27 जून 2026
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सोनिया गांधी का गाजा पर लेख और बांग्लादेश पर चुप्पी — विश्लेषकों ने उठाया 'सेलेक्टिव आउटरेज' का सवाल

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सोनिया गांधी का गाजा पर लेख और बांग्लादेश पर चुप्पी — विश्लेषकों ने उठाया 'सेलेक्टिव आउटरेज' का सवाल

सारांश

सोनिया गांधी ने गाजा पर लेख लिखा, मोदी सरकार को घेरा — लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुई हिंसा पर कोई शब्द नहीं। दो साल में सात लेखों में तीन गाजा-ईरान पर, शून्य बांग्लादेश पर। विश्लेषकों ने इसे 'सेलेक्टिव आउटरेज' और वोट बैंक की राजनीति करार दिया।

मुख्य बातें

सोनिया गांधी ने अपने लेख में संयुक्त राष्ट्र की जून 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए गाजा में 20,000 बच्चों की मौत और 44,000 के घायल होने का उल्लेख किया।
उनके अनुसार गाजा के 97 प्रतिशत स्कूल तबाह हो चुके हैं और मृत या घायलों में 27 प्रतिशत बच्चे हैं।
पिछले दो वर्षों में सोनिया गांधी के सात लेखों में से तीन गाजा और ईरान पर केंद्रित रहे, जबकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा पर एक भी लेख नहीं।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की नीति रणनीतिक संतुलन और 'सभी के साथ जुड़ाव' पर आधारित है।
विश्लेषकों के अनुसार यह पैटर्न 'सेलेक्टिव आउटरेज' और वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हाल ही में एक लेख लिखकर गाजा संघर्ष पर केंद्र सरकार की नीति को कठघरे में खड़ा किया। इस लेख में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर गंभीर मानवीय संकट पर 'चुप्पी' का आरोप लगाया। हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यही पैटर्न बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुई हिंसा के मामले में नदारद रहा — जिससे 'सेलेक्टिव आउटरेज' की बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

सोनिया गांधी के लेख में क्या है

सोनिया गांधी ने अपने लेख में संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसके अनुसार इजरायल गाजा में फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि गाजा में अब तक कम से कम 20,000 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44,000 बच्चे घायल हुए हैं। उनके अनुसार, गाजा में मारे गए या घायल हुए लोगों में 27 प्रतिशत बच्चे हैं और वहाँ के 97 प्रतिशत स्कूल तबाह हो चुके हैं।

सोनिया गांधी ने इन आँकड़ों को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार से कड़े कदम उठाने की माँग की और मानवीय दृष्टिकोण से भारत की भूमिका को अधिक मुखर बनाने का आह्वान किया।

भारत सरकार की गाजा नीति क्या है

सोनिया गांधी के 'चुप्पी' के आरोपों के विपरीत, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की नीति 'सभी के साथ जुड़ाव' और रणनीतिक संतुलन पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर — चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष — युद्ध की जगह बातचीत और शांति को प्राथमिकता देने की अपील की है।

भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यावहारिक फिलिस्तीन राज्य के निर्माण का समर्थन करता है, जो इजरायल के साथ सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं में शांति से रह सके। उल्लेखनीय है कि ईरान ने भी प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा था कि भारत की आवाज़ क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण है।

बांग्लादेश पर चुप्पी और 'सेलेक्टिव आउटरेज' का सवाल

विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोनिया गांधी ने कुल सात लेख लिखे, जिनमें से तीन लेख गाजा और ईरान से संबंधित रहे। इसके उलट, बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुई व्यापक हिंसा — जिसमें मॉब लिंचिंग, घरों-दुकानों में आगजनी और ईशनिंदा के झूठे मामलों में गिरफ्तारियाँ शामिल हैं — पर उन्होंने न कोई लेख लिखा और न ही कोई सार्वजनिक बयान दिया।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान और उसके बाद हिंदुओं व अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएँ सामने आती रहीं। तारिक रहमान सरकार के कार्यकाल में भी यह सिलसिला कमोबेश जारी बताया जा रहा है। इस विरोधाभास को लेकर आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस का यह रवैया 'वोट बैंक' की राजनीति से प्रेरित है।

कांग्रेस का रुख और विपक्ष का पैटर्न

कांग्रेस पार्टी ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर केंद्र सरकार की नीति पर ही सवाल उठाए, न कि वहाँ हो रही हिंसा की सीधी निंदा की। यही पैटर्न नेपाल के संदर्भ में भी देखा गया, जहाँ विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की विदेश नीति को कठघरे में खड़ा किया।

इसके विपरीत, भारत सरकार ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ पड़ोसी देशों से लेकर वैश्विक महाशक्तियों तक संतुलित संबंध बनाए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

आगे क्या

सोनिया गांधी का यह लेख ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र नजदीक है और विपक्ष सरकार को विदेश नीति के मोर्चे पर घेरने की तैयारी में है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के लेख और बयान आने वाले चुनावी मौसम में विमर्श को आकार देने की कोशिश का हिस्सा हो सकते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या विपक्ष अपनी आलोचना में सभी समुदायों के प्रति एकसमान संवेदनशीलता दिखाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता उस चुप्पी से कमज़ोर होती है जो बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुई हिंसा के वक्त देखी गई। दो साल में सात में से तीन लेख एक खास भू-राजनीतिक कोण पर और शून्य पड़ोस की सांप्रदायिक हिंसा पर — यह संयोग नहीं, पैटर्न है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस असंगति को नज़रअंदाज़ कर देती है। जब तक विपक्ष की आलोचना सार्वभौमिक मानवीय मानकों पर टिकी न हो, वह सत्ता को जवाबदेह बनाने के बजाय चुनावी विमर्श की औज़ार बनकर रह जाती है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनिया गांधी ने अपने लेख में गाजा को लेकर क्या दावे किए?
सोनिया गांधी ने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गाजा में कम से कम 20,000 बच्चों की मौत हो चुकी है और 44,000 घायल हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि गाजा के 97 प्रतिशत स्कूल तबाह हो चुके हैं और मृत या घायलों में 27 प्रतिशत बच्चे हैं।
गाजा संघर्ष पर भारत सरकार की आधिकारिक नीति क्या है?
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की नीति 'सभी के साथ जुड़ाव' और रणनीतिक संतुलन पर आधारित है। भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु फिलिस्तीन राज्य का समर्थन करता है और प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर युद्ध की जगह बातचीत को प्राथमिकता देने की अपील की है।
'सेलेक्टिव आउटरेज' का आरोप क्यों लग रहा है?
विश्लेषकों का कहना है कि सोनिया गांधी ने पिछले दो वर्षों में सात लेखों में से तीन गाजा और ईरान पर लिखे, लेकिन बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुई व्यापक हिंसा — जिसमें मॉब लिंचिंग और आगजनी शामिल है — पर कोई लेख या बयान नहीं आया। इस असंगति को 'सेलेक्टिव आउटरेज' और वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर क्या हुआ और कांग्रेस का रुख क्या रहा?
बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान और उसके बाद हिंदुओं व अन्य अल्पसंख्यकों पर मॉब लिंचिंग, घरों-दुकानों में आगजनी और ईशनिंदा के झूठे मामलों में गिरफ्तारियों की घटनाएँ सामने आईं। कांग्रेस ने इन घटनाओं की सीधी निंदा करने की बजाय केंद्र सरकार की बांग्लादेश नीति पर ही सवाल उठाए।
क्या भारत ने फिलिस्तीन के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है?
हाँ, भारत ने बार-बार फिलिस्तीनी लोगों और गाजा शांति प्रक्रिया के लिए अपना समर्थन दोहराया है। ईरान ने भी प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा था कि भारत की आवाज़ क्षेत्रीय शांति के लिए अहम है। भारत इजरायल के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखते हुए फिलिस्तीन के लिए पारंपरिक समर्थन के बीच संतुलन साधता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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