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जी7 समिट में मोदी का 'रामबन शहद' गिफ्ट: चिनाब घाटी के 800 मधुमक्खी पालकों को मिली वैश्विक पहचान

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जी7 समिट में मोदी का 'रामबन शहद' गिफ्ट: चिनाब घाटी के 800 मधुमक्खी पालकों को मिली वैश्विक पहचान

सारांश

जी7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने विश्व नेताओं को जम्मू-कश्मीर की 'रामबन हनी' उपहार में दी — एक ऐसा कदम जिसने चिनाब घाटी के 800 मधुमक्खी पालकों की पीढ़ियों पुरानी मेहनत को अंतरराष्ट्रीय मंच दिला दिया और ODOP उत्पाद के निर्यात की उम्मीदें जगा दीं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं को रामबन हनी उपहार स्वरूप भेंट की।
रामबन हनी जम्मू-कश्मीर के बनिहाल क्षेत्र में उत्पादित होती है और इसे 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' का दर्जा प्राप्त है।
इस व्यवसाय से लगभग 800 मधुमक्खी पालक और किसान जुड़े हुए हैं।
शहद पीर पंजाल, राजगढ़, गुल और जवाहर सुरंग क्षेत्र की दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों से तैयार होती है।
कृषि अधिकारी अयाज अहमद ऋषि के अनुसार, वैश्विक पहचान से स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं को उपहार स्वरूप जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले की प्रसिद्ध 'रामबन हनी' भेंट की, जिससे चिनाब घाटी के इस विशिष्ट उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है। इस कदम से बनिहाल क्षेत्र के लगभग 800 मधुमक्खी पालकों और किसानों में उत्साह की लहर दौड़ गई है, जो पीढ़ियों से इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हैं।

रामबन हनी की विशेषता

रामबन हनी मुख्य रूप से बनिहाल क्षेत्र में उत्पादित होती है और अपनी प्राकृतिक शुद्धता, विशिष्ट स्वाद एवं उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है। यह शहद राजगढ़, गुल, पीर पंजाल और जवाहर सुरंग के आसपास पाई जाने वाली दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों और जंगली फूलों के रस से तैयार होती है। इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट, एंजाइम और जैव-सक्रिय तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी बनाते हैं।

गौरतलब है कि इस उत्पाद को 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ODOP) का दर्जा प्राप्त है, जो इसे क्षेत्रीय पहचान और सरकारी प्रोत्साहन दोनों दिलाता है। स्थानीय स्तर पर पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों से तैयार यह शहद सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है।

स्थानीय मधुमक्खी पालकों की प्रतिक्रिया

मधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुड़े कासिम मोहम्मद ने कहा कि यह कारोबार उनके परिवार की कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। उन्होंने बताया, 'पहले यह काम मेरे पिता करते थे और अब मैं इसे आगे बढ़ा रहा हूँ। आज जब जी7 सम्मेलन में विदेशी नेताओं को यह शहद उपहार में दिया गया है तो हम बेहद खुश हैं। हमें विश्वास है कि अब हमारे अच्छे दिन आने वाले हैं।'

कासिम मोहम्मद ने यह भी बताया कि इस कारोबार से लगभग 800 लोग जुड़े हुए हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने उनके उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने का काम किया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री और संबंधित सरकारी विभागों का आभार व्यक्त किया।

कृषि विभाग की उम्मीदें

कृषि अधिकारी अयाज अहमद ऋषि ने भी इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जी7 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं को रामबन हनी भेंट किए जाने से इसकी मार्केटिंग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से माँग बढ़ेगी और स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

ऋषि ने विश्वास जताया कि वैश्विक मंच पर मिली यह पहचान स्थानीय मधुमक्खी पालन उद्योग को नई दिशा देगी और आने वाले समय में रामबन हनी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख प्राकृतिक उत्पादों में अपनी जगह बनाएगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। ODOP योजना के तहत रामबन हनी को पहले से ही प्रोत्साहन मिल रहा है, और जी7 मंच पर मिली इस पहचान के बाद निर्यात की संभावनाएँ और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 'वोकल फॉर लोकल' और ODOP योजना का जीवंत प्रदर्शन है। हालाँकि, असली परीक्षा यह है कि क्या यह अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन ज़मीनी स्तर पर निर्यात अनुबंधों और बेहतर मूल्य निर्धारण में बदल पाता है। पिछले अनुभव बताते हैं कि वैश्विक मंचों पर मिली पहचान हमेशा छोटे उत्पादकों तक नहीं पहुँचती। 800 मधुमक्खी पालकों की उम्मीदें तब पूरी होंगी, जब सरकार निर्यात लिंकेज, गुणवत्ता प्रमाणन और बाज़ार पहुँच के लिए ठोस तंत्र बनाए — सिर्फ सुर्खियों से काम नहीं चलेगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामबन हनी क्या है और यह क्यों खास है?
रामबन हनी जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के बनिहाल क्षेत्र में उत्पादित एक विशेष शहद है, जो पीर पंजाल, राजगढ़ और जवाहर सुरंग के आसपास की दुर्लभ हिमालयी वनस्पतियों से तैयार होती है। यह प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और जैव-सक्रिय तत्वों से भरपूर होती है और इसे 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' का दर्जा प्राप्त है।
PM मोदी ने जी7 समिट में रामबन हनी क्यों भेंट की?
प्रधानमंत्री मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं को रामबन हनी उपहार स्वरूप भेंट कर इस स्थानीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। यह केंद्र सरकार की 'वोकल फॉर लोकल' और ODOP नीति के तहत स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
रामबन हनी के उत्पादन से कितने लोग जुड़े हैं?
रामबन हनी के उत्पादन और व्यवसाय से लगभग 800 मधुमक्खी पालक और किसान जुड़े हुए हैं। यह कारोबार कई परिवारों में पीढ़ियों से चला आ रहा है और उनकी आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
जी7 में मिली पहचान से रामबन के किसानों को क्या फायदा होगा?
कृषि अधिकारी अयाज अहमद ऋषि के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से रामबन हनी की माँग बढ़ेगी और स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे मधुमक्खी पालन उद्योग को नई दिशा मिलने और निर्यात की संभावनाएँ बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' योजना में रामबन हनी की क्या भूमिका है?
रामबन हनी को केंद्र सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना के तहत रामबन जिले के प्रतिनिधि उत्पाद का दर्जा दिया गया है। इस दर्जे से उत्पाद को सरकारी प्रोत्साहन, ब्रांडिंग समर्थन और बाज़ार विस्तार में मदद मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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