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PM मोदी ने स्लोवाकिया नेताओं को भेंट किए थेवा कफलिंक, कश्मीरी कारपेट व आयुर्वेदिक ग्रंथ

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PM मोदी ने स्लोवाकिया नेताओं को भेंट किए थेवा कफलिंक, कश्मीरी कारपेट व आयुर्वेदिक ग्रंथ

सारांश

PM मोदी ने स्लोवाकिया के शीर्ष नेताओं को थेवा कफलिंक, हिमरू टाई, डोकरा एंटीलोप, कश्मीरी सिल्क कारपेट और प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ भेंट किए — भारत की शिल्प विरासत और सॉफ्ट पावर कूटनीति का सशक्त प्रदर्शन, स्वतंत्र स्लोवाकिया में किसी भारतीय PM की पहली यात्रा पर।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी स्वतंत्र स्लोवाकिया का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने; उन्हें वहाँ का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया।
स्पीकर रिचर्ड रासी को सुश्रुत संहिता और चरक संहिता — भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ — भेंट किए गए।
राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को थेवा मोटिफ कफलिंक (प्रतापगढ़, राजस्थान), हिमरू सिल्क टाई (औरंगाबाद) और पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट भेंट किए गए।
PM रॉबर्ट फिको को कश्मीरी सिल्क कारपेट (श्रीनगर) उपहार में दिया गया।
सभी उपहार जीआई टैग प्राप्त या ओडीओपी पहल से जुड़ी भारतीय शिल्प-परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्लोवाकिया दौरे के दौरान वहाँ के शीर्ष नेताओं को भारत की समृद्ध शिल्प और बौद्धिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले विशेष उपहार भेंट किए। स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद यह देश का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने, और इस ऐतिहासिक यात्रा में उन्हें स्लोवाकिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाज़ा गया। यह दौरा फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन में भागीदारी के बाद हुआ।

स्पीकर को मिले प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ

प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के स्पीकर रिचर्ड रासी को सुश्रुत संहिता और चरक संहिता भेंट कीं। सुश्रुत संहिता को आचार्य सुश्रुत द्वारा रचित माना जाता है और इसे शल्य-चिकित्सा पर विश्व के सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण ग्रंथों में गिना जाता है। इसमें उन्नत शल्य तकनीक, शारीरिक संरचना, चिकित्सा उपकरण और राइनोप्लास्टी जैसी पुनर्निर्माण प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण है।

यह ग्रंथ केवल शल्य-चिकित्सा तक सीमित नहीं है — इसमें आंतरिक चिकित्सा, विषविज्ञान, बाल रोग, पोषण और निवारक स्वास्थ्य का भी समग्र विवेचन है, जो भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उन्नति का प्रमाण है।

चरक संहिता, जिसका श्रेय आचार्य चरक को जाता है, आयुर्वेद का एक मूलभूत ग्रंथ है। लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व विकसित अवलोकन और तर्क पर आधारित यह रचना मानव शरीर क्रिया-विज्ञान, रोग और स्वास्थ्य की व्यवस्थित समझ प्रस्तुत करती है। यह ग्रंथ भारत की बौद्धिक एवं वैज्ञानिक विरासत का प्रतीक है और विश्वभर के विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ-स्रोत बना हुआ है।

राष्ट्रपति को मिले थेवा कफलिंक, हिमरू टाई और डोकरा कलाकृति

स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को तीन विशिष्ट भारतीय शिल्प-उपहार भेंट किए गए। पहला उपहार था हाथ से बने थेवा मोटिफ कफलिंकराजस्थान के प्रतापगढ़ की यह दुर्लभ आभूषण-कला रंगीन काँच पर बारीक नक्काशीदार सोने की पत्ती से तैयार की जाती है। प्रकृति और प्रतीकों से प्रेरित इस जटिल कला को जीआई टैग प्राप्त है और यह ओडीओपी (One District One Product) पहल में भी शामिल है।

दूसरा उपहार था हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर सेट, जो औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) की पारंपरिक बुनाई का नमूना है। सिल्क-कॉटन के मिश्रण से बना हिमरू अपनी रिवर्सिबल बुनाई, मुलायम बनावट और बारीक फूलों व पैजली पैटर्न के लिए प्रसिद्ध है। डेक्कन दरबार के संरक्षण में पनपी यह कला भी जीआई टैग और ओडीओपी से सम्मानित है।

तीसरा उपहार था पीतल का डोकरा एंटीलोप सेटछत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगरों की सदियों पुरानी लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग तकनीक से निर्मित। हिरण की ये मूर्तियाँ कोमलता और प्रकृति के साथ सामंजस्य की प्रतीक हैं, और स्लोवाकिया के टाट्रा चामोइस से एक सांस्कृतिक सेतु भी बनाती हैं।

प्रधानमंत्री फिको को मिला कश्मीरी सिल्क कारपेट

स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी सिल्क कारपेट भेंट किया। कश्मीर घाटी, विशेषकर श्रीनगर क्षेत्र में बुने जाने वाले ये कारपेट उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक सिल्क से हाथ से तैयार किए जाते हैं। इनमें बारीक फूलों, पैस्ले, बेल और मेडलियन डिजाइन उकेरे जाते हैं।

कुशल कारीगरों द्वारा एक-एक कारपेट को पूरा करने में महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लगता है, क्योंकि इसमें गाँठों की सघनता और बुनाई की बारीकी असाधारण होती है। सौंदर्य, टिकाऊपन और कलात्मक उत्कृष्टता का यह संगम कश्मीरी सिल्क कारपेट को विश्वभर में एक प्रतिष्ठित कला-वस्तु बनाता है।

कूटनीतिक महत्व

यह उपहार-चयन केवल शिष्टाचार नहीं था — प्रत्येक वस्तु भारत के किसी विशिष्ट क्षेत्र की जीवंत शिल्प-परंपरा और बौद्धिक इतिहास का प्रतिनिधित्व करती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को वैश्विक मंच पर और सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रहा है। इस दौरे से भारत-स्लोवाकिया द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'वोकल फॉर लोकल' को वैश्विक कूटनीति के मंच पर ले जाने का प्रयास है। यह महज़ शिष्टाचार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक ब्रांडिंग है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि जब तक इन शिल्पों के कारीगरों की आजीविका और बाज़ार-पहुँच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक ऐसे प्रदर्शन प्रतीकात्मक ही रहते हैं। स्लोवाकिया जैसे मध्य-यूरोपीय देश के साथ संबंध-निर्माण भारत की विस्तारित यूरोपीय कूटनीति का हिस्सा है, जो NATO और EU के भीतर विविध साझेदारियाँ बनाने की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को क्या उपहार दिए?
PM मोदी ने राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को हाथ से बने थेवा मोटिफ कफलिंक, हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर सेट, तथा पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट भेंट किए। ये तीनों वस्तुएँ भारत के विभिन्न राज्यों की जीआई-संरक्षित शिल्प-परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
थेवा कला क्या है और यह कहाँ से आती है?
थेवा राजस्थान के प्रतापगढ़ की एक दुर्लभ आभूषण-कला है, जिसमें रंगीन काँच पर बारीक नक्काशीदार सोने की पत्ती जड़ी जाती है। यह कला जीआई टैग प्राप्त है और ओडीओपी पहल में शामिल है; इसे पीढ़ियों से कारीगर परिवार संजोते आ रहे हैं।
PM मोदी ने स्लोवाकिया के स्पीकर को कौन-से ग्रंथ भेंट किए?
स्पीकर रिचर्ड रासी को सुश्रुत संहिता और चरक संहिता भेंट की गईं। सुश्रुत संहिता शल्य-चिकित्सा पर विश्व के प्राचीनतम ग्रंथों में से एक है, जबकि चरक संहिता आयुर्वेद का मूलभूत ग्रंथ है जो लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व रचा गया।
PM मोदी का स्लोवाकिया दौरा ऐतिहासिक क्यों है?
PM मोदी स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद उस देश का दौरा करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। इस दौरे में उन्हें स्लोवाकिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी प्रदान किया गया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक है।
PM फिको को भेंट किया गया कश्मीरी सिल्क कारपेट क्या विशेषता रखता है?
कश्मीरी सिल्क कारपेट श्रीनगर क्षेत्र का प्रसिद्ध हस्तशिल्प है, जो उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक सिल्क से हाथ से बुना जाता है। एक कारपेट को पूरा करने में महीनों से वर्षों का समय लगता है और इसमें बारीक फूलों, पैस्ले व मेडलियन डिजाइन उकेरे जाते हैं।
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