंबन हनी और बनारसी सिल्क स्टोल — जीआई-प्रमाणित या पारंपरिक पहचान वाले उत्पाद हैं, जो भारत की जैव विविधता, आयुर्वेदिक ज्ञान और हस्तशिल्प कौशल को एक साथ प्रदर्शित करते हैं। आने वाले समय में यह कूटनीतिक पहल इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय माँग और निर्यात को नई गति दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और तीनों उन क्षेत्रों से आते हैं जहाँ ग्रामीण आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण की राजनीतिक अहमियत है। यह 'सॉफ्ट पावर कूटनीति' का एक सुविचारित रूप है, जो व्यापार संदेश को सांस्कृतिक आख्यान में लपेटता है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या इस वैश्विक प्रदर्शन के बाद इन उत्पादों के निर्यात और उत्पादकों की आय में मापनीय वृद्धि होती है — या यह केवल एक प्रतीकात्मक कदम बनकर रह जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने विश्व नेताओं को कौन से उपहार दिए?
PM मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन में तीन विशेष भारतीय उपहार भेंट किए — राजस्थान की नागौरी अश्वगंधा, जम्मू-कश्मीर की रंबन शहद और वाराणसी का बनारसी सिल्क स्टोल। तीनों उत्पाद भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला के प्रतीक हैं।
नागौरी अश्वगंधा क्या है और यह खास क्यों है?
नागौरी अश्वगंधा राजस्थान के नागौर जिले में उगाई जाने वाली एक औषधीय जड़ी-बूटी है, जो अपनी उच्च विथेनोलाइड सांद्रता और जीआई टैग के लिए जानी जाती है। आयुर्वेद में इसे 'रसायन' श्रेणी में रखा जाता है, जो शरीर की ऊर्जा, प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है।
रंबन शहद कहाँ से आती है और इसकी विशेषता क्या है?
रंबन शहद जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में स्थानीय मधुमक्खी पालकों द्वारा पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से तैयार की जाती है। हिमालयी वनस्पतियों और जंगली फूलों के रस से बनी यह शहद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और जैव-सक्रिय तत्वों से भरपूर होती है।
बनारसी सिल्क स्टोल को जीआई टैग क्यों मिला है?
बनारसी सिल्क स्टोल वाराणसी के बुनकरों द्वारा महीन रेशम और जरी से हाथ से बुना जाता है, जो सदियों पुरानी हस्तकरघा परंपरा का हिस्सा है। इसकी अनूठी कारीगरी और भौगोलिक उत्पत्ति को मान्यता देते हुए इसे जीआई टैग प्रदान किया गया है।
इन उपहारों से भारत की 'लोकल फॉर ग्लोबल' नीति कैसे जुड़ी है?
तीनों उपहार जीआई-प्रमाणित या पारंपरिक पहचान वाले भारतीय उत्पाद हैं, जो ग्रामीण किसानों, मधुमक्खी पालकों और बुनकरों की आजीविका से सीधे जुड़े हैं। वैश्विक नेताओं को ये उपहार देकर भारत अपने स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और निर्यात को बढ़ावा देने का संदेश देता है।
राष्ट्र प्रेस
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